आज गुरुनानक जयंती पर सजेंगे गुरुघर, होगा शबद कीर्तन ...

स्वर्ण मंदिर के साथ-साथ कई इतिहासिक गुरुद्वारों में लोगों का सैलाब उमड़ा

Himanshu Srivastava | Published On: Nov 04, 2017 11:14 AM IST |   426

अमृतसर।

सिख धर्म के पहले गुरु और संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में पंजाब के साथ-साथ विदेशों में बसे पंजाबी लोगों ने भी इसे धूम-धाम से मनाया। स्वर्ण मंदिर के साथ-साथ कई इतिहासिक गुरुद्वारों में लोगों का सैलाब उमड़ा।

क्या हैं इस पर्व के मायने

आपको बता दें कि इस दिन सभी सिख और गुरु नानक जी के अनुयायी इस दिन नानक देव को याद करते हुए इस दिन को उल्लास के साथ मनाते हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार ये पर्व हर वर्ष कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। गुरु नानक देव का जन्म 15 अप्रैल 1469 को राई भोई दी तलवंडी नाम के गांव में हुआ था। अब ये जगह लाहौर के पास पाकिस्तान में ननकाना साहिब के नाम से प्रख्यात है। इन्होनें अपना पूरा जीवन आध्यात्मिकता की शक्ति को बताना में बिताया और अंत में उन्होनें सिख धर्म की स्थापना की थी। गुरु नानक देव के जन्मदिन को गुरु पूर्व के नाम से जाना जाता है। इस दिन गुरु ग्रंथ साहिब में लिखे नानक देव की शिक्षाएं हर जगह पढ़ी जाती हैं।

आस्था का प्रतीक

गुरुपर्व सभी पर्वों की तरह ही मनाया जाता है। इनमें बस भजन अलग होते हैं। गुरुपर्व इसलिए विशेष माना जाता है क्योंकि सिख धर्म में ऐसी मान्यता है कि गुरु नानक ने संसार में अध्यात्म की रौशनी फैलाई थी, इसलिए इस दिन को प्रकाश उत्सव के नाम से जाता है। गुरु पर्व से 15 दिन पहले इस पर्व का उत्सव मनाया जाता है। इसमें प्रभात फेरी निकाली जाती हैं जो घर-घर जाकर शब्द कीर्तन करते हैं। गुरु पर्व से एक दिन पहले नगरकीर्तन की शुरुआत गुरुद्वारे से निकलता है। तीन दिन पहले से ही गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ पढ़ना शुरु कर दिया जाता है। इसका पाठ बिना रुके गुरु पर्व के दिन किया जाता है। नगरकीर्तन में गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी पर फूलों से सजाकर ले जाया जाता है। निशान साहिब की रक्षा पांच पहरेदार करते हैं जिन्हें पंच प्यारे कहा जाता है। ये लोग सिख धर्म के झंडे लेकर आगे चलते हैं और इनके पीछे सभी भक्त भजन कीर्तन करते हुए चलते हैं।

गुरु नानक देव ने की सिख धर्म की स्थापना

इस दिन सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक देव जिन्होंने सिख धर्म की स्थापना की थी उनका जन्म हुआ था। हर वर्ष गुरु पर्व की तिथि में परिवर्तन आता रहता है। हिंदू पंचाग के अनुसार गुरु पर्व कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

गुरु नानक जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 में तलवंडी नामक जगह हुआ था, जो अब पाकिस्तान के पंजाब हिस्से में है। इस दिन सिख धर्म के सभी लोग उनके जन्मदिन की खुशी मनाते हैं। गुरु नानक जी ने अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु सभी के गुण समेटे हुए थे।

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