नो डिस्टर्ब, प्रजनन के लिए विदेशी मेहमानों का आना शुरू

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Mahesh Sharma | Published On: Nov 02, 2017 11:52 AM IST |   90

केंद्रपाड़ा। जिले के गहिमथा समुद्री तट पर सात महीने तक मछुआरे मछली मारने नहीं जा सकेंगे। इन दिनों विदेशी मेहमान प्रजनन के लिए आ रहे हैं। केंद्रपाड़ा के गहिरमाथा समुद्र तट पर हर साल करीब नौ लाख से अधिक ओलिव रिडले समुद्री कछुए के पहुंचने के साथ ही इसने एक बार फिर से इस समुद्री जीव के सबसे बड़े ठिकाने के रूपे में अपने को स्थापित किया है। वन विभाग के अनुसार पिछले साल यह रिकार्ड 9.75 लाख का था। कछुए की यह प्रजाति अस्तित्व के खतरे से गुजर रही है। प्रजनन के लिए कछुए ओडिशा के समुद्र तट को मुफीद समझते हैं।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि रेतीले समुद्र तट के पास पड़े इस नाजुक समुद्री प्रजाति हर साल छह से सात करोड़ तक अंडे देती है।। हालांकि समुद्र तट पर जगह की कमी होने के कारण अंडों को नुकसान पहुंच रहा है। अप्रैल मास तक ये लौटने लगते हैं। वन्य प्राणि मुख्य संरक्षक संदीप त्रिपाठी ने बताया कि गहिमथा के बीस किलोमीटर की रेंज में बोट तक जाने की मनाही है। उनका कहना है कि यह प्रतिबंध गहिमथा सैंक्चुरी और ऋषिकुल्या नदी के तटीय हिस्से तक लागू है। ओलिव रिडले प्रजनन के लिए ओडिशा में केंद्रपाड़ा गंजाम और पुरी। पर सबसे ज्यादा केंद्रपाड़ा के गहिरमथा तट पर आते हैं।

हिंद महासागर से होते हुए ओविल रिडले पहुंचते हैं। इस कछुए ने विश्व में ओडिशा को पहचान दिलायी है। त्रिपाठी कहते हैं कि अबकी नौ लाख से ज्यादा कछुए आने के आसार हैं। सन 1974 में ब्राह्मणी और वैतरणी (धमरा) के निकट गहिरमथा रूकरी की खोज एवं वैश्विक पहचान केपश्चात ओडशा में ओलिव रिडले प्रजाति के कछुओं के संरक्षण के विषय में प्रयास शुरू किया गया। गहिरमथा के दक्षिण करीब 55 नॉटिकल मील दूर देवी नदी के मुहाने पर 1981 में अंडों के प्रजनन के दूसरे समूह तथा गहिमथा के दक्षिण 162 नॉटिकल मील दूर ऋषिकुल्या के मुहाने पर 1994 में प्रजनन के तीसरे स्थान की खोज हुई। एक प्रौढ़ मादा सौ से 150 तक अंडे देती है।

 



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