चंद्रयान-1 के डाटा की मदद से चांद पर पानी साबित करने वाला पहला नक्शा हुआ तैयार....

चंद्रयान-1 पर लगे एक उपकरण की मदद से हासिल डाटा के आधार पर बनाया गया है। इससे फ्यूचर में चांद के बारे में रिसर्च में मदद मिलेगी।

Published On: Sep 14, 2017 09:52 PM IST | Updated On: Sep 14, 2017 12:26 PM IST |   685

खास बातें

  • चांद की मिट्टी की सबसे ऊपरी सतह में मौजूद पानी का पहला नक्शा तैयार किया है
  • चंद्रयान-1 पर लगे एक उपकरण की मदद से हासिल डाटा के आधार पर बनाया गया है
  • चंद्रयान-1 ने 2008 में उड़ान भरी थी

वॉशिंगटन:

वैज्ञानिकों ने चांद की मिट्टी की सबसे ऊपरी सतह में मौजूद पानी का पहला नक्शा तैयार किया है। इसे भारत के स्पेसक्राफ्ट चंद्रयान-1 पर लगे एक उपकरण की मदद से हासिल डाटा के आधार पर बनाया गया है। इससे फ्यूचर में चांद के बारे में रिसर्च में मदद मिलेगी। चंद्रयान-1 ने 2008 में उड़ान भरी थी...

न्यूज एजेंसी के मुताबिक चंद्रयान-1 ने 2008 में स्पेस में उड़ान भरी थी, इसका काम यह पता लगाना था कि ग्लोबल स्केल पर कितना पानी मौजूद है। तब अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने नासा के मून मिनरलॉजी मैपर के जरिये जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल कर एक नया प्रयोग किया था। 

ब्राउन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर राल्फ मिलिकेन ने कहा, "चांद की सतह पर मौजूद पानी का ये नक्शा एक रोडमैप है।"साइंस एडवांसेज जर्नल में पब्लिश स्टडी के मुताबिक चांद की मिट्टी में पानी और इससे जुड़े मॉलीक्यूल 'हाइड्रॉक्सिल' को सबसे पहले 2009 में खोजा गया था, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के एक-एक अणु से मिलकर बना है।

 सतह पर करीब हर जगह पानी के संकेत

ब्राउन यूनिवर्सिटी में पीएचडी के पूर्व स्टूडेंट शुआई ली ने कहा, "चांद की सतह पर करीब हर जगह पानी की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। यह सिर्फ धुव्रीय क्षेत्रों ( polar regions) तक सीमित नहीं है, जैसा कि पहले रिपोर्ट में बताया गया था।"

रिसर्चर्स का कहना है कि धुव्रीय क्षेत्रों की तरफ पानी की मात्रा बढ़ जाती है। हायर लैटीट्यूड्स (उच्च अक्षांशों) में पानी औसत रूप से अधिकतम करीब 500 से 750 प्रति मिलियन हिस्सों में होता है, जो पृथ्वी पर सूखे रेगिस्तान में पाए जाने वाले पानी के मुकाबले कम होता है। 

चांद के नक्शे को तैयार करना आसान नहीं

वैज्ञानिकों का कहना है कि चांद के नक्शे को तैयार करना पृथ्वी के नक्शे को तैयार करने जितना आसान नहीं है, क्योंकि पृथ्वी का नक्शा तैयार करने के दौरान भूगर्भीय ब्योरों के बारे में शक होने पर इससे जुड़ी जानकारी कन्फर्म करने के लिए वैज्ञानिक निजी तौर पर उस जगह पहुंच भी सकते हैं, लेकिन चांद पर ऐसा संभव नहीं है।

लापता चंद्रयान-1 का नासा ने लगाया था पता

चांद के लिए भारत का पहला मानवरहित अभियान चंद्रयान-1 के बारे में माना जा रहा था कि वह लापता हो गया है, लेकिन इसी साल मार्च में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी कि भारत का यह स्पेसक्राफ्ट अभी भी चांद का चक्‍कर लगा रहा है। 

करीब 3.9 अरब रुपए की कॉस्ट वाले चंद्रयान-1 को 2008 में छोड़ा गया था और इसका मकसद चांद की सतह की मैपिंग और कीमती धातुओं का पता लगाना था। इसे दो साल के लिए मिशन पर भेजा गया था, लेकिन लॉन्‍च के एक साल बाद ही इसरो के वैज्ञानिकों का इससे कॉन्टेक्ट खत्म हो गया था। बाद में नासा ने भूमि आधारित रडार तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसका पता लगाया। 

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