ये हैं ओडिशा के सुंदरलाल बहुगुणा, जगा 'दि ट्री मैन'

वन बचाने में जीजान से जुटे हैं

Mahesh Sharma | Published On: Jul 26, 2017 07:36 PM IST |   61

नवरंगपुर। वो वन काटने वालों का पुरजोर विरोध करने लगते हैं। उनके ये तेवर उत्तराखंड के पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा की याद ताजा कर देते हैं। वनों की कटान के दौर में कोई पेड़ों को बचाने और बृहद वृक्षारोपण अभियान शुरू कर दे तो इससे बड़ा मानव जाति पर उपकार नहीं हो सकता। आधुनिकीकरण के नाम पर धरती को वनविहीन किए जाने के दौर में नवरंगपुर जिले के तारागुडा गांव के जगा बिसोई ने वन बचाने का अभियान छेड़कर न केवल लोगों को पेड़ पौधों से प्रेम के लिए प्रेरित किया है बल्कि बल्कि जलवायु परिवर्तन के खतरे से मानव को बचाने का काम भी वह पूरी शिद्दत से कर रहे हैं। उन्हें लोग ट्री मैन कहने लगे हैं। जगा ने अब तक दस हजार पेड़ लगाए हैं इसमें 78 दुर्लभ प्रजाति की औषधीय वनस्पतियां भी हैं।

जगा बिसोई कहते हैं कि वह 15 साल के थे तब से पेड़ पौधों के प्रति उनके मन में लगाव है। वनों का सफाया, पर्यावरण को खतरा, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के चलते उन्होंने इससे निपटने को वनीकरण का रास्ता अपनाया। जगा बिसोई ने एक छोटा सा अभियान शुरू करके दुष्यंत कुमार के उस शेर को जीवंत कर दिया जिसमें कहा गया है, कि ‘आसमां पे भी सुराख हो सकता है, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। ‘ उन्होंने कहा कि वह किसानों से अपील करते रहते हैं कि वनीकरण भविष्य को उज्ज्वल बना देगा। जगा बिसोई कहते हैं कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए किताबी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है। यह तो स्वस्फूर्त होता है। जगा बिसोई खुद कक्षा तीन तक पढ़े हैं। एक ओडिया चैनल से खुलकर बातचीत करते हैं।

जगा दूसरों को मुफ्त में पौधे भी देते हैं। नवरंगपुर वन क्षेत्र के वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जगा की हौसलाआफजाई की है। जिला वन अधिकारी स्वयं मलिक कहते हैं कि जगा को उसके प्रयासों के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए। वह प्रकृति बंधु और प्रकृति मित्र जैसे खिताबों से नवाजे जाएंगे।

 



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