पिता की चलती थी हुकूमत बेटा बना सन्यासी

कभी सिक्किम के युवराज रहे वांग्चुक नामग्याल सिक्किम के आखिरी राज पालडेन थोंड़प के बेटे हैं। सिक्किम के भारत में विलय के समय वह वहां के युवराज हुआ करते थे। लेकिन अब वह बौद्ध सन्यासी बन चुके हैं।

Published On: Jul 18, 2017 02:53 PM IST | Updated On: Jul 18, 2017 05:23 AM IST |   194

आजादी के समय भारत में सैकड़ो रॉयल फैमली देश के अलग-अलग हिस्सों पर राज कर रही थीं। आजादी के बाद इन सबका भारत में विलय हो गया। हालाँकि समय बदलने के साथ ही बहुत से शाही परिवारों ने अपना रुतबा बरकरार रखने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाये।

कुछ शाही परिवारों ने राजनीति का रूख कर लिया। मध्य प्रदेश की सिंधिया और पंजाब में पटियाला की रॉयल फैमली का नाम इसमें लिया जा सकता है। कुछ शाही परिवारों ने अपनी बेशकीमती प्रोपर्टी को होटल, बार, रेस्टोरेंट और मैरिज हाल में बदल दिया, इसमें राजस्थान के रजवाड़ों का नाम सबसे आगे है। ऐसे ही तरीको के चलते इन रजवाड़ों के वंशजो जा शाही रुतबा और लग्जरी लाइफ अभी भी बरक़रार है। 

लेकिन हम जिस रॉयल फॅमिली की बात कर रहे हैं उसकी कहानी इन सबसे अलग है। उसके पिता की कभी हुकूमत चलती थी, लेकिन आज वह सन्यासी का जीवन जी रहा है।

कभी सिक्किम के युवराज रहे वांग्चुक नामग्याल सिक्किम के आखिरी राज पालडेन थोंड़प के बेटे हैं। सिक्किम के भारत में विलय के समय वह वहां के युवराज हुआ करते थे। लेकिन अब वह बौद्ध सन्यासी बन चुके हैं। वे सिक्किम, अरुणाचल, नेपाल और भूटान में फैले सैकड़ो बौद्ध मठों में ध्यान और साधना करते हैं। पुरानी हुकूमत के नाम पर उनके पास बस यादे हैं और सामने अध्यात्म का एक बड़ा संसार।

ये है नामग्याल फैमली का इतिहास 

  • - नामग्याल परिवार ने 1642 से सिक्किम में शासन करना शुरू किया था।
  • - फुटसोंग नामग्याल इसके पहले शासक थे और पालडेन नामग्याल आखिरी।
  • - 1975 में सिक्किम के भारत में विलय तक वह राजा के पद पर रहे इसके बाद इसके बाद सिक्किम भारत का हिस्‍सा बन गया।
  • - पाल्‍डेन थोंडप नामग्‍याल की मौत 1982 में हुई। सिक्किम में राजा को चोग्‍याल कहा जाता है, इसका मतलब होता है, धर्मराज।

पिता की गद्दी गई तो 22 साल के थे वांग्‍चुक नामग्‍याल

- सिक्किम का भारत में आधिकारिक विलय 1975 में हुआ। 

- भारत के पक्ष में सिक्किम की जनता ने राजा पाल्‍डेन थोंडप नामग्‍याल के खिलाफ विद्रोह कर दिया।

-  इसके चलते भारत को वहां दखल देना पड़ा और संविधान संशोधन के जरिए सिक्किम भारत का एक राज्‍य बन गया। 

- यह सब जब हो रहा था तब वांगचुक नामग्‍याल करीब 22 साल के थे। वह अपने पिता के दूसरे बेटे थे। 

- वह 1952 में पैदा हुए और अब करीब 64 साल के हो चुके हैं।  - उनके बड़े भाई और एक बहन की हादसे में मौत हो गई थी। वह शाही परिवार के एक मात्र वारिस हैं।

 

आध्यात्मिक सुख के लिए नामग्‍याल ने सबकुछ छोड़ दिया

- जहाँ एक ओर रायल फैमिली से जुड़े लोग अक्‍सर इस फिराक में रहते हैं कि कैसे उनकी संपत्ति में और इजाफा हो। वहीँ वांग्‍चुक नामग्‍याल जब बड़े हुए तो उन्‍होंने सबकुछ छोड़ दिया।

- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 35 साल पहले उन्‍होंने अपनी शाही पदवी ही छोड़ दी। - इसके बाद वह बौद्ध संन्‍यासी हो गए। वह आमतौर पर पब्लिक में कम दिखाई पड़ते हैं।   

- वह पिछले 35 साल से सिर्फ ध्‍यान और साधना कर रहे हैं और यही उनके जीवन का सत्‍य है।

 

पिता के क्‍लेम पर भी नहीं जताया दावा

- नामग्‍याल फैमिली से जुड़े कुछ लोगों ने इलायची के कई बगीचों के मालिक हैं, जबकि कुछ के पास दुनिया भर के कई बड़ें होटलों में हिस्‍सेदारी है।

- हालांकि वांगचुग इन सबसे अलग हैं। यहां तक उन्‍होंने पिता के 110 करोड़ रुपए के क्‍लेम का मुकदमा भी छोड़ दिया जिसका दावा उनके पिता ने कभी भारत सरकार के खिलाफ ठोका था। 

- उनके पिता ने यह दावा सिक्किम को भारत में मिलाने के हर्जाने के एवज में ठोका था।

पैलेस में तो कई बार गए पर रात नहीं गुजारी

- वांग्‍चुक पिछले 35 सालों से संन्‍यासी का जीवन जी रहे हैं। इस दौरान गंगटोक स्थित उनके पैतृक महल में भी उनका आना जाना हुआ।

- हालांकि वहां उन्‍होंने कभी रात नहीं गुजारी। वह हमेशा मठ में ही सोते हैं और वहीं ध्‍यान साधना करते हैं।

- उन्‍हें कई बार नेपाल और भूटान की गुफओं में भी कठित योग साधना करने पाया गया है। 

- उन्‍होंने 1982 में अपने पिता की मौत के बाद घर छोड़ा था और फिर उन्‍होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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