नाल्को में विनिवेश मामले पर कर्मचारियों के साथ हैं मुख्यमंत्री

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Samajalive.in Bureau | Published On: May 25, 2017 05:57 PM IST | Updated On: May 25, 2017 08:27 AM IST |   2330

भुवनेश्वर। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक नाल्को में विनिवेश के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ है। उन्होंने कर्मचारियों के प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि वह इस मामले पर केंद्र से बातचीत करेंगे। नाल्को (नेशनल एल्मुनियम कंपनी) में विनिवेश की केंद्र सरकार की नीति के विरुद्ध नाल्को में यूनियनों की कोआर्डिनेशन कमेटी का प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से भेंट की। उनकी मांग है कि नाल्को में विनिवेश रोकने के लिए राज्य सरकार हस्तक्षेप करे। केंद्र ने विनिवेश नीति के तहत शुरुआती दौर में 9.1 प्रतिशत शेयर बेच रही है। बताते हैं कि इस वित्तीय वर्ष में केंद्र साढ़े 72 करोड़ विनिवेश करना है। उनका कहना है कि इसस कंपनी कमजोर हो जाएगी। नाल्को में केंद्र की 74.58 प्रतिशत साझेदारी है। विनिवेश कार्यक्रम के तहत करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री की जा रही है।  नाल्को के पास भी इतनी ही मात्रा में विनिवेश का विकल्प है। सरकार कंपनी की प्रमुख प्रवर्तक है। उसके पास कंपनी की 74.58 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी की शेष हिस्सेदारी सार्वजनिक है। यह कंपनी खान मंत्रालय के प्रशासनिक दायरे में आती है। चालू वित्त वर्ष के लिए नाल्को पहला विनिवेश होगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में करीब दर्जन भर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 34,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। किसी कंपनी में निवेश की गयी रकम को वापस लेना विनिवेश प्रक्रिया का हिस्सा है। सरकार नाल्को के नियंत्रण से बाहर आना चाहती है। स्वामित्व से छुटकारा। विनिवेश से मिले धन को वह दूसरी योजनाओं में लगाना चाहती है। सरकारी जुबान बोले तो विनिवेश का एक उद्देश्य कंपनी का बेहतर प्रबंधन भी कहा जाता है। उदारीकरण की प्रक्रिया के तहत सरकार को निवेश करने से तमाम कंपनियों में शेयर हासिल हुए हैं। शेयर स्वामित्व का प्रमाणित कागज होता है। पब्लिक सेक्टर की इकाइयों से सरकार का हटने के पीछे बताया जाता है कि राजा ही रोजगार करेगा तो प्रजा का क्या होगा। यानी सरकार का काम देश चलाना है न कि उद्योग। विनिवेश में कंपनी के शेयर पब्लिक में जारी कर दिए जा सकते हैं या फिर किसी प्राइवेट सेक्टर को बेचे भी जा सकते हैं। 
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