देर से सही परन्तु मिला सही इंसाफ

यह सजा नही सबक है

Hitesh Tiwari | Published On: May 05, 2017 08:17 PM IST | Updated On: May 05, 2017 10:47 AM IST |   150

निर्भया गैंगरेप हत्याकांड

  • 16 दिसम्बर 2012 रविवार का वह काला दिन
  • 20 किलोमीटर की दूरी तक वारदात को दिया था अंजाम
  • तिहाड़ जेल में 11 मार्च 2013 को एक आरोपी ने कर ली थी खुदकशी
  • 2013 में चारों दोषियों को सुनाई थी फांसी की सजा
  • मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार

हितेश तिवारी

नई दिल्ली।

कहते है कि भगवान के घर देर है अंधेर नही । आज यही बात सुप्रीम कोर्ट में भी देखने को मिली। निर्भया हत्याकांड और गैंगरेप के आरोपियों की मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखते हुए कहा कि यह बर्बरता क्षमा के काबिल नही है। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। आरोपियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की गई थी।

क्या था मामला

16 दिसम्बर 2012 रविवार के दिन की रात को दिल्ली में एक ऐसा कांड हुआ जिसे पूरं देश वासियों को झकझोर दिया था। निर्भया शाम को साकेत स्थित सेलेक्ट सिटी मॉल में ‘लाइफ ऑफ पाई’ मूवी देखने के बाद 23 वर्षीय फीजियोथेरेपिस्ट छात्र अपने दोस्त अवनिंद्र के साथ रात 9 बजे ऑटो से मुनिरका पहुंची थी। वहां स्टैंड के पास खड़े होकर दोनों बस का इंतजार कर रहे थे।

9.15 बजे आइआइटी की तरफ से सफेद रंग की आई चार्टर्ड बस के परिचालक ने उन्हें बस में बैठने के लिए कहा था। उनके बस में सवार होते ही परिचालक ने दरवाजा बंद कर दिया था। बस में चालक समेत छह लोग सवार थे। कुछ दूर आगे जाने पर बस के परिचालक व उसके साथियों ने युवती से छेड़खानी शुरू कर दी थी। विरोध करने पर उन्होंने युवती के दोस्त की रॉड से बुरी तरह पिटाई की थी। इसके बाद उन्होंने युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। इस दौरान बस ने करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी। दोषियों ने महिपालपुर में होटल एरिया के सामने चलती बस से दोनों को निर्वस्त्र हालत में नीचे फेंक दिया था। 

गुजरती कार ने पुलिस को दी थी सूचना

उस दौरान वहां से गुजरने वाले एक कार सवार की नजर पड़ने पर उसने पुलिस को इसकी सूचना दी थी। 10.22 बजे दिल्ली कैंट थाने को सूचना मिली कि महिपालपुर से दिल्ली कैंट की तरफ आने पर जीएमआर कंपनी के गेट नंबर एक के सामने एक लड़का व लड़की बेहोशी की हालत में पड़े हुए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस दोनों को सफदरजंग अस्पताल लेकर गई। घटना के कुछ दिन बाद युवती की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

निचली अदालत ने दी थी फांसी की सजा

पुलिस ने वारदात में शामिल बस चालक रामसिंह, परिचालक मुकेश कुमार व अक्षय कुमार उर्फ अक्षय ठाकुर, उनके साथियों पवन कुमार और विनय शर्मा को गिरफ्तार किया था। मामले में पुलिस ने एक नाबालिग को भी पकड़ा था। निचली अदालत ने नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजने का आदेश दिया था जबकि बाकी सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी।

एक दोषी ने लगा ली थी फांसी

तिहाड़ जेल में 11 मार्च 2013 को राम सिंह ने खुदकशी कर ली थी। मृतक ने कहा था कि मैने निर्भया के साथ कुछ भी नही किया था परन्तु मेरा अपराध बहुत बड़ा है। मुझे बस को रोक देनी चाहिए थी। अगर मै बस रोक देता तो ऐसा कुछ नही होता। 

हाइकोर्ट में दी थी चुनौती

अन्य दोषियों ने फांसी की सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां कोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सजा को चुनौती दी है। तीन साल बाल सुधार गृह में बिताकर नाबालिग रिहा हो चुका है।

2013 में सुनाई गई थी फांसी की सजा

दिल्ली दुष्कर्म कांड में साकेत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सितंबर 2013 में चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। जिस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने 13 मार्च 2014 को मुहर लगा दी थी। दोषियों ने वकील एमएल शर्मा और एमएम कश्यप के जरिये सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाई कोर्ट ने दोषियों की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनका अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में आता है।

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोषी सुप्रीम कोर्ट आये हैं। निर्भया कांड का एक आरोपी नाबालिग था, जिस पर जुविनाइल जस्टिस एक्ट के तहत जुविनाइल बोर्ड में मुकदमा चला। कानून के मुताबिक वह अपनी सजा पूरी कर छूट चुका है। हालांकि, नाबालिग के छूटने पर भी देश में लंबी बहस छिड़ी जिसके बाद कानून में संशोधन किया गया और जघन्य अपराध में आरोपी 16 से 18 वर्ष के बीच के किशोरों पर सामान्य अदालत में मुकदमा चलाने के दरवाजे खोले गए। 

एसओएस अलर्ट योजना भी ठंडे बस्ते में

सूत्रों के मुताबिक सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय की ओर से दिये गए प्रस्तावों में प्रत्येक मोबाइल हैंडसेट में अनिवार्य रूप से एसओएस अलर्ट बटन रखने की योजना भी रकम के अभाव में ठंडे बस्ते में पड़ी है। अगर योजना शुरू होती तो महिलाएं जरूरत पड़ने पर पुलिस प्रशासन से आसानी से जुड़ सकती थीं।

महिलाओं की मांग

देश भर में महिलाओं ने मांग की है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा है तो फांसी देने में देर नही लगाई जाये इन दरिंदों को तुरंत फांसी दे देनी चाहिए।

क्या कहा निर्भया की मां ने

निर्भया कि मां ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कहा कि देर से ही सही परन्तु मेरी बेटी को सही इंसाफ मिला है। यह इंसाफ केवल मेरी बेटी को ही नही देश को मिला है। देश की सर्वोच्च अदालत ने आज जो फैसला सुनाया है उससे मै और पूरा देश सहमत है।

क्या कहना है आरोपियों के वकील का 

आरोपियों के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कहा कि सबक सिखाने के लिए किसी को फांसी की सजा नही सुनाई जा सकती है।

Tags:

Like Us

ब्रेकिंग न्यूज