FBI ने जारी की नीरजा भनोट के कातिलों की तस्वीरें...

ये वही अपहरणकर्ता हैं जिन्होंने 1986 में पैन एएम फ्लाइट 73 को हाईजैक किया था जिसकी वजह से नीरजा भनोट सहित 20 लोगों की मौत हो गई थी

ARPITA KATIYAR | Published On: Jan 12, 2018 05:59 PM IST | Updated On: Jan 12, 2018 06:04 PM IST |   68

नई दिल्ली।

अमेरिका की एफबीआई(फेडरल ब्युरो ऑफ इनवेस्टीगेशन) ने गुरुवार को चार अपहरणकर्ताओं की तस्वीर जारी की है। ये वही अपहरणकर्ता हैं जिन्होंने 1986 में पैन एएम फ्लाइट 73 को हाईजैक किया था जिसकी वजह से नीरजा भनोट सहित 20 लोगों की मौत हो गई थी। भारत की नीरजा भनोट इस फ्लाइट की मुख्य पर्सर के रुप में तैनात थी। नीरजा आतंकियों से बेहद बहादुरी के साथ सामना करते हुए शहीद हो गईं थीं। इसी वीरता के लिए भारत सरकार ने नीरजा को मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाजा था।

FBI ने ट्विटर पर साझा की तस्वीरें

FBI ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से इन चार आंतकवादियों की तस्वीरें साझा की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन तस्वीरों को साल 2000 में एफबीआई द्वारा प्राप्त एज-प्रोग्रेसन टेक्नोलॉजी और मूल तस्वीरों का उपयोग करके एफबीआई प्रयोगशाला द्वारा बनाया गया था। गौरतलब है कि 5 सितम्बर 1986 को निरजा मुंबई से अमेरिका जाने वाली पैन एम 73 फ्लाइट में सवार थी लेकिन कराची पहुंचते ही यह फ्लाइट हाईजैक हो गई।

50 लाख अमेरिकी डॉलर का रखा था इनाम

अमेरिका की स्टेट डिपार्टमेंट ने आरोपियों की सूचना देने वालों के लिए 50 लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा था। ये चारो आतंकी अबु निदल संगठन(एएनओ) के सदस्य बताए जाते हैं। ये चारों एफबीआई की मोस्ट वांटेड आतंकवादी की सूची में हैं।

महज 20 साल कि उम्र में गवाई जान

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आपको बता दें कि 5 सितंबर 1986 को अपहरणकर्ताओं ने पैन एएम फ्लाइट 73 को कराची से हाईजैक कर लिया था। इस दौरान नीरजा भनोट सहित 20 लोगों की मौत हो गई थी और सौ से अधिक यात्री घायल हो गए थे। इस फ्लाइट में कुल 379 यात्री सवार थे। इस हादसे के समय नीरजा की उम्र महज 22 साल थी। भारत की नीरजा भनोट इस फ्लाइट की मुख्य पर्सर के रुप में तैनात थी। नीरजा ने इस विमान के यात्रियों को सकुशल बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी। इसके लिए भारत सरकार ने नीरजा को मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाजा था।

क्या थी 5 सितंबर 1986 कि घटना

5 सितंबर 1986 को निरजा मुंबई से अमेरिका जाने वाली पैन एम 73 फ्लाइट में सवार थीं। फलाइट के कराची पहुंचने के कुछ समय बाद ही इसको हाईजैक कर लिया गया था। यह सभी लिबिया की अबू निदल ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े हुए थे। इनका मकसद विमान में मौजूद अमेरिकियों को जान से मारना था। इसके अलावा वह अपने फिलिस्‍तीनी साथियों की जेल से रिहाई चाहते थे। आतंकी 369 यात्रियों से भरी फ्लाइट को क्रैश करना चाहते थे।

आतंकि अमेरिकियों को चाहते थे मारना

भनोट के साहस का इस बात से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब विमान के पायलट, सहायक पायलट और फ्लाइट इंजीनियर विमान छोड़कर भाग निकले थे उस वक्‍त नीरजा ने ही आतंकियों को समझाने की कोशिश की थी। आतंकी अमेरिकियों को तलाशकर उन्‍हें मार डालना चाहते थे। एक अमेरिकी को उन्‍होंने विमान के गेट पर ले जाकर गोली भी मार दी थी। इससे बचने के लिए नीरजा ने सभी अमेरिकियों के पासपोर्ट अपने पास रख लिए थे। इस विमान में करीब 44 अमेरिकी सवार थे जिनमें से दो को आतंकियों ने मार दिया था। लेकिन नीरजा आतंकियों का समय बीताकर वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और सरकार को मौका देने की कोशिश कर रही थी। नीरजा ने इस दौरान वह सब किया जो उनके बस में था। मौका मिलते ही नीरजा ने विमान द्वार खोलकर यात्रियों को बाहर निकाल दिया। लेकिन इसी दौरान हुई गोलीबारी में उनकी मौत हो गई थी।

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