रसगुल्ला छूटा तो क्या, हल्दी का लेंगे जीआई टैग

.

Samajalive.in Bureau | Published On: Jan 12, 2018 05:08 PM IST |   9

कंधमाल। रसगुल्ला का जीआई टैग छूटने के बाद अब कंधमाल की हल्दी को जीआई टैग (भौगोलिक पहचान) दिलाने के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिला प्रशासन और संबंधित सरकारी विभागों की मदद से कंधमाल एपेक्स स्पाइसेस एसोसिएशन फॉर मार्केटिंग (कसम) ने हल्दी को जीआई टैग के लिए आवेदन कर दिया है। इससे जुड़े सभी कागजात भी आवेदन के साथ ही चेन्नै स्थित जीआई रजिस्ट्रार कार्यालय को भेजा है।

दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार को रसगुल्ले के लिए जीआई टैग मिलने के बाद अब ओडिशा सरकार की भी तंद्रा टूटी है। इसी के तर्ज पर कंधमाल जिले के उत्पादित हल्दी को भौगोलिक पहचान (जीआई) टैग दिलाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है।

सेंट्रल टूल रूम ट्रेनिंग सेंटर का दि इंटलेक्चुअल प्रापर्टी फैसिलिटेशन सेंटर (आईपीएफसी) ने कसम की ओर से आवेदन कर दिया है। जीआई रजिस्ट्रार कार्यालय ने छानबीन के बाद इस पर विचार करने के लिए स्वीकृत भी कर लिया है। इसमें संबंधित पेपरों के साथ ही परीक्षण रिपोर्ट भी हैं जो जीआई टैग के लिए जरूरी होती है।

आईपीएफसी प्रमुख डा.शशिकांत कर ने बताया कि उनका दफ्तर एमएसएमई मंत्रालय के अधीन काम करता है। जीआई टैग के लिए आवेदन में संबंधित संस्थाओं या संगठनों की मदद करता है। कंधमाल के जिलाधिकारी व उद्यान निदेशक की रुचि पर उनका विभाग इस प्रक्रिया में जुटा है। फील्ड मुआयना करके किसानों से भी बातचीत की गयी। कंधमाल की हल्दी के जीआई टैग के लिए तकनीकी और ऐतिहासिक रिपोर्ट, उत्पादन के तरीके तथा सामाजिक, पारंपरिक व धार्मिक कनेक्टीविटी व अन्य सूचनाओं के आधार पर कंधमाल की हल्दी को उपयुक्त पाया गया। इस समय कंधमाल में 60 हजार परिवार हल्दी के काम में लगे हैं।

कंधमाल जिले की हल्दी को जीआई टैग मिलने के बाद उसके व्यापार में लोगों की पसंद पर बढ़ोत्तरी होने की सरकार को उम्मीद है। इस हल्दी बहुत सारी औषधीय गुण हैं। इसकी पहचान ही इसके औषधीय गुण के कारण है।

 

Tags:

Like Us

ब्रेकिंग न्यूज

बिहार में आज 588 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बना रिकार्ड बनाएगी बिहार सरकार आगरा-दिल्ली रेलमार्ग पर डीरेल हुई गोंडवाना एक्सप्रेस, बड़ा हादसा होने से बचा 26/11 की तर्ज पर काबुल में हमला, 15 की मौत दर्जनों घायल दिल्ली की पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग, 17 कि मौत, 23 लापता