बड़ी राहत: पेट्रोल और डीजल पांच रुपये तक सस्ता, जानें आपके शहर में कितनी हुई कीमत

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नई दिल्ली: चुनावी साल में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में रोजाना हो रही वृद्धि से परेशान आम जनता को राहत देने के लिए गुरुवार को केंद्र सरकार ने बड़े पैकेज का एलान किया है। इस पैकेज के तहत आम जनता को पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों मे पांच रुपये प्रति लीटर तक की राहत मिली है।

केंद्र ने अपनी तरफ से कीमत में ढाई रुपये की कटौती की और तत्काल बाद भाजपा शासित कई राज्यों ने ढाई रुपये और कम कर दी। हालांकि दिल्ली सहित विपक्षी दल शासित राज्यों की ओर से ऐसा कोई एलान नहीं हुआ।

गुजरात, महाराष्‍ट्र, छत्‍तीसगढ़, त्रिपुरा, उत्‍तर प्रदेश, मध्‍यप्रदेश, हरियाणा, असम, उत्‍तराखंड, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड और हिमाचल प्रदेश ने 2.50 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल सस्‍ता किए जाने की घोषणा की। साथ ही राष्‍ट्रपति शासन के तहत जम्‍मू कश्‍मीर ने भी 2.50 रुपये प्रति लीटर वैट कम किए जाने की घोषणा की। इसके बाद इन राज्‍यों में गुरुवार आधी रात से पेट्रोल और डीजल 5 रुपये प्रति लीटर सस्‍ता हो जाएगा।

पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती का स्‍वागत करते हुए भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के साथ-साथ सभी भाजपा शासित राज्यों ने भी पेट्रोल और डीजल पर ₹2.5 कम करने का निर्णय लिया है जिससे पेट्रोल और डीजल के दामों में 5 रुपये कम होंगे। जनता को राहत देने वाले इस संवेदनशील निर्णय के लिए मैं सभी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बधाई देता हूँ।

पेट्रोल व डीजल की कीमत में लगी आग से अब हाथ जलने का डर था। विपक्ष की ओर से इसे बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा था। दरअसल यही वह मुद्दा था जिस पर कांग्रेस अपने साथ 21 विपक्षी दलों को जोड़ने में सफल रही थी। ऐसे में गुरुवार को सरकार ने एकमुश्त बड़ी राहत देने का फैसला कर पासा पलटने की कोशिश की है। अब विपक्षी दलों के राज्यों पर भी दबाव होगा कि वे भी कटौती के लिए आगे बढ़े।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे और स्पष्ट कर दिया और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा, ‘यह उन लोगों के लिए परीक्षा की घड़ी है जो सिर्फ ट्वीट करते हैं।’ बताते हैं कि बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने फॉर्मूला तैयार किया, जिस पर गुरुवार को सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चर्चा की गई।

इस बारे में भाजपा प्रमुख अमित शाह से भी चर्चा हुई क्योंकि भाजपा शासित सभी राज्य भी इस फॉर्मूले का हिस्सा थे। सनद रहे कि पिछले छह हफ्तों के भीतर देश में पेट्रोल 6.86 रुपये और डीजल 6.73 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।

वित्त मंत्री जेटली ने सरकार के फैसले को एक सटीक व सही फैसला बताते हुए कहा कि सरकार यह नहीं चाहती है कि आम जनता सारा खर्च ईंधन पर ही करे। पेट्रोल व डीजल की कीमत कम होने से जो बचत होगी, उसे दूसरे मदों में खर्च किया जा सकेगा।

राजकोषीय स्थिति पर बुरा असर नहीं
वित्त मंत्री ने इस संभावना से भी इन्कार किया कि इससे सरकार के राजकोषीय स्थिति पर कोई विपरीत असर पड़ेगा। जेटली ने कहा कि केंद्रीय उत्पाद शुल्कों में 1.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती से सरकारी राजस्व में सालाना 21 हजार करोड़ रुपये की कमी होगी जो कुल राजस्व का महज 0.05 फीसद है। चालू वित्त वर्ष में सिर्फ 10,500 करोड़ रुपये की कमी होगी।

तेल कंपनियों पर एक रुपये का भार
जहां तक सरकारी तेल कंपनियों का सवाल है तो उन्हें कहा गया है कि वे लागत का एक रुपये फिलहाल स्वयं वहन करे। इसे एक तरह से तेल कंपनियों को कीमत तय करने में मिली आजादी वापस लेने के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है बल्कि जनता को राहत देने के लिए तय फॉर्मूले में तेल कंपनियों को अभी हिस्सा बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि, ‘मैं सभी राज्यों को पत्र लिख रहा हूं कि वे इन दोनों उत्पादों पर वैट की दरों में इस तरह से कटौती करे कि आम जनता को अतिरिक्त 2.50 रुपये प्रति लीटर की राहत और मिले।’ वित्त मंत्री की घोषणा के कुछ ही देर बाद गुजरात, महाराष्ट्र, असम, झारखंड, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश ने 2.50 रुपये की राहत अपनी तरफ से दी है। इस तरह से इन राज्यों में पेट्रोल और डीजल एक झटके में पांच रुपये तक सस्ती हो गई है।

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