एक ऐसा गांव जहां 25 सालों में दर्ज नहीं हुयी एक भी एफआईआर

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दंतेवाडा : दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के अंतर्गत एक गांव ऐसा भी है जहां के लोग शांति प्रिय हैं और अपने विवादों को मिल बैठकर स्वयं ही निपटाते हैं. यह गांव दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा थाने के अंतर्गत उदेला गांव है.

जहां पिछले 25 सालों में यहां के ग्रामीणों ने गांव में घटित होने वाले किसी भी प्रकरण के लिए थाने में एफआईआर दर्ज नहीं कराई है. इस गांव के लोग अपने बीच के होने वाले झगड़ों या विवादों को स्वयं ही निपटाते हैं और पुलिस तथा न्यायालयों के चक्करों से दूर रहते हैं.

यह गांव 1994 में कुआकोंडा थाना के अंतर्गत समाहित हुआ. इस संबंध में यह विशेष तथ्य है कि इसके बाद से ही लेकर अब तक एक भी प्रकरण या शिकायत थाने में दर्ज नहीं कराई गई है. इसके लिए गांव के ग्रामीणों ने अनोखा रास्ता निकाला है.

वे आपस में मिल-जुलकर प्रकरण के संबंध में निर्णय लेते हैं. यदि गांव का कोई भी व्यक्ति अपराध में लिप्त रहता है या पाया जाता है तो उसे अर्थदंड के साथ गांव से बाहर करने की भी सजा मिलती है. पूर्व में 25 साल पहले ग्रामीणों के द्वारा लिए गए इस निर्णय का प्रभाव आज भी कायम है और ग्रामीण बिना किसी व्यवधान के इसे मान रहे हैं.

इस संबंध में दंतेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया कि, जिले के कुआकोंडा थाने के अंतर्गत उदेला गांव में पिछले 25 सालों में यहां के ग्रामीणों ने गांव में घटित होने वाले किसी भी प्रकरण के लिए थाने में अपराध दर्ज नहीं कराया है.

उदेला सहित आसपास के ग्रामीण आपसी विवादों को स्वयं निपटारा करते हैं. लगातार इलाके में विकास कार्य किए जा रहे हैं. अभी तक थाने में किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है. उन्होंने अपील की है कि ग्रामीण छोटे-छोटे विवादों का स्वयं निपटारा करें, जिससे वहां शांति बनी रहे.