बहराखंडः इस गांव में नहीं करता कोई बेटी की शादी

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भोपाल। मध्य प्रदेश के मंडला जिले के कछारी गांव में पीढ़ियों से चली आ रही बहरेपन की बीमारी के कारण लोग इस गांव में बेटियां ब्याहने से परहेज कर रहे हैं. कछारी गांव के कुछ परिवारों में तीन पीढियों से परिवार के सदस्य बहरे हो जाते हैं. बहरेपन की बीमारी के कारण लोगों ने गांव से नाता ही तोड़ रखा है. आलम यह है कि इस क्षेत्र को बहराखंड भी कहा जाने लगा है.

गांव के रहने वाले गेंदालाल भांवरे बताते हैं कि उनके परिवार में पिछली तीन पीढियों से यह बीमारी चली आ रही है. उनके पिता चेतू और दादा हंसलाल को भी सुनाई नहीं देता था. पीढ़ी दर पीढ़ी यह बीमारी परिवार के लिए कलंक बन गई है. इस कलंक के कारण दूर के रिश्तेदारों ने भी नाता तोड़ रखा है. उनके परिवार के अन्य सभी सदस्य भी बहरेपन से ग्रसित हैं.

ऐसे होती है बीमारी

बहरेपन से ग्रसित परिवार वालों ने बताया कि जब बच्चे का जन्म होता है तो उसके करीब 15 साल बाद कान में दर्द होने लगता है. कुछ दिनों बाद कान से पस निकलने लगती है, जिसके बाद धीरे-धीरे वह बहरेपन से ग्रसित हो जाता है.

गांव के लिए बना कलंक

गांव के सभी परिवारों के लिए यह बीमारी कलंक बनी हुई है, जिसके कारण शादी में भी लोगों को दिक्कतें आ रही है. गांव के लोगों का कहना है कि कई लोगों की शादियां इस बीमारी के कारण टूट गई हैं. यहां तक कि स्वस्थ लोग भी गांव में इस बीमारी का दंश झेल रहे है. वहीँ स्वास्थ्य विभाग के मुखिया मामले की जानकारी नहीं होने की बात कर रहे हैं. जिला प्रशासन भी बीमारियों को लेकर अनदेखी कर रहा है.