नासा को भी है इसरो के चंद्रयान पर नाज़, कहा- आपके प्रयास से प्रेरणा मिलेगी

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नई दिल्ली: भले ही चांद पर हमारा चंद्रयान नहीं पहुंच सका है लेकिन चंद्रयान-2 मिशन के लिए दुनिया भर में इसरो की तारीफ हो रही है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) के चंद्रयान-2 मिशन की प्रशंसा की है. नासा ने लिखा है, ‘अंतरिक्ष कठिन है. हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इसरो के चंद्रयान-2 मिशन को लैंड कराने की कोशिश की प्रशंसा करते हैं. आपकी यात्रा ने हमें प्रेरणा दी है.’

नासा से पहले पाकिस्तान की पहली एस्ट्रोनॉट नमीरा सलीम भी इसरो के चंद्रयान-2 मिशन की प्रशंसा कर चुकी हैं. नमीरा ने कहा, ‘चंद्रयान-2 मिशन दक्षिण एशिया के लिए अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी छलांग है. यह दक्षिण एशिया के साथ-साथ पूरी ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री के लिए गर्व का विषय है. मैं चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की चांद के साउथ पोल में सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश के लिए इसरो और भारत को बधाई देती हूं.’

14 दिनों तक लैंडर से दोबारा संपर्क स्थापित करने का करेंगे प्रयास

इसरो के चेयरमैन सिवन ने शनिवार को ही दूरदर्शन को दिए अपने इंटरव्यू में कहा था कि हालांकि हमारा चंद्रयान-2 के लैंडर से संपर्क टूट चुका है, लेकिन वह लैंडर से दोबारा संपर्क स्थापित करने के लिए अगले 14 दिनों तक प्रयास करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि लैंडर के पहले चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, इसके बाद यान की गति को कम करने में एजेंसी को सफलता मिली. हालांकि अंतिम चरण में आकर लैंडर का संपर्क एजेंसी से टूट गया.

लैंड होने से कुछ पल पहले टूटा था संपर्क
दरअसल वैज्ञानिकों ने लैंडर विक्रम से संपर्क उस समय खोया, जब वह चंद्रमा के धरातल के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला था और धरातल से मात्र 2.1 किलोमीटर दूर था. सिवन ने कहा कि यह मिशन 100 प्रतिशत के आसपास सफल रहा. उन्होंने कहा कि हमारा वैज्ञानिक मिशन सफल रहा लेकिन टेक्नोलोजी के प्रदर्शन में हम सफल नहीं रहे. हमारे ऑर्बिटर का पेलोड हमें अगले कुछ सालों तक बहुत सारा डाटा उपलब्ध करता रहेगा.

7.5 सालों तक काम करेगा ऑर्बिटर
सिवन ने आगे कहा कि पहली बार हम चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र का डाटा प्राप्त करेंगे. चंद्रमा की यह जानकारी विश्व तक पहली बार पहुंचेगी. चेयरमैन ने कहा कि चंद्रमा के चारों तरफ घूमने वाले आर्बिटर के तय जीवनकाल को सात साल के लिए बढ़ाया गया है. यह 7.5 सालों तक काम करता रहेगा. यह हमारे लिए संपूर्ण चंद्रमा के ग्लोब को कवर करने में सक्षम होगा.