मैनपुरी से मुलायम के प्रत्याशी होने पर सपा में महाभारत शुरू

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मैनपुरी: यह बात कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोची थी कि मुलायम सिंह यादव ने जिस पार्टी को अपने खून-पसीने की मेहनत से खड़ा किया है, उसी पार्टी में ही उन्हें विरोध का सामना करना पड़ेगा।

उन्हें मैनपुरी से चुनाव मैदान में उतारे जाने के बाद से समाजवादी पार्टी के एक बड़े तबके में असंतोष पैदा हो गया है। विरोध का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रोफेसर रामगोपाल यादव का पुतला फूंकने के 24 घंटे के अंदर पूरी 51 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी भंग कर दी गई।

जब 2014 में पूरे उत्तर प्रदेश में मोदी लहर चल रही थी, उस वक्त भी समाजवादी पार्टी ने सेंट्रल यूपी की 4 सीटों पर फतह हासिल की थी। इसमें मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, फिरोजाबाद से अक्षय यादव, बदायूं से धर्मेंद्र यादव और कन्नौज से डिंपल यादव ने जीत का परचम लहराया था।

बाद में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी सीट छोड़ दी थी। इसके बाद उनके पौत्र तेज प्रताप यादव मैनपुरी से भारी मतों से चुनाव जीते थे लेकिन अब समाजवादी पार्टी में बगावत के सुर शुरू हो गए हैं। यहां से तेज प्रताप यादव का टिकट कटने के बाद समाजवादी पार्टी में उथल-पुथल का माहौल है।

उधर चुनाव आयोग की तिथियां घोषित हो रहीं थीं, इधर समाजवादी पार्टी में संग्राम। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने जिस दिन लोकसभा चुनावों की तारीखें घोषित की, उससे कुछ घंटे पहले समाजवादी पार्टी के नेताओं का मैनपुरी में पारा चढ़ने लगा।

कुछ दिन पहले ही समाजवादी पार्टी ने छह प्रत्याशी घोषित किए थे जिसमें मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव को और धर्मेंद्र यादव को बदायूं से प्रत्याशी बनाया गया। लेकिन मैनपुरी से मुलायम के प्रत्याशी घोषित होने के बाद पूरे कुनबे में हलचल पैदा हो गई।

मुलायम सिंह यादव ने कभी नहीं सोचा होगा कि सपा में उनका विरोध होगा। मैनपुरी से वर्तमान सांसद तेज प्रताप यादव का टिकट काटे जाने और मुलायम सिंह यादव को प्रत्याशी घोषित करने के बाद सपा के एक बड़े तबके में असंतोष पैदा हो गया।

तेज प्रताप के समर्थकों द्वारा प्रोफेसर रामगोपाल यादव का पुतला फूंकने के बाद पार्टी में घमासान शुरू हो गया। विरोध का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के प्रमुख महासचिव का पुतला फूंकने के 24 घंटे के अंदर पूरी 51 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी भंग कर दी गई।

वैसे एसपी के लिए विरोध-प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है और पार्टी में अक्सर सियासी महाभारत की तस्वीरें सामने आती रही हैं लेकिन यह बात कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोची थी कि मुलायम सिंह यादव ने जिस पार्टी को अपने खून-पसीने की मेहनत से खड़ा किया है, उसी पार्टी में ही उन्हें विरोध का सामना करना पड़ेगा।

देश भर में चर्चा का विषय रहा सपा का महाभारत

पिछले विधानसभा चुनाव से पहले सपा का महाभारत पूरे देश में चर्चा का विषय रहा। सैफई कुनबे की कलह सुर्खियों में आने के बाद मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाकर अखिलेश यादव वाली समाजवादी पार्टी के खिलाफ जंग छेड़ दी।

शिवपाल ने यह भी ऐलान किया है कि सूबे की 80 सीटों पर पीएसपी (एल) प्रत्याशी उतार कर लोकसभा चुनाव लड़ेगी। यदि ऐसा होता है तो लोकसभा चुनाव में इसका असर सीधे-सीधे अखिलेश यादव की सपा पर पड़ेगा। क्योंकि सेंट्रल यूपी में यादव बेल्ट पर शिवपाल सिंह यादव मजबूत पकड़ रखते हैं।

फिरोजाबाद में चाचा भतीजे जंग शुरू

फिरोजाबाद में सियासत का संग्राम जारी है। शिवपाल सिंह यादव अपने भतीजे और रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव के खिलाफ मैदान में उतरकर यह भी संकेत दे रहे हैं कि मुलायम सिंह यादव को छोड़कर परिवार के किसी भी सदस्य को 2019 का लोकसभा चुनाव आसानी से नहीं जीतने देंगे।

बदायूं से धर्मेंद्र यादव, कन्नौज से डिंपल यादव के खिलाफ भी वह अपने प्रत्याशी उतारेंगे। हालांकि संकेत इस बात के भी हैं कि अगली सपा प्रत्याशियों की लिस्ट में अखिलेश यादव आजमगढ़ से और तेज प्रताप यादव एटा से मैदान में उतर सकते हैं।

37 सीटों पर मेरा लाल-बाकी पर शिवपाल

उत्तर प्रदेश में भले ही दो विरोधी (सपा-बसपा) आपस में मिल गए हों लेकिन अब सवाल यह है कि क्या सपा और बसपा के कार्यकर्ता एक दूसरे के गले मिलेंगे क्योंकि सपा और बसपा का पुराना इतिहास बहुत खराब है।

दोनों पार्टियों के इस गठबंधन से निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में भी काफी असंतोष है। ऐसे में शिवपाल का नारा ’37 पर मेरा लाल और बाकी पर शिवपाल’ कामयाब हुआ तो गठबंधन के सपने पूरे होना आसान नहीं होगा।