जानिए… इस वजह से भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण समय से पहले हुए जेल से ‘आजाद’

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लखनऊ: एससी/एसटी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच चल रही खींचतान के बीच उप्र सरकार ने सहारनपुर जातीय हिसा के आरोपित भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण की समय पूर्व रिहा कर दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत जेल में निरुद्ध रावण को छोड़े जाने के लिए डीएम सहारनपुर को निर्देश दिया गया है। इसे सियासी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

चंद्रशेखर उर्फ रावण के अलावा इसी मामले में आरोपित सोनू व शिवकुमार को भी समय पूर्व रिहा किया जायेगा। इससे पूर्व तीन आरोपित सोनू उर्फ सोनपाल, सुधीर व विलास उर्फ राजू को सात सितंबर को रिहा किया जा चुका है। शासन ने मामले में इन्हीं छह आरोपितों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की थी।

रावण की रिहाई के पीछे उनकी मां की ओर से दिये गए प्रत्यावेदन को आधार बताया जा रहा है। हालांकि इसे दलितों को प्रभावित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले राज्य सरकार ने खासकर एससी/एसटी वोट बैंक को साधने और बसपा के खिलाफ एक बड़ा समीकरण खड़ा करने के इरादे से यह फैसला किया है।

गौरतलब है कि मई 2017 में सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा के मामले में एसटीएफ ने आरोपित चंद्रशेखर को आठ जून 2017 को हिमांचल प्रदेश से गिरफ्तार किया था। इसके अलावा अन्य आरोपित भी गिरफ्तार किये गए थे। चंद्रशेखर को सभी मामलों में कोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहाई का आदेश आने से पहले ही जिला प्रशासन ने उनके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई का नोटिस तामील कराया था।

चंद्रशेखर सहित कुल छह आरोपितों पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई थी। सहारनपुर की हरिजन कालोनी निवासी चंद्रशेखर की रासुका के तहत निरुद्ध रहने की अवधि एक नवंबर, 2018 तक थी, जबकि अन्य आरोपित सोनू व शिवकुमार को 14 अक्टूबर, 2018 तक निरुद्ध रहना था।

ध्यान रहे, पूर्व में शासन ने चंद्रशेखर की रासुका अवधि तीन माह के लिए बढ़ा दी थी। इस पर भीम आर्मी ने रावण की रिहाई को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी थी। भीम आर्मी में इसे लेकर काफी आक्रोश था।