कठुआ केस : बच्ची की पहचान उजागर करने को लेकर मीडिया को हाईकोर्ट ने फटकारा

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नई दिल्ली : कठुआ गैंगरेप मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मृतक नाबालिग बच्ची की पहचान उजागर करने को लेकर तमाम मीडिया हाउसेस को नोटिस भेजकर कहा है कि उनके खिलाफ कारवाई क्यों न की जाये। इसके साथ ही आगे किसी भी खबर में बच्ची की पहचान उजागर न करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आयी खबरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए मीडिया हाउसों से जवाब मांगा है कि इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।

मामले में 8 लोग हैं आरोपी

इस साल 10 जनवरी को जम्मू के कठुआ जिले में हीरानगर तहसील के रसाना गांव में बक्करवाल समुदाय की बच्ची का अपहरण होने के बाद 17 जनवरी को झाड़ियों में उसका शव मिला था। कठुआ के रासना गांव में जनवरी में बाकरवाल समुदाय की बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या करने के मामले में मुख्य आरोपी सांजी राम समेत आठ लोगों का आरोपी बनाया गया है।

जांच में पता चला है कि बच्ची को अगवा कर एक मंदिर में रखा गया था। उसे नशीली दवा पिलाकर उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। गांव के बाहर बाकरवाल समुदाय में भय पैदा करने के मकसद से आखिरकार उसकी हत्या कर दी गई। सांजी राम पर प्रमुख साक्ष्य मिटाने के लिए एक सब इंस्पेक्टर और सिपाही समेत स्थानीय पुलिस को रिश्वत देने का भी आरोप है।

नाबालिग से बलात्कार पर मौत की सजा का कानून बनाएंगे : महबूबा

इससे पहले जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बीते 12 अप्रैल को कहा कि उनकी सरकार बच्चियों से बलात्कार के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान वाला कानून बनाएगी। कठुआ जिले में खानाबदोश बकरवाल समुदाय की आठ वर्षीय एक बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या की घटना की पृष्ठभूमि में उनका यह बयान आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इस मामले में कानून को बाधित नहीं होने देगी और बच्ची के साथ इंसाफ होगा।

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