कर्नाटक चुनाव के परिणाम: कौन, कहां जीता और किसने किसको दी मात

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कर्नाटक: कर्नाटक विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने सत्तारूढ़ कांग्रेस को पटखनी दे दी है। कांग्रेस को यह शिकस्त कर्नाटक के उन सभी 6 राजनीतिक जोन में मिली है जिनमें से कम से कम तीन जोन को कांग्रेस का गढ़ कहा गया है। दोपहर तक वोटों की गिनती और रुझानों से साफ है कि राज्य में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है।

जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी, कांग्रेस के गुलाब नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे और निवर्तमान सीएम सिद्धारमैया के साथ राज्यपाल से मिलने के लिए राजभवन पहुंचे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया है और जेडीएस ने कांग्रेस के समर्थन वाली चिट्ठी भी सौंपी।

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राज्यपाल से की दोनों पार्टियों ने मुलाकात

इससे पहले भाजपा के सीएम पद के कैंडिडेट बीएस येदियुरप्पा, अनंत कुमार, राजीव चंद्रशेखर और शोभा करंदलजे के संग राज्यपाल से मिलने पहुंचे। उन्होंने वहां से बाहर निकलकर मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा ने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया है। भाजपा सदन में बहुमत साबित करेगी।

 वहीं कांग्रेस ने मौके का फायदा उठाते हुए जेडीएस को समर्थन देकर सरकार बनाने का प्रस्ताव दे दिया है जिसे जेडीएस ने मान लिया है। खबरों के अनुसार कुमारस्वामी ने कांग्रेस के मुख्यमंत्री बनने के प्रस्ताव को मान लिया है।
Image result for कर्नाटक राज्यपाल वेजू भाई से मुलाकात
उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें कांग्रेस ने समर्थन दिया है और इसी के आधार पर वो सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए आज शाम 5.30 बजे मिलना चाहते हैं। हालांकि, अभी राजभवन से उन्हें अपॉइंटमेंट नहीं दिया गया है। खबर यह भी है कि कुमारस्वामी 18 मई को शपथ ग्रहण करेंगे।
अब तक के नतीजों और रुझानों में भाजपा को 107 सीटें मिलती दिख रही हैं और भाजपा बहुमत से काफी दूर है। वहीं कांग्रेस के खाते में 73 जबकि जेडीएस के खाते में 40 सीटें हैं। ऐसे में दोनों ने मिलकर सरकार बनाने की तैयारी की है।

वहीं ताजा स्थिति को देखते हुए अमित शाह ने जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान और प्रकाश जावड़ेकर को तत्काल बेंगलुरु पहुंचकर सरकार बनाने की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा है। वहीं शाह ने येदयुरप्पा को भी राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए कहा है।

इस बीच कांग्रेस नेताओं के दल को लेकर राज्यपाल से मिलने गए जी परमेश्वरा को राजभवन में प्रवेश नहीं करने दिया गया और उन्हें दरवाजे से ही लौटा दिया गया।

बीजेपी लगभग 121 सीटों पर जीत की दिशा में आगे है वहीं कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनावों के अपेक्षा लगभग आधी सीटों पर हार का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी की इस जीत के लिए यदि कर्नाटक के सभी जोन ओल्ड मैसूर, कोस्टल-कर्नाटक, बंगलुरू-कर्नाटक, मुंबई-कर्नाटक, सेंट्रल कर्नाटक और हैदराबाद-कर्नाटक जिम्मेदार है तो वहीं कांग्रेस के लिए इन सभी जोन में खराब प्रदर्शन के साथ-साथ कोस्टल कर्नाटक, सेंट्रल-कर्नाटक, हैदराबाद कर्नाटक और ओल्ड मैसूर के अपने गढ़ को गंवा दिया।

ओल्ड मैसूर क्षेत्र

ओल्ड मैसूर क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। हालांकि यहां बीजेपी की क्षेत्रीय पार्टी जेडीएस से गठबंधन तुरुप का इक्का साबित हुआ। इन चुनावों में जहां कांग्रेस को 20 सीटों पर जीत मिली तो बीजेपी को 16 सीटों पर जीत दर्ज हुई। हालांकि बीजेपी-जेडीएस के दांव इस क्षेत्र में जेडीएस को कुल 27 सीटों पर जीत हासिल हुई।

वहीं 2013 के विधानसभा चुनावों में इस क्षेत्र में कांग्रेस को 40 सीट तो 2008 के चुनावों में उसे 41 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं 2008 में जेडीएस को ओल्ड मैसूर क्षेत्र में 18 सीट तो 2013 में उसे 30 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं 2013 में बीजेपी को इस क्षेत्र में महज 5 सीटों पर जीत दर्ज हुई थी.

इन आंकड़ों से साफ है कि इस क्षेत्र में बीजेपी-जेडीएस सांठगांठ से कांग्रेस को यह मजबूत गढ़ गंवाना पड़ा। वहीं बीजेपी ने इस क्षेत्र में कांग्रेस के बराबर पकड़ बनाई तो सबसे ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर जेडीएस ने कांग्रेस की सरकार बनाने की क्षमता को सबसे करारा झटका दिया।

कोस्टल-कर्नाटक क्षेत्र

कर्नाटक का कोस्टल क्षेत्र में अच्छे प्रदर्शन के बूते कांग्रेस ने 2013 में राज्य की सरकार का नेतृत्व किया था लेकिन इन चुनावों में कांग्रेस को यहां बीजेपी के हाथों मुंह की खानी पड़ी। इन चुनावों में जहां कांग्रेस को महज 3 सीट जीतने को मिली वहीं क्षेत्र की 19 सीटों में बीजेपी को 16 सीटों पर जीत हासिल हुई।

ठीक इसी तरह 2013 के चुनावों में बीजेपी को इस क्षेत्र में मुंह की खानी पड़ी थी और वह सिर्फ एक सीट जीतने में सफल हुई थी। वहीं 2008 के चुनावों बीजेपी ने इस क्षेत्र की दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी। गौरतलब है कि 2013 से पहले इस क्षेत्र को बीजेपी का सबसे मजबूत किला समझा जाता था और अब 2018 में इस प्रदर्शन के बाद एक बार फिर कोस्टल कर्नाटक राज्य की सत्ता को बीजेपी के हाथ सुपुर्द करने में सबसे कारगर भूमिका में रहा।

बंगलुरू-कर्नाटक क्षेत्र

कर्नाटक राजनीति की दिशा बेंगलुरू में हुई वोटिंग से भी निर्धारित होती है. राजधानी बेंगलुरू और इर्दगिर्द की विधानसभा सीटों पर आमतौर पर विकास के नाम पर वोटिंग देखने को मिलती है. इन चुनावों में इस क्षेत्र की 13 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली तो 11 सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार हावी रहे. यहां 2 सीटें जेडीएस के खाते में गई.

विधानसभा चुनाव 2008 में इस क्षेत्र ने बीजेपी से उम्मीद रखी थी लेकिन 2013 के चुनावों में इस क्षेत्र ने विकास के लिए कांग्रेस पर भरोसा किया. 2013 के चुनावों में बीजेपी को कांग्रस से एक कम सीट पर जीत दर्ज हुई थी। इस क्षेत्र की कुल 28 विधानसभा सीटों में 201 के चुनावों में बीजेपी को 12 और कांग्रेस को 13 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं 2008 के चुनावों में इस क्षेत्र में बीजेपी को कुल 17 सीटों पर जीत दर्ज हुई थी। 2018 के चुनाव नतीजों में एक बार फिर बीजेपी को कांग्रेस से अधिक सीटें मिल रही है।

मुंबई-कर्नाटक क्षेत्र

कर्नाटक के मुंबई-कर्नाटक क्षेत्र में उत्तर कर्नाटक के सात जिले शामिल हैं। 2018 विधानसभा चुनावों के नतीजों में इस क्षेत्र में कांग्रेस को महज 16 सीटें तो बीजेपी को 31 सीटों पर जीत मिली है। वहीं जेडीएस के खाते में 2 और अन्य के खाते में 1 सीट दर्ज हुई है।

राज्य में सरकार बनाने के लिए यह एक अहम क्षेत्र है। विधानसभा चुनाव 2013 के नतीजों के आधार पर इस क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ माना गया क्योंकि इन चुनावों में कांग्रेस ने बीजेपी को तगड़ी शिकस्त देते हुए अपनी उम्मीद से भी अधिक 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं बीजेपी को महज 14 सीटों से संतोष करना पड़ा था. वहीं 2008 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को इस क्षेत्र में 38 सीटों पर अप्रत्याशित जीत देखने को मिली थी।

सेंट्रल कर्नाटक क्षेत्र

विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को सेंट्रल कर्नाटक का अपना मजबूत गढ़ गंवाना पड़ा। इस क्षेत्र में कर्नाटक के टुमकुर, दावनगेरे, चित्रदुर्ग और शिमोगा जिले की विधानसभा सीटें शामिल हैं। इन चुनावों में इस क्षेत्र की 4 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली को 16 सीटों के साछ पूरा क्षेत्र बीजेपी का नाम रहा। वहीं जेडीएस को भी इस क्षेत्र में 3 सीटों पर फायदा हुआ है। 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं जेडीएस ने इन चुनावों में कुल 10 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए बीजेपी को महज 2 सीट पर सीमित कर दिया था।

हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र

हैदराबाद कर्नाटक क्षेत्र राज्य का वह क्षेत्र है जो आंध्रप्रदेश से सटा हुआ है। इस क्षेत्र में कुल 40 विधानसभा सीटें शामिल हैं। इन चुनावों में इस क्षेत्र पर कांग्रेस ने अपनी साख बचाने में थोड़ी सफलता पाई है। कांग्रेस के 21 उम्मीदवार इस क्षेत्र से विजयी रहे जबकि बीजेपी को यहां 15 सीटों पर जीत दर्ज हुई है। जेडीएस ने यहां 4 सीटों पर जीत दर्ज की है। 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को इस क्षेत्र में 19 सीटों पर जीत दर्ज हुई थी।

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