जॉन्सन बेबी पाउडर से कैंसर : 7वां केस भी हारी कंपनी, 6 हजार से ज्यादा मामले, चुकाएगी 760 करोड़ मुआवजा, जानिए इसका भारतीय बाजार

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वॉशिंगटन : बेबी केयर प्रोडक्ट मार्केट में दुनिया की सबसे बड़ी और मशहूर कंपनी जॉन्सन एंड जॉन्सन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। एक अमेरिकी कोर्ट ने उसे ग्राहक को 760 करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया है। पहले निचली अदालत ने 240 करोड़ रुपए मुआवजा तय किया था, जिसे इस कोर्ट ने करीब तीन गुना बढ़ाकर 760 करोड़ रुपए कर दिया। इसका 70% जॉन्सन एंड जॉन्सन और 30% पाउडर सप्लाय करने वाली कंपनी इमेरीज टैल्क चुकाएगी। हालांकि, दोनों कंपनियों ने अपने उत्पादों को बेहतर बताते हुए फैसले को चुनौती देने की बात कही है।

कंपनी पर क्या आरोप

न्यूजर्सी के 46 साल के इन्वेस्टमेंट बैंकर स्टीफन लैंजो और उनकी पत्नी केंड्रा ने जॉन्सन एंड जॉन्सन के बेबी पाउडर से मेसोथेलियोमा होने का दावा करते हुए मुआवजा मांगा था। इस साल जनवरी में दर्ज केस में लैंजो ने आरोप लगाए थे कि वे 30 साल से कंपनी का बेबी पाउडर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें एसबेस्टस होने की वजह से उन्हें मेसोथेलियोमा हो गया है। लैंजो ने कहा कि कंपनी ने अपने उत्पादों पर किसी भी तरह की बीमारी या खतरा होने की कोई चेतावनी नहीं दी, जबकि कंपनी इस बारे में जानती है।

कोर्ट ने ख़ारिज कीं कंपनी की दलीलें

जवाब में जॉन्सन एंड जॉन्सन ने दलील दी कि लैंजो जिस घर में रहते हैं उसके बेसमेंट में लगे पाइप में एसबेस्टस लगा है। साथ ही लैंजो जिस स्कूल में पढ़ते थे, उसमें भी एसबेस्टस था, लेकिन कोर्ट ने इनकी दलील नहीं सुनी और याचिकाकर्ता को मुआवजे की रकम तीन गुना बढ़ा दी।

क्या है मेसोथेलियोमा?

मेसोथेलियोमा एक तरह का कैंसर है जो टिशू, फेफड़ों, पेट, दिल और अन्य अंगों पर असर डालता है। कंपनी के बेबी पाउडर में एसबेस्टस होने की वजह से मेसोथेलियोमा होने का कंपनी के 120 साल के इतिहास में यह पहला मामला है।

भारत में बेबी केयर मार्केट 93 हजार करोड़ का, 60 फीसदी हिस्से पर जॉन्सन एंड जॉन्सन का कब्ज़ा

भारत की बात करें तो यहां बेबी केयर का मार्केट 93,000 करोड़ का है। जिसमें जॉन्सन एंड जॉन्सन कंपनी का हिस्सा 60 फीसदी है। वहीं कंपनी पर अमेरिका में अब तक बेबी पाउडर से बीमारी के 6,610 मामले दर्ज हैं। यानि 2 सालों के अंतर्गत कंपनी को 5,950 करोड़ मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं। पिछले दो साल में जॉन्सन एंड जॉन्सन के मामले में 7 बड़े फैसले हुए हैं। इनमें कोर्ट ने कंपनी पर करीब 5,950 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। हालांकि, 2700 करोड़ के एक केस में फैसला कंपनी के पक्ष में रहा। पिछले अगस्त में कंपनी को अलबामा की एक महिला को ओवरी (गर्भाशय) के कैंसर के मामले में 475 करोड़ का मुआवजा देना पड़ा था। इसके बाद मिसौरी के 5 मामलों में कोर्ट ने 1996 करोड़ का जुर्माना लगाया था। टैल्कम पाउडर से ओवेरी का कैंसर होने का पहला मामला 1971 में सामने आया था।

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