इंदौर: भय्यू जी हाथों लिखा सुसाइड नोट बरामद, तनाव से ग्रसित होकर उठाया ये कदम

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मध्यप्रदेश: इंदौर में गोली मारकर आत्महत्या करने वाले आध्यात्मिक संत भय्यूजी महाराज का एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। जिसमें उन्होंने आत्महत्या करने का कारण बताया कि वो बहुत तनाव में हैं। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा- मैं जा रहा हूं। साथ ही उन्होंने सुसाइड नोट में परिवार की जिम्मेदारी संभालने की अपील की है।

इंदौर में मंगलवार को भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मार ली थी। इसके बाद उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उन्होंने आत्महत्या के लिए अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर का प्रयोग किया था। सूत्रों के मुताबिक उनके पास से बरामद सुसाइड नोट के मुताबिक उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा कि उनके परिवार में विवाद था। जिसकी वजह से वे अवसादग्रस्त हो गए थे। हालांकि पुलिस अभी भी मामले की छानबीन कर रही है।

सुसाइड से 20 मिनट पहले भय्यू जी ने किए लगातार तीन ट्वीट

भय्यूजी महाराज सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते थे। भय्यू रोजाना आध्यात्म से जुड़ी जानकारी को लेकर ट्वीट करते थे। हैरान कर देने वाली बात है कि मंगलवार को भी अपनी मौत से मात्र 20 मिनट पहले उन्होंने एक के बाद एक लगातार तीन ट्वीट किए थे। लेकिन, बाद में खबर आई कि उन्होंने आत्महत्या कर ली है। समझना मुश्किल है कि ट्वीट और उनकी मौत के बीच के समय के दौरान किस तरह के हालात बने होंगे, जिस कारण उन्होंने खुदकुशी कर ली। इन ट्वीट्स के जरिए भय्यूजी ने मासिक शिवरात्रि के बारे में जानकारी दी थी। करीब 1 बजकर 57 मिनट पर किए गए इन ट्वीट को लेकर ऐसा नहीं लग रहा कि वो परेशान थे। आपको बताते हैं उन तीन ट्वीट के बारे में जो भय्यूजी ने अपनी मौत से पहले किए थे।

पहला ट्वीट

दूसरा ट्वीट

तीसरा ट्वीट

शिवराज सिंह ने सौंपा राज्यमंत्री का दर्जा

मध्य प्रदेश में भय्यूजी महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था। जो कि कुछ वक्त पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें सौंपा था। उनके अलावा 4 अन्य संत भी राज्यमंत्री बनाए गए थे।

कपड़ों के ब्रांड के लिए मॉडलिंग कर चुके थे भय्यूजी महाराज

1968 को जन्मे भय्यूजी महाराज का असली नाम उदय सिंह देखमुख है। वह कपड़ों के एक ब्रांड के लिए कभी मॉडलिंग भी कर चुके हैं। भय्यू महाराज का देश के दिग्गज राजनेताओं से संपर्क थे। हालांकि वह शुजालपुर के जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे।

2011 में अन्ना ने अनशन भय्यू जी के हाथ से जूस पीकर तोड़ा

भय्यू जी महाराज तब चर्चा में आए थे जब 2011 में अन्ना हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने उन्हें अपना दूत बनाकर भेजा था। इसी के बाद ही अन्ना ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था।

पीएम मोदी ने भी उपवास तुड़वाने को किया आमंत्रित

वहीं पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे। उस उपवास को तुड़वाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज को आमंत्रित किया था।

सामाजिक कार्यों में थे आगे

उनका सदगुरु दत्त धामिर्क ट्रस्ट नाम का ट्रस्ट भी चलता है। अपने ट्रस्ट के जरिए वह स्कॉलरशिप बांटते थे। कैदियों के बच्चों को पढ़ाते थे। और किसानों को खाद-बीज मुफ्त बांटते थे।

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