अमेरिकी प्रतिबधों पर भारत ने ईरान से क्रूड इम्‍पोर्ट आधा किया

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नई दिल्‍ली: ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारतीय तेल कंपनियां सितंबर और अक्‍तूबर के लिए क्रूड के आयात को लगभग आधा कर 12 मिलियन बैरल पर ले आई हैं। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध नवंबर से प्रभावी होंगे। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने अक्तूबर में ईरान से सामान्य रूप से हर महीने होने वाली 7.5 से 8 लाख टन कच्चे तेल के आयात की बुकिंग कराई है। लेकिन आगे क्‍या होगा? इस पर एक अधिकारी ने कहा कि भारत थोड़ा कम ही सही लेकिन ईरान से तेल का आयात करना चाहता है, पर अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं है। अमेरिका ने साफ तौर पर धमकी दी है कि वह किसी भी देश को ईरान से व्‍यापारिक रिश्‍ते नहीं रखने देगा।

अधिकारी ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेलशोधक कंपनियों को अब तक ईरान से तेल के आयात के बारे में सरकार की ओर से कोई परामर्श नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि आईओसी ने वित्त वर्ष 2018-19 में ईरान से 90 लाख टन तेल के आयात की योजना बनाई थी। अधिकारी ने कहा, ‘इस हिसाब से हर महीने लगभग 7.5 लाख टन तेल का आयात किया जाना है और हम लोग अब तक इसी अनुपात में कच्चे तेल का आयात करते रहे हैं। हमने अक्तूबर के लिए भी 7.5-8 लाख टन तेल के आयात के लिए बुकिंग कराई है।’

ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध नवंबर से लागू हो जायेंगे। अधिकारी ने कहा, ‘हमें नहीं मालूम कि भारत सरकार का क्या रुख होगा। हमें अब तक ईरान से आयात रोकने या कटौती के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। हम मासिक आधार पर तेल का आयात कर रहे हैं।’

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन अगस्त में 10 करोड़ बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड पर पहुंचा था, लेकिन ईरान और वेनेजुएला से निर्यात घटने की वजह से बाजार में तंगी बनी हुई है और कीमतें बढ़ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की ताजा मासिक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हम तेल बाजार के एक महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश करने जा रहे हैं। स्थितियां कठिन हो रही हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) द्वारा उत्पादन बढ़ाने की वजह से पहुंचा था। ओपेक का उत्पादन नौ महीने के उच्चतम स्तर 3.2 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहा था।’

ओपेक ने जून में वियेना में उत्पादन बढ़ाने की सहमति दी थी ताकि बढ़ती कीमतों पर काबू पाया जा सके। आईईए का कहना है कि लीबिया में उत्पादन सुधरने, इराक में रिकॉर्ड उत्पादन तथा नाइजीरिया और सऊदी अरब से आपूर्ति बढ़ने की वजह से अभी तक वेनेजुएला और ईरान में उत्पादन घटने के प्रभाव को कम किया जा सका है।

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