मसूद को न बचाता चीन तो लगते ये प्रतिबन्ध

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नई दिल्ली : चीन की मदद से एक बार फिर जैश ए मोहम्मद का सरगना और पुलवामा में 40 जवानों की शहादत का जिम्मेदार मसूद अजहर शिकंजे में आने से बच गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसे ग्लोबल आतंकी घोषित करने की तैयारी थी। लेकिन ऐन मौके पर चीन ने इस प्रस्ताव पर वीटो कर दिया। चीन के इस रुख पर अमेरिका उसे कड़ी चेतावनी दी है।

अगर मसूद अजहर ग्लोबल आतंकवादी घोषित हो जाता तो दुनियाभर के देशों में उसकी एंट्री और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबन्ध लग जाता।

संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को मसूद के बैंक अकाउंट्स और प्रॉपर्टी को फ्रीज करना पड़ता और उसकी संस्थाओं को कोई मदद नहीं मिलती। इसके अलावा पाकिस्तान को भी मसूद अजहर के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों के साथ टेरर कैंप और उसके मदरसों को भी बंद करना पड़ता।

चीन को क्या नुकसान होता

अगर मसूद अजहर का नाम UNSC की ग्लोबल आतंकवादियों वाली लिस्ट में शामिल हो जाता तो पाकिस्तान के FATF की ब्लैक लिस्ट में शामिल होने की संभावना बहुत ज्यादा हो जाती। FATF की ग्रे लिस्ट में वो पहले से ही है। FATF में ब्लैकलिस्ट होने के बाद पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लग जाएंगे, इससे चीन का पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश डूब सकता है।

चीन को मसूद अजहर को बचाने की कोशिशों की एक वजह चाइना-पाकिस्तान इकोनोमिक कॉरिडोर (CPEC) भी है। चीन का ये प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वाह और बलूचिस्तान जैसे कई संवेदनशील इलाकों से गुजरता है, जहां इसका विरोध होता है। लेकिन मसूद अजहर की चीन से करीबी की वजह से आतंकी संगठन CPEC के निर्माण में रोड़ा नहीं अटकाते।

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