नवजात की देखभाल कैसे करें, जानिए क्या खिलाएं क्या नही…

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नई दिल्ली : शहरी जीवन और भागमभाग भरी दिनचर्या में नए-नए माता-पिता बने लोगों को शुरू-शुरू में यह समझ ही नहीं आता है कि वे अपने नवजात की देखभाल कैसे करें। उन्हें क्या खिलाएं और क्या नहीं। शहरी माहौल में पले-बढ़े माता-पिता बाजार से वे सब चीजें खरीद लाते हैं जो वे टीवी विज्ञापनों में देखते हैं। बाल विशेषज्ञों की मानें तो बाजारू या पैकेट बंद खाना नवजात के लिए अच्छा नहीं है। पैकेट बंद खाने में रंग, स्वाद और प्रिजर्वेटिव के नाम पर रसायन मिला हुआ होता है, जो नवजात के लिए बेहद हानिकारक है। ऐसा आहार खाने से नवजात का शरीर मजबूत नहीं बनता, उल्टे उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

बदलते मौसम में तो नवजात के पहनावे से लेकर खाने-पीने तक का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। इस वक्त बरसात शुरू होने को है। ऐसे मौसम में गरमी और उमस लगातार बनी रहती है, जिसके चलते बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं। वे कई संक्रामक बीमारियों को जन्म देते हैं। मामूली लापरवाही और साफ-सफाई पर समुचित ध्यान न दिए जाने से बच्चे संक्रामक रोगों की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए आइए जानते हैं, इस बदलते मौसम में नवजात का आहार कैसा होना चाहिए

तरल आहार :

शिशु के छह माह पूरे होते ही डॉक्टर उसे तरल आहार देने की सलाह देते हैं। चूंकि अब तक शिशु दूध ही पीता था और उसे इसकी की आदत थी। शिशु में खाने-पीने की चीजों के साथ खाने की आदत, जैसे निगलना, गटकना और चबाना, को भी विकसित करना होता है, जिसकी शुरुआत तरल पदार्थों को देने से की जाती है। बढ़ते बच्चे को दूध के साथ सामान्य आहार जैसे दाल, माड़ (चावल का पानी) आदि पिलाएं। शुरुआत में इसकी मात्रा कम रखें, फिर जरूरत के मुताबिक बढ़ाएं। अगर बच्चे को रोज सादी दाल देंगे, तो वह पीने में आनाकानी कर सकता है इसलिए कभी दाल में एक बूंद नींबू का रस, तो कभी थोड़ा घी मिला कर दें। इससे बच्चे में स्वाद विकसित होगा।

स्वाद विकसित करें :

बढ़ते बच्चों में स्वाद यानी नमकीन, खट्टा, मीठा को विकसित करना बड़ा मुश्किल काम है, क्योंकि बच्चे खाने के लिए मुंह ही नहीं खोलते। गरमी का मौसम है इसलिए कभी बच्चे को एक चम्मच लस्सी, तो कुछ छाछ, तो कभी दही चटाएं। दही खाने से न केवल बच्चे का पाचन सही रहेगा, बल्कि यह लू लगने से भी बचाती है। कभी खीरे या ककड़ी की एक फांक बच्चे के हाथ में पकड़ा दें, ताकि वह चूस-चूस कर इसका स्वाद ले सके।

भोजन घर में ही बनाएं :

बच्चे के लिए पैकेट बंद आहार देने से बेहतर है कि कुछ घर में ही पकाएं। आप बच्चे को पतली दलिया या मंूग दाल की खिचड़ी दे सकते है। शुरू-शुरू में इसे सादा ही बनाएं, बाद में इसमें घी की छौंक देकर बहुत थोड़ी मात्रा में मौसमी सब्जियां भी मसल कर मिलाएं। यह आहार पौष्टिक होगा। अगर बच्चा मीठा खाना पसंद करता है तो आधी रोटी को आधे गिलास गुनगुने दूध में एक छोटी चम्मच चीनी और इलाइची के दो चार दानों के साथ मिक्सी में डाल कर अच्छी तरह पीस लें। यह आहार बजारू खाने से बेहतर होने के साथ-साथ बच्चे के शरीर में आवश्यक पोषक तत्त्वों की कमी भी पूरा करेगा।

पानी पिलाते रहें :

इन दिनों गरमी ज्यादा पड़ा रही है, इसलिए दिन भर में कई बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बच्चे को पानी पिलाना चाहिए, ताकि बच्चे के शरीर में पानी की मात्रा भरपूर रहे। बच्चे के शरीर में तरल पदार्थों की कमी न हो, इसलिए पानी के अलावा ताजे फलों का रस, नारियल पानी भी दिया जा सकता है।

चक कर खिलाए :

अपने बच्चे को खाना खिलाने से पहले स्वयं उसका स्वाद चखें कि कहीं खाना खराब तो नहीं हो गया है। यह गरमी के महीनों में खासतौर पर जरूरी है, क्योंकि गरमी में भोजन बहुत जल्दी खराब हो जाता है, विशेषकर पका हुआ खाना। कभी बासी खाना बच्चों को न खिलाएं।