वैश्विक स्तर पर गन्ना किसानों की लड़ाई मिलकर लड़ रहे हैं भारत-पाकिस्तान

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नई दिल्ली: ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया की सरकारों ने भारत और पाकिस्तान के खिलाफ वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है। दोनों देशों का दावा है कि भारत और पाकिस्तान ने मिलकर दुनियाभर में चीनी का उत्पादन इतना बढ़ा दिया है कि वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमत फर्श पर आ गई है।

ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया ने आरोप लगाया है कि भारत औऱ पाकिस्तान अपने यहां किसानों को गन्ना बुआई के लिए सब्सिडी देते हैं और इसके चलते चीनी का कारोबार मंदी के दौर में चला गया है। वहीं, भारत और पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर गन्ना किसानों की लड़ाई लड़ रहे हैं और उनकी कोशिश गन्ना किसानों को उनकी पैदावार के लिए उचित मूल्य दिलाने की है।

मौजूदा समय में ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक और चीनी निर्यातक देश है, लेकिन ब्राजील को डर है कि यदि भारत और पाकिस्तान ने मिलकर चीनी निर्यात को बढ़ावा देने का काम किया, तो इसी साल भारत दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बन जाएगा और ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया समेत थाइलैंड जैसे देशों को चीन के कारोबार में मुंह की खानी पड़ेगी।

ब्राजील के ट्रेड मंत्री साइमन बर्मिंघम ने राइटर के हवाले से कहा कि भारत और पाकिस्तान की सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के चलते ग्लोबल मार्केट में चीनी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। वैश्विक बाजार चीनी की अत्यधिक सप्लाई से भरा है, जिसके चलते जहां भारत और पाकिस्तान से निर्यात हो रही सस्ती दर पर चीनी की मांग है और ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को नुकसान उठाना पड़ा रहा है। राइटर के मुताबिक न्यूयॉर्क में रॉ शुगर का फ्यूचर ट्रेड 10 साल के निचले स्तर पर 9।91 सेंट पर है और इसकी वजह भारत और पाकिस्तान में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार दी जा रही सब्सिडी है।

गौरतलब है कि दोनों भारत और पाकिस्तान में मौजूदा समय में रॉ शुगर की बड़ी मात्रा शुगर इंडस्ट्री और सरकारी गोदामों में भरी है। यह रॉ शुगर गन्ने के पिछले सीजन के उत्पादन की है। वहीं दोनों देशों में गन्ने की नई फसल तैयार हो रही है, जिसके चलते दोनों सरकारों और शुगर कंपनियों पर जल्द से जल्द गोदाम में रखी चीनी का निर्यात कर गोदाम को खाली करने का दबाव है।

इसके अलावा हाल ही में मई 2018 में भारत सरकार ने गन्ना किसानों के लिए समर्थन मूल्य में इजाफे का ऐलान किया था। इस ऐलान के मुताबिक केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें गन्ना किसानों को प्रति टन गन्ना बिक्री पर 55 रुपये देंगी। वहीं पाकिस्तान ने भी हाल ही में अपनी शुगर इंडस्ट्री को दो बिलियन डॉलर के चीनी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी का ऐलान किया था।

भारत सरकार का दावा है कि गन्ना किसानों को 55 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान करने की योजना से डब्लूटीओ के नियमों का उल्लंघन नहीं होगा, बल्कि इस योजना से देश में पांच करोड़ गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इसके साथ ही केन्द्र सरकार का दावा है कि इस योजना से गोदाम में पड़े चीनी के स्टॉक्स की समस्या से जूझ रही 524 चीनी मिलों को भी राहत पहुंचेगी। केन्द्र सरकार की योजना के मुताबिक गन्ना के तय समर्थन मूल्य में 55 रुपये सरकार अदा करेगी। वहीं बाकी की रकम चीनी मिलों को वहन करना होगा।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार प्रति वर्ष चीनी मिलों द्वारा किसान को गन्ने का भुगतान करने का दर निर्धारित करती है लेकिन गन्ना उत्पादन के लिए सबसे प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश में किसानों को खुश करने के लिए कीमतों में इजाफा कर दिया जाता है। वित्त वर्ष 2017-18 में प्रति 100 किलो गन्ने का समर्थन मूल्य 255 रुपये निर्धारित किया था, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे बढ़ाकर 315 रुपये प्रति 100 किलो कर दिया था।

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