हर 40 सेकेंड में आत्महत्या करता है एक व्यक्ति, हैरान कर देगी ये रिपोर्ट

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दुनियाभर में हो रही आत्महत्याओं की दर और वजहों का आंकड़ा जारी किया है. इसके मुताबिक, दुनियाभर में हर साल 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं. यानी हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान ले लेता है. WHO ने आत्महत्या को एक ऐसी वैश्विक घटना बताया जो जीवन भर होती है.

भारत में आत्महत्या के मामलों में पहला स्थान महाराष्ट्र का है. तमिलनाडु दूसरे और पश्चिम बंगाल तीसरे नंबर पर है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की ओर से आत्महत्या पर जारी ग्लोबल डाटा के मुताबिक आत्महत्या करने वालों में 15 से 29 साल के एडल्ट्स की तादाद सबसे ज्यादा है. यानी कह सकते हैं कि यह वो उम्र है जिसमें कोई व्यक्ति पढ़ रहा हो और रोज़गार पाने की तलाश में हो. आंकड़े बताते हैं कि 2016 में आत्महत्या करने वालों में 79 प्रतिशत लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों से थे. विकसित की तुलना में विकासशील देशों के लोगों ने सबसे ज्यादा आत्महत्या की थी.

15 से 29 साल की उम्र हर व्यक्ति के लिए वह अवस्था है जिसमें उनपर सबसे ज्यादा प्रेशर रहता है. प्रेशर पढ़ाई का हो, रिलेशनशिप का हो, रोज़गार का या सभी ज़िम्मेदारियों में खुद को साबित करने का.

2016 आत्महत्या करने वालों में 25 फीसदी छात्र थे. ये वो छात्र थे जो परीक्षा में असफल हुए और खुद की जान ले ली. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में एक छात्र हर घंटे आत्महत्या करता है. 20 प्रतिशत लोग जहर मरते हैं, बाकी लोग फंदे से लटककर, आग लगाकर मरते हैं. वैश्विक स्तर पर मौत का 15वां कारण आत्महत्या ही बताया गया है.

किस देश में आत्महत्या की दर कितनी

पूर्वी यूरोपीय देशों में आत्महत्या की दरें काफी उच्च हैं. जिनमें श्रीलंका, पूर्वी एशिया में दक्षिण कोरिया, लिथुआनिया, बेलारूस, पोलैंड और लातविया शामिल हैं. अफगानिस्तान में आत्महत्या की दर 5.5 , इराक में तीन और सीरिया में 2.7 है. कैरेबियन द्वीप समूह के देशों में आत्महत्या दर सबसे कम है. ग्रेनेडा और बारबाडोस में आत्महत्या की दर 0.5 और 0.4 है.