‘इलेक्शन गुरू’ प्रशांत किशोर की राजनीति में एंट्री, थामा JDU का हाथ

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पटना : चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने आख़िरकार राजनीति में एंट्री ले ही ली है वह नीतीश कुमार की मौजूदगी में जेडीयू में शामिल हो गए हैं. खास बात यह है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहली बार जनता दल यूनाइटेड की कार्यकारिणी बैठक में शामिल होंगे.

प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर खुद इस बात की तस्दीक कर दी है कि वह अब पूरी तरह से राजनीति में आ गये हैं. प्रशांत किशोर ने रविवार की सुबह ट्वीट कर कहा- बिहार से नई यात्रा शुरू करने के लिए काफी उत्साहित हूं.

लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर जेडीयू की आज अहम बैठक

आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर बिहार की राजधानी पटना में आज जेडीयू की राज्यकार्यकारिणी की बैठक है. इस बैठक में जेडीयू की ओर से नेता, विधायक, सासंद सभी शामिल होंगे. बताया जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर पार्टी की रणनीति क्या होगी, इससे खुद मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार अवगत कराएंगे. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर जेडीयू की यह अहम बैठक है.

पहले से लगाए जा रहे थे कयास

माना जा रहा है कि नीतीश कुमार दो महीने पहल ही अनौपचारिक रूप से पार्टी के नेताओं को इस बात से अवगत करा चुके थे कि प्रशांत किशोर अब जदूय का दामन थामेंगे और अपने अनुभवों से चुनावों नीतीश को जीताने की भूमिका भी निभाएंगे. ऐसा कहा जाता है कि वह नीतीश कुमार ही हैं, जिन्होंने प्रशांत किशोर को कुर्ता-पायजामा पहनाया.

पहली बार जब कुर्ता पायजामा प्रशांत ने पहना था, तभी कायास लगा लिये गये थे, कि प्रशांत अगर राजनीति में आएंगे तो उनका पड़ाव नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ही होगा.

इन पार्टियों के लिए काम कर चुके है प्रशांत किशोर

बता दें कि प्रशांत किशोर 2014 में भारतीय जनता पार्टी, 2015 में राजद-जेडीयू-कांग्रेस महागठबंधन और 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के लिये काम कर चुके हैं. एक समय चुनाव में जीत की गारंटी बन चुके प्रशांत किशोर उस समय चर्चा में आए थे जब 2014 के चुनाव प्रचार में बीजेपी के प्रचार को उन्होंने ‘मोदी लहर’ में बदल दिया था.

उसके बाद उनके बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मतभेद की खबरें आईं और उन्होंने साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (आरजेडी+जेडीयू+कांग्रेस) के प्रचार की कमान संभाल ली और इस चुनाव में बीजेपी को तगड़ी हार का सामना करना पड़ा.

मतभेद की भी आई थी खबरे

हालांकि, 2015 के विधानसभा चुनाव के बाद भी ऐसी खबरें आईं कि नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर के बीच कुछ मतभेद चल रहा है. हालांकि, प्रशांत किशोर के जेडीयू में शामिल होने के ऐलान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नीतीश कुमार के साथ उनके पुराने मतभेद अभ खत्म हो गये हैं.

कांग्रेस से नहीं बैठी पटरी

बीजेपी से नीतीश के हाथ मिलाने से लालू एंड फैमली ही नहीं, प्रशांत किशोर को भी हुआ नुकसान. इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस के प्रचार की कमान संभाल ली और पूरी पार्टी उन्हीं की बनाई रणनीति पर काम करने लगी. लेकिन कांग्रेस के नेताओं के साथ उनकी पटरी नहीं खा सकी और नतीजों में भी पार्टी बुरी तरह से हार गई.

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब तक राजनीतिक दलों के लिए राजनीतिक सलाहकार और रणनीतिकार की भूमिका में रहे हैं. प्रशांत कुमार इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी नाम का संगठन चलाते हैं जो चुनाव में पार्टियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करती है.