ओडिशा के पूर्व सीएम की वजह से सरकार न बचा सके थे अटल बिहारी वाजपेयी

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भुवनेश्वर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों में गिर गई। 28 मई, 1996 को विश्वास मत से पहले ही अटल ने इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। वे 1998 में दूसरी बार देश के पीएम बने। 13 महीने बाद अटल सरकार ने संसद में विश्वास मत पेश किया जिसमें वाजपेयी को एक वोट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के पीछे ओडिशा के सीएम रहे गिरधर गमांग की बड़ी भूमिका रही थी। तीसरी बार 2003 में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया जिसमें उन्होंने जीत हासिल की।

एक वोट से हारे 
17 अप्रैल 1999 को लोकसभा में प्रस्ताव पर बहस और वोटिंग होनी थी। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी मतदान में हिस्सा नहीं लेगी। लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद वह अपनी बातों से बदल गईं और उन्होंने विश्वास प्रस्ताव के विरोध में वोट किया। सबकी निगाहें ओडिशा के कोरापुट से सांसद गिरधार गमांग की ओर थी जिन्होंने दो महीने पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। नियम के अनुसार मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के भीतर सदन से इस्तीफा देना होता है। गमांग ने भी बीजेपी सरकार के खिलाफ विश्वास प्रस्ताव के विरोध में वोट कर दिया। वाजयेपी सरकार के पक्ष में 269 और विरोध में 270 वोट पड़े। महज एक वोट से 13 महीने पुरानी वाजपेयी सरकार गिर गई।