अब भारत-पाक सीमा पर तैनात की जाएगी सेना की पहली खास IBG टुकड़ी

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नई दिल्ली: भारत और पाकिस्‍तान के बीच 3,323 किमी लंबी सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना अपनी पहली खास टुकड़ी इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) की मोर्चे पर तैनाती करने जा रही है. सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारत-पाक सीमा पर इस खास टुकड़ी की तैनाती साल के अंत तक कर दी जाएगी. भारतीय सेना अपनी पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा के लिए 11 से 13 आईबीजी तैयार करने और तैनात करने की योजना पर काम कर रही है.

रक्षा मंत्रालय ने 9वीं वाहिनी के पुनर्गठन को दी मंजूरी
रक्षा मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश के योल में स्थित 9वीं वाहिनी (IX Corps) का पुनर्गठन कर इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप बनाने और पश्चिमी सीमा पर तैनाती को मंजूरी दे दी है. यह सेना का सबसे बड़ा पुनर्गठन है, जिसके प्रस्‍तावक जनरल बिपिन रावत हैं. 9वीं कोर सेना की सबसे नई कोर है. 2009 में बनी 9वीं कोर हरियाणा की पश्चिमी आर्मी कमांड चंडीमंदिर का हिस्‍सा है.

दुश्मनों से निपटने के लिए आईबीजी होंगे काफी कारगर

आईबीजी का लक्ष्य सेना के विभिन्न प्रभागों को एक नए समूह में शामिल करना है. इसमें तोप, टैंक, वायु रक्षा और आधुनिक साजो-सामान शामिल होंगे. इसे जंग के लिए पूरी तरह से तैयार इकाई बनाए जाने की उम्‍मीद है. यह सेना के पुराने और पारंपरिक लड़ाई के तरीकों से अलग होगा. युद्ध जैसे हालात में दुश्मन से निपटने के लिए इंटिग्रेटिड बैटल ग्रुप काफी कारगर होंगे. अमूमन पारंपरिक सेना कोर में तीन ब्रिगेड होती हैं. वहीं, आईबीजी इनसे छोटे होंगे.

आईबीजी के पास होंगे वायुशक्ति, तोपखाने, आधुनिक हथियार

आईबीजी लड़ाई के लिए आवश्यक आधुनिक हथियारों से लैस होंगे. इनके पास वायुशक्ति, तोपखाने होंगे. आईबीजी की तैनाती के पास के हर ब्रिगेड में 6 से 8 बटालियन होंगी. हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, आईबीजी में 20,000- 25,000 जवानों को शामिल किया जाएगा. आईबीजी छोटे और ज्‍यादा फ्लेक्सिबल होंगे, ताकी त्वरित कार्रवाई कर सकें. हर आईबीजी की कमान प्रमुख जनरल रैंक के एक अधिकारी को सौंपी जाएगी.

जम्‍मू-कश्‍मीर की अंतरराष्‍ट्रीय सीमा पर सबसे पहले होगा पुनर्गठन
जनरल बिपिन रावत ने कहा कि अलग-अलग सेक्‍टर में भारतीय सेना की युद्धक क्षमता का पुनर्गठन किया जाएगा. जम्‍मू-कश्‍मीर के हिस्‍से की अंतरराष्‍ट्रीय सीमा पर सबसे पहले पुनर्गठन होगा. इसके बाद बाकी सीमाओं पर भी सेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाने के लिए पुनर्गठन किया जाएगा. इससे भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता बेहतर होगी. 9वीं वाहिनी के बाद सिक्किम समेत भारत-तिब्‍बत सीमा की सुरक्षा करने वाली सिलीगुड़ी स्थित 33वीं वाहिनी (XXXIII Corps) को आईबीजी के तौर पर पुनर्गठित किया जाएगा.

33वीं वाहिनी का पांच आईबीजी के तौर पर किया जाएगा पुनर्गठन
33वीं वाहिनी (XXXIII Corps) को इस क्षेत्र में 1962 में तैनात किया गया था. इसमें ब्‍लैक कैट, कृपाण, स्‍ट्राइकिंग लॉयन डिविजन और आर्टिलरी डिविजन शामिल है. इसमें करीब 30,000 सैनिक हैं. उम्‍मीद की जा रही है कि 33वीं वाहिनी को पांच इंटीग्रेटेड बैटेल ग्रुप्‍स में पुनर्गठित किया जाएगा. हाल में तैयार पश्चिम बंगाल आधारित माउंटेन स्‍ट्राइक कोर या ब्रह्मास्‍त्र कोर भारत-चीन सीमा पर युद्धक भूमिका में है. इसका भी तीन आईबीजी में पुनर्गठन होगा.