इस शहर में तबाही मचा सकते हैं ‘अम्मा’ और ‘बच्चे’

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रांची: झारखंड में नक्सली संगठनों के पास इजरायल, जर्मन और अमेरिकन मेड हथियारों की खेप एक नागा नेता के जरिए पहुंचाई जा रही है. पूर्णिया से गिरफ्तार किए गए सूरज नाम के तस्कर ने आर्म्स तस्करी के बड़े रैकेट का खुलासा किया है. झारखंड पुलिस के पूछताछ में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. नागालैंड से अभी तक 40 से अधिक एके-47 जैसे हथियार और 50,000 गोलियां नक्सलियों तक पहुंचाई जा चुकी है.

हथियार तस्करों ने बिहार और झारखंड में हथियार सप्लाई करने के लिए अपना कोड वर्ड बना रखा है. हथियार तस्कर जब आपस में फोन पर संपर्क करते हैं तो वे एके-47 को अम्मा बोलते हैं, जबकि गोलियों को उनके बच्चे. अगर हथियार तस्कर फोन पर यह कहते पाए गए कि अम्मा अपने बच्चों के साथ पटना जा रही है तो इसका मतलब यह हुआ कि दो से तीन एके-47 और कारतूस पटना की तरफ भेजा जा रहा है.

मुख्य सप्लायर है आखान सांगथम
नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड का नेता आखान सांगथम झारखंड और बिहार में नक्सलियों तक विदेशी हथियार की तस्करी कराता है. आखान की पैठ नागालैंड में काफी अच्छी है. झारखंड बिहार के कई हाई प्रोफाइल लोगों का आर्म्स लाइसेंस भी उसने नागालैंड से फर्जी कागजात के जरिए बनवाया है.

झारखंड-बिहार पहुंच चुका है हथियार
आखान सांगथम नागालैंड के अलगाववादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल आफ नागालैंड का कप्तान है. दीमापुर में रहने वाले मुकेश और संतोष सांगथम के लिए काम किया करते थे. इन दोनों ने सूरज को हथियार की सप्लाई के लिए रखा था. दीमापुर से पटना तक हथियार पहुंचाने पर सूरज को एक हथियार के दस हजार रुपए मिलते थे. जनवरी और जून 2018 में नागालैंड नंबर के ट्रक और एक कार से चार एके-47, 5000 गोली और दूसरी बार केवल 5000 गोली मुकेश सिंह के दानापुर स्थित घर भेजी गई थी.

तीसरी बार 5 फरवरी को एक के 47, पांच यूजीपीएल राइफल और 12 सौ से अधिक गोली लेकर सूरज दीमापुर से बिहार आ रहा था तब उसे बंगाल-बिहार सीमा पर डालकोटा चेक पोस्ट के पास से गिरफ्तार कर लिया गया था.

पूछताछ से हुआ खुलासा
हथियार तस्करी के आरोप में गिरफ्तार सूरज से झारखंड पुलिस के कई अधिकारियों ने पूछताछ की है. सूरज ने पुलिस के पूछताछ में बताया है कि नागालैंड से म्यांमार बॉर्डर होते हुए मणिपुर के रास्ते से वे हथियार लाते हैं. नागालैंड से बर्मा जाने और हथियार लाने में तीन से चार दिन का समय लगता है. एक बार में तीन से चार विदेशी हथियार बड़े आराम से लेकर चले आते हैं.

टीपीसी के पास सबसे अधिक विदेशी हथियार
सूरज, मुकेश और संतोष सिंह झारखंड-बिहार के नक्सलियों तक नागालैंड से लाए हथियारों को पहुंचाते थे. झारखंड पुलिस को यह भी सूचना मिली है कि नागालैंड से सबसे अधिक हथियार नक्सली संगठन टीपीसी को दिया गया है. साल 2019 में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड़ में अब तक एक दर्जन अत्याधुनिक असलहे बरामद हो चुके हैं, जिसमें अमेरिकन इजरायल और जर्मन मेड हथियार भी नक्सलियों से बरामद किए गए हैं. झारखंड पुलिस के एडीजी अभियान एमएल मीणा के अनुसार फिलहाल यह जांच किया जा रहा है कि नागालैंड से आने वाले हथियारों की खेप किस संगठन के पास सबसे अधिक पहुंचाए गए हैं.

हवाला के जरिए भुगतान
मुकेश और संतोष दीमापुर के ही हांगकांग मार्केट में दुकान चलाने वाले राजू के जरिए पैसों का लेनदेन करते हैं. बिहार में हथियार की डिलीवरी के बाद पटना में पैसे हवाला के जरिए दिए जाते हैं. पैसे के लेनदेन का सारा काम आखान सांगथम की देखरेख में होता है.

रांची में भी दो बैंक के खाते में आए हैं पैसे
नागालैंड से हथियार तस्करी के मामले में झारखंड से भी तीन गिरफ्तारी हुई है, जिनमें से एक गिरफ्तारी रांची के अरगोड़ा इलाके से की गई है. जबकि एक बोकारो और एक लातेहार से हुई है. झारखंड से गिरफ्तार तीनों हथियार तस्करों ने खुलासा किया है कि नागा नेता ने रांची के चर्च रोड स्थित दो बैंकों के खातों में पैसे डलवाए थे.

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