1984 सिख विरोधी दंगे : SC ने सज्जन कुमार की याचिका पर CBI से मांगा जवाब

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नई दिल्ली : सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई से जवाब मांगा है। सज्जन कुमार ने अपनी याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उन्हें सिख विरोधी दंगों में दोषी ठहराने और उम्रकैद की सजा सुनाने के फैसले को चुनौती दी गई है। कोर्ट इस मामले में अब छह हफ्ते बाद सुनवाई करेगी।

बता दें कि सीबीआई ने 20 दिसंबर को ही सुप्रीम कोर्ट मे कैविएट दाखिल कर दी है, ताकि कोर्ट सज्जन कुमार को एकतरफा सुनवाई मे कोई राहत न दे दे। कोर्ट कोई भी आदेश देने से पहले सीबीआइ का भी पक्ष सुने। यही वजह है कि सीबीआइ से कोर्ट ने जवाब मांगा है।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है। सज्जन कुमार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

1984 सिख विरोधी दंगा मामला

यहां पर बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगे के एक मामले में गत 17 दिसंबर को कांग्रेस के पूर्व सांसद और दिल्ली के दिग्गज नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को जीवित रहने तक कैद में रहने की सजा दी है।

दरअसल, सज्जन कुमार को दिल्ली कैंटोनमेंट के राज नगर इलाके में नवंबर 1984 को पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे में आग लगाए जाने के मामले में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

क्या होती है कैविएट

कैविएट हाई कोर्ट से मुकदमा जीतने वाला पक्षकार सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करता है। इसका मतलब होता है कि अगर मुकदमा हारने वाला पक्षकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करे तो कोर्ट उसके हक में एकतरफा सुनवाई करके कोई फैसला न दे दे। कोर्ट मामले में कोई भी आदेश देने से पहले कैविएट दाखिल करने वाले पक्षकार का पक्ष भी सुने। कैविएट दाखिल होने से एकतरफा आदेश की आशंका नहीं रहती। दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही कोई आदेश पारित होता है।

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