स्टील सिटी में आवारा कुत्तों का आतंक, 24 घंटे में 30 को अस्पताल पहुंचाया

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राउरकेला (विप्र)। स्टील सिटी राउरकेला में आवारा कुत्तों का जबर्दस्त आतंक है। लोगों का कुत्तों के भय से सड़कों पर निकलना दूभर हो गया है। बच्चे तो घरों से निकल ही नहीं रहे हैं। बीते 24 घंटे में 30 लोगों को इन कुत्तों ने काटकर घायल कर दिया है। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। इनका स्थानीय अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। बताते हैं कि बाजार और घनी आबादी वाले इलाकों में कटहे कुत्ते दिन से ही सक्रिय हो जाते हैं। कब चुपके आकर पांव पर दांत गड़ा दें, पता ही नहीं चल पता है। कटखने बनते राउरकेला के कुत्तों के कारण लोगों की आवाजाही भी कम हुई है। म्युनिसिपल कारपोरेशन ने कुत्तों की लगातार आबादी पर घ्यान नहीं दिया। हालांकि कहने को एनीमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम चलाया जाता है जिसमें कुत्तों के प्रजनन को रोकने के उपाय किए जाते हैं, लेकिन यह प्रोग्राम फिलहाल बंद पड़ा है।

स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले डॉग स्क्वॉयड हुआ करता था जिसका काम था कुत्तों की बढती आबादी को रोकने के लिए उन्हें जहर देकर मार दिया जाता था। पर पूर्व मंत्री मेनका गांधी द्वारा डॉग किलिंग पर स्थगनादेश प्राप्त करने के बाद कुत्तों के प्रजनन को रोकने के लिए नसबंदी कार्यक्रम कई शहरों में चलाया गया। निकाय सूत्र बताते हैं कि राउरकेला में बीते पांच साल से यह बंद है।
जानकारी के अनुसार कुत्तों द्वारा काटने से घायलों एंटी रैबीज बैक्सीन दी जा रही है। इन्हें हाइड्रोफोबिया होने की आशंका है। चिकित्सको का कहना है कि इंजेक्शन के बाद हाइड्रोफोबिया से जान को खतरा टल चुका है। ये इंजेक्शन कोर्स पूरा होने तक लगाए जाते रहेंगे। बाजार और घनी बस्तियों वाले उन क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है जहां पर आवारा कुत्तों की बहुतायत है। लोगों का कहना है कि ये कुत्ते काटकर भाग जाते हैं।

कुत्ते में रैबीज है कि नहीं, यह पता नही चल पाता। राउरकेला नगर निगम को शहर में कुत्तों की आबादी और बर्थ कंट्रोल के साथ ही डॉग स्क्वायड की कोई जानकारी नहीं है। आवारा कुत्तों की आबादी बढ़ती जा रही है। साथ ही डॉग बाइट के केस भी बढ़े बताए जाते हैं। अब तो लोग पालतू कुत्तों को भी बाहर टहलाने नहीं ले जा पा रहे हैं। आवारा कुत्ते उन पर अचानक हमला कर देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुत्तों के बर्थ कंट्रोल के लिए नसबंदी प्रोग्राम चलाया जाना चाहिए। बीते पांच सालों से इस दिशा में कुछ नहीं हो रहा है।
पशु चिकित्सक बताते हैं कि साल दो बार कुत्तों का प्रजनन होता है। और 56 69 दिन के भीतर प्रसव हो जाता है। एक कुतिया आठ से दस पिल्ले देती है। वह कहते हैं प्रजनन रोकना ही एक मजबूत उपाय है। एक कुतिया एक साल में 16 से 20 बच्चे तक देती है। उनका कहना है कि निकायों के पास अक्सर कुत्तों का आंकड़ा नहीं होता है जो कि अधिक जरूरी है। राउरकेला में 20 हजार के आसपास कुत्तों की संख्या बतायी जाती है। हालांकि माना जाता है कि तापमान बढ़ने से कुत्तों आक्रामक हो जाते हैं पर राउरकेला में ठीक उल्टा हुआ है।