सोना तस्करी का रूट बना भुवनेश्वर एयरपोर्ट, पकड़ी गयी तस्कर

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भुवनेश्वर (विप्र) । बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट सोने की तस्करी करने वालों के लिए स्वर्ग सा बन गया है। यह स्थान तस्करों के लिए एक रूट के रूप में परिवर्तित होने लगा है। हालांकि धरपकड़ होती है पर नजरें चुराकर या तिकड़म भिड़ाकर यह काम बराबर किया जा रहा है। बीते शुक्रवार को करीब 23 लाख से ज्यादा कीमत का सोना पकड़ा गया। इसका वजन 708 ग्राम बताया जाता है। सीमा शुल्क विभाग और एयर इंटेलीजेंस की चौकसी के चलते यह बरामदगी की जा सकी।

ज्यादातर तस्कर मुंबई के होते हैं

जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र मुंबई की रहने वाली महिला पैसेंजर यह सोना कैप्सूल के रूप में अपने मलाशय में छिपा कर ला रही थी। महिला पहले भी यह काम करती थी। बताया जाता है कि महिला होने की ओट में यह तस्करी करती थी। संदेह होने पर कस्टम अफसरों ने महिला का हिरासत में लेकर कस्टम एक्ट 1962 के तहत पूछताछ की। कई तथ्य सामने आए।

बढ़ी तस्करी घटनाएं 

भुवनेश्वर एयरपोर्ट से बीते 15 दिनों में एयरपोर्ट से 55 लाख की कीमत का तस्करी करके लाया जा रहा था। सोना बरामद किया गया। तस्करी करके ओडिशा लाया जाने वाला सोना 26 अप्रैल 2017 को पहली बार पकड़ा गया था। तब से मार्च 2018 तक 4.4 किग्रा. तस्करी का सोना इसी एयरपोर्ट पर पकड़ा जा चुका है। इसकी कीमत 1.35 करोड़ रुपया आंकी गयी है। भुवनेश्वर के बीजू पटनायक एयरपोर्ट को अक्तूबर 2010 में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का टैग मिला था। यहां से सीधे इंटरनेशनल फ्लाइट अप्रैल 2017 से शुरू हुई थी।

बाजार की मुसीबत बढ़ी

सोना चालान के लिए स्मगलर भुवनेश्वर एयरपोर्ट को क्यों चुन रहे हैं? क्या इससे पहले भी इस रूट से सोना चालान होता था? क्या भुवनेश्वर सोना स्मगलर केन्द्र स्थल है? राजधानी में सोना आने के बाद यहां से कहां जाता है? तमाम सवाल लगातार एयरपोर्ट से सोना पकड़े जाने के बाद से उठने लगे हैं। बताते हैं कि मुंबई के तस्करों ने इस एयरपोर्ट को रूट बना रखा है। सोने की स्मगलिंग के चलते सरकार और बाजार दोनों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। सोने का आयात करने वाले बैंक और बड़े जूलर्स को तस्करी के चलते नुकसान हो रहा है। सोने का ग्रे मार्केट भी बहुत तेजी से बढ़ने के चलते बढ़ रहा है। ग्रे मार्केट में ग्राहकों को सोना सस्ते दाम में बेचा जा रहा है। चीन के बाद भारत सबसे बड़ा सोने का खरीददार है। अब जबकि अवैध सोने ने दिक्कतें बढ़ा दी हैं तो सरकार को करीब 1 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है।

ग्रे मार्केट पहुंचता है सोना

तस्करी से आने वाला सोना अवैध रूप से चल रहे वाले ‘ग्रे मार्केट’ में पहुंचता है जहां से वे खरीदार को इसे सस्ते दामों पर बेचते हैं। ये सस्ते दामों पर इसलिए बेच पाते हैं क्योंकि उन्होंने इस पर आयात शुल्क नहीं चुकाना होता। बताते हैं कि इस साल कुल मांग का एक तिहाई सोना तस्करी से भारत आने के कयास लगाए जा रहे हैं। एमएमटीसी-पीएएमपी इंडिया के एक अधिकारी बताते हैं कि बीते साल 120 टन सोना रिफाइन किया गया था। इस वर्ष लोकल स्क्रैप अपूर्ति की मदद से 20 टन सोना रिफाइन किया जा सकता है। अगर स्मगलर 4 से 5 फीसदी सस्ते दामों पर सोना बेचते हैं तो हमें को अपने ऑपरेशन्स बंद करने पड़ेंगे. क्योंकि गोल्ड रिफाइनर के पास वैसे भी 1 फीसदी से कम का मार्जिन होता है। ऑल इंडिया जेम्स एंड जूलरी ट्रेड फेडरेशन के डायरेक्टर बचराज बमालवा के मुताबिक, 2016 में भारत में तस्करी के जरिये लाया जाने वाला सोना, दुगना यानी कि करीब 300 टन, तक पहुंच सकता है। वैसे, व‌र्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने यह आंकड़ा 160 टन रहने का अनुमान जताया है।

एयरपोर्ट पर तस्करी का सोना बरामद 

4/3/19- 708 ग्राम सोना- 23 लाख रुपया

22/2/19- 284 ग्राम सोना – 18 लाख रुपया

21/6/19- 295 ग्राम सोना – 21 लाख रुपया

24/6/18- 1000 ग्राम सोना – 30 लाख रुपया

7/5/18- 3 किलोग्राम सोना – एक करोड़ रुपया

29/3/18-  1143 ग्राम सोना – लाख रुपया

28/3/18-  335 ग्राम सोना – 12 लाख रुपया

फोटोः नेट से साभार