सीवर से प्राण को निकालने में लगे सात घंटे

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कटक। कैंट थाना क्षेत्र में महानदी के निकट सीवेज पंप हाउस के ड्रेनेज टैंक की सफाई के दौरान दो फुट व्यास की सीवर लाइन में फंसे मजदूर प्राणकृष्ण मुदली (60) को सात घंटे तक चले रेस्क्यू आपरेशन के बाद निकाला जा सका। फायर ब्रिगेड, ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स के सात घंटे तक चले संयुक्त आपरेशन के बाद उसे बाहर निकालकर चिकित्सा के लिए एससीबी मेडिकल कालेज भेजा गया। पाइप के भीतर उसे ऑक्सीजन व पानी भी जैसे-तैसे पहुंचाया गया। जेसीवी मशीन से पाइप तोड़कर उसे निकालने का काम सात घंटे तक चला।

महानदी तट पर पंप हाउस से कटक के एक बड़े हिस्से का सीवरेज महानदी में गिराया जाता है। सड़क के किनारे बने पंप हाउस में छोटे से टैंक में सीवरेज एकत्र करके करीब दो फुट व्यास की पाइप लाइन से महानदी में छोड़ा जाता है। इसमें जमा सिल्ट की नित्य सफाई करके मोटर चलाकर सीवरेज महानदी में निस्तारित किया जाता है। इस काम के लिए नियमित कर्मचारी है।

दिहाड़ी मजदूर प्राणकृष्ण मुदली भी यह काम कभी कभार कर देता था जिसके एवज में उसे कुछ रुपये मिल जाते हैं। आज सबेरे वह सीवरेज पाइप की सिल्ट सफाई करने के लिए छोटे से टैंक में उतर गया। कर्मचारी ने उसे बाहर आने को कहते हुए 650 हार्स पॉवर की मोटर चालू कर दी। काई ज्यादा होने के कारण वह फिसलकर पाइप में चला गया। हड़बड़ाकर कर्मचारी ने मोटर का स्विच ऑफ कर दिया। नतीजतन मुदली पाइप में ही फंस गया।

पुलिस को फोन पर सूचना दी

करीब साढ़े आठ बजे लोक सेवक मंडल के कोषाध्यक्ष और समाज प्रबंध मंडल के सचिव सोशल वर्कर भीमसेन यादव को उनके ड्राइवर रमेश ने जो संयोग से उधर से होकर आ रहा था, उक्त घटना की सूचना दी। श्री यादव फौरन घटनास्थल पर पहुंच गये और रेस्क्यू आपरेशन के लिए मौके पर मौजूद लोगों पर दबाव बनाया। उन्होंने शासन के एक उच्च अधिकारी को फोन पर घटना की सूचना दी और जल्द ही रेस्क्यू आपरेशन को कहा। भीमसेन यादव की पहल पर देखते ही देखते राहत बचाव का प्रशासनिक अमला घटनास्थल पर पहुंच गया। सड़क के दोनों ओर का ट्रैफिक रोक कर जेसीवी से पहले सड़क फिर पाइप को तोड़ने का काम शुरू किया गया। समाज की ओर से रेस्क्यू आपरेशन में जुटे लोगों को पेयजल की व्यवस्था की गयी।

मुझे निकालो वरना मर जाऊंगा

पाइप में फंसा मुदली के पांव के ऊपर एक लोहे का हिस्सा पड़ा है जिसके कारण वह हिलडुल नहीं पा रहा है। वह चिल्ला रहा था मुझे जल्दी निकालो।  वह सड़क के एक ओर से लगभग चार मीटर की दूरी पर था। उसे पीने को पानी भी भेजा गया।

ओडीआरएएफ व फायर ब्रिगेड में विवाद

रेस्क्यू आपरेशन के दौरान ही ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स और फायर ब्रिगेड के बीच राहत बचाव कार्य का श्रेय को लेकर कहासुनी हो गयी जिसके चलते ऑपरेशन कुछ पल के लिए बाधित भी होता रहा। सीनियर अफसरों के बीचबचाव के बाद वाकयुद्ध समाप्त हो सका।

सिस्टम पर सवालिया निशान

सीवरेज पाइप में मजदूर के फंसने की  घटना ने लापरवाही की पोल खोल दी। बिना सुरक्षा उपकरणों के पाइप लाइन सफाई, सिल्ट सफाई का काम दिहाड़ी मजदूरों से धड़ल्ले से कराया जाता है। नतीजा यह कि साढ़े आठ बजे फंसा मजदूर डेढ़ बजे तक नहीं निकाला जा सका। बचाव कार्य जारी है। पंपहाउस व सीवरेज सफाई में काम करने के लिए जरूरी उपकरण एक भी नहीं मिले। अधिकारियों ने इस पर कुछ न बोलने की कसम सी खा रखी थी। कर्मचारियों को सेफ्टी बेल्ट, ऑक्सीजन मास्क, हेलमेट, ग्लब्स आदि मुहैया कराए जाते हैं, लेकिन कर्मचारियों के पास सेफ्टी बेल्ट के अलावा अन्य सेफ्टी टूल्स पर्याप्त संख्या में नहीं थे। मेयर मीनाक्षी बेहरा ने रेस्क्यू आपरेशन में लगे लोगों को धन्यवाद दिया।

सेप्टिक टैंक में फंसकर दो की मौत

एक अन्य घटना के अनुसार बरगढ़ जिले में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत हो गयी। यह घटना पाइकमॉल थाना क्षेत्र के मंडोसिल गांव की है।

जानकारी के अनुसार दो श्रमिक करुणाकर पटेल व मदन बरिहा गांव के ही सुशांत बाग के  निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक के भीतर जमा सिल्ट आदि हटाने को घुसे। नेपाल नेताम मिस्त्री बाहर ही रहा। आवाज देने पर जब कोई जवाब नहीं आया तो नेताम भी भीतर घुसा। वह भी बेहोश हो गया। घुटन के कारण दोनों मजदूर पहले ही अचेत हो गए थे। दोनों को नुआपाड़ा जिला अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। नेताम का इलाज किया जा रहा है।

 

 

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