सीटें छोड़कर कांग्रेस ने एकता का दरवाजा खोला तो बंद करने में जुटे माया-अखिलेश

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पर मायवती बोलीं अहसान न करें हमें नहीं चाहिए

अखिलेश ने भी माया के सुर में सुर मिलाया

अनूप वाजपेयी

कानपुर। यूपी के चुनावी मैदान में कांग्रेस दूर की सोंच रही है। अपना राजनीतिक अस्तित्व बरकरार रखने के लिए कांग्रेस ने प्रादेशिक दलों से समझौता तो नहीं किया पर यह भी ध्यान रखा कि भविश्य में अगर सरकार गठन में इन दलों से बात करनी पडे तो एक रास्ता खोला रखा जाए। इसी कूटनीति के तहत कांग्रेस ने सपा बसपा गठबंघन  के लिए सात सीटें ठोडी हैं जिसमें मुलायम सिंह, मायवती और अजित सिंह की सीटे भी हैं। लेकिन इन सीटों को छोडने की काग्रेसी गणित को मायावती ने यह कह कर ठुकरा दिया कि जीतना गठबंधन को ही है। कांग्रेस चाहे तो पूरी 80 सीटों पर लड कर देख ले।

मालूम तो होगा ही कि इस लोक सभा चुनावों मे कांग्रेस ने किसी भी दल से गठबंधन नहीं किया है। जबकि पुराने धुर विरोधी सपा और बसपा नरेन्द्र मोदी को रोकने के लिए एक हो गए हैं। जब सीटों के बंटवारे का समय आया तो गठबंघन ने दो सीटे छोड दी थी जिसमें सोनिया गांधी की रायबरेली और राहुल गांधी की अमेठी सीट। यहां से गठबंधन अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगा। तो जवाब में कांग्रेस ने भी बडा दिल दिखाते हुए मुलायम सिंह यादव की मैनपुरी सीट, सपा के अगुवा अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल की कन्नौज सीट, मायवती अगर कहीं से लडे तो उनकी सीट के साथ साथ अजित सिंह और उनके बेटे की सीट पर भी कांग्रेस अपना प्रत्याशी नहीं खडा करेगा।

यही नहीं कांग्रेस ने उदारता दिखाते हुए अपना दल के कृष्णा पटेल गुट के लिए भी दो सीटें छोड दी हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णँय राहुल गांधी और प्रियंका के स्तर पर भी ओके किया गया तब इस पर अधिकारिक एलान किया गया। इसके पीछे सोंच यह है कि अगर मतगणना के बाद परिस्थितियां सरकार बनाने लायक हुई तो प्रदेश के गठबंधन से बातचीत का एक रास्ता खुला रहे। लेकिन बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमों मायावती ने जो दांव खेला उससे कांग्रेसी रणनीतिकारों के होश ही उड गए। अपने अप्रत्याशित तेवरों के लिए मशहूर मायवती ने कांग्रेस को खरीखोटी सुनाते हुए कह दिया कि काग्रेस गठबंधन पर कोई अहसान न करें। उन्हें अगर कोई गलतफहमी है तो कांग्रेस यूपी की पूरी 80 सीटों पर लड कर देख ले कि उनकी क्या दुर्दशा होनी है। वे चाहे तो अपनी ये सातों सीटे भी रख ले। उत्तर प्रदेश में जीत गठबमधन की ही होनी है। मायवती के बयान पर हां में हां मिलाते हुए सपा के अगुवा अखिलेश यादव ने भी कह दिया है कि गठबंघन अकेले ही भाजपा को हराने में सक्षम है। इन तेवरों पर कांग्रेस के प्रवक्ता ओम नारायण सिंह का कहना है कि कांग्रेस की पेशकश शिष्टाचार के तहत है। इसे अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए।

उधर कथित सहयोगी दल कांग्रेस पर विपक्षी एकता कमजोर करने का आरोप लगाने लगे हैं। उनका कहना है कि इस पार्टी का रवैया बुरा है। पर यूपी में सपा-बसपा-आरएलडी ही भाजपा को रोकने को काफी है। एक ओर जहां विपक्षी पार्टियां मिलकर भाजपा को मिलकर हराना चाहती है, वहीं यह भी कहा जा रहा है कि इस मकसद को हासिल करने में सबसे बड़ी चुनौती खुद कांग्रेस है। मायावती और अखिलेश यादव तो कांग्रेस पर भ्रम की स्थिति फैलाने का आरोप लगा रहे हैं।