सांसद और विधायक भी पखाल की मस्ती में झूमे

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भुवनेश्वर 20 मार्च। देश दुनिया के किसी भी कोने में रहते हों पर ओड़िया लोग बीस मार्च को पखाल दिवस मनाना नहीं भूलते। ओडिशा के पारंपरिक खाद्य पखाल व अन्यसेहतमंद खाद्य की ओर रुख करने की अपील भी करते हैं। बीजद सांसदों ने पखाल पार्टी करके इसका आनंद उठाया। कहने को तो बीजद संसदीय दल की बैठक थी, पर बैठक की औपचारिक खानापूरी करते हुए सांसदों पखाल खाकर इंज्वाय करना बेहतर समझा। यही हाल कमोबेश ओडिशा विधानसभा का रहा। बजट सत्र में अंतराल में विधायकों ने कैंटीन में पखाल का स्वाद लिया। इस अवसर पर लोगों ने दही, नींबू, बैंगन का भर्ता, बेर का अचार, कटहल की भुजिया, सहजन- आलू भुजिया, साग, बड़ी चूरा, ¨भडी भुजिया, आम कीचटनी व सलाद के साथ पखाल खाने का आनंद लिया। बीस मार्च को संयुक्त राष्ट्र संघ ने खुशी दिवस घोषित कर रखा है। फिर ओड़िया लोगों के लिए इससे बढ़कर और क्या खुशी हो सकती है कि लोगों पखाल भात खाकर खुशी मनायी। होटलों ढाबों और कैंटीनों में पखाल की धूम रही।

ओडिशा में बनने वाले पारंपरिक व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि, स्वास्थ्य के लिए भी काफी अच्छे होते हैं। फास्ट फूड के प्रचलन से पूर्व इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों का इस्तेमाल किया जाताथा। इस तरह के व्यंजनों में चकुलि पिठा व चितउ पिठा, पखाल शामिल हैं। यह परंपरा लौट रही है। आमतौर पर आज भी इनका उपयोग लोगों द्वारा किया जाता है। ये व्यंजन स्वाद की दृष्टिसे न केवल अच्छे है बल्कि, इनको बनाने की विधि भी सरल है। यही कारण है कि इनका उपयोग काफी किया जाता है।

ओडिशा का मुख्य भोजन चावल है। साल के पत्तों पर पारंपरिक खाना परोसा जाता है। ओडीशा के खाने में मुख्य रूप से केला, कटहल, पपीते का प्रयोग किया जाता है। साथ ही खाने में सूखे आमके टुकड़ों और इमली का प्रयोग भी बहुत किया जाता है। ओडिशा के खाने को और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए दूसरे कई मसालों का प्रयोग किया जाता है जिसमें सरसों दाना, मेथी, जीरा, सौंफ, कलौंजी, लहसुन, प्याज का प्रयोग किया जाता है। लेकिन मंदिरों के लिए बनने वाले प्रसाद में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यहां के प्रसिद्ध मंदिर में भगवान के लिए  56 भोजन तैयार किये जाते हैं। जिसे महाप्रसाद कहा जाता है। समुद्री क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के भोजन में झींगा मछली और प्रॉन मुख्य है। ओडिशा में 80 प्रतिशत लोग कृषि क्षेत्र पर निर्भर हैं जिसकीवजह से यहां के लोग अपने खेतों में पैदा हुई सब्जियों और फलों का ही प्रयोग करते हैं। ताजे फल और सब्जियां होने के कारण खाने का जायका और बढ़ जाता है।

दही पखाल और पखाल, चावल और पानी से बनने वाली डिश है जो गर्मियों के दिनों में लोगों को लू और गर्मी से बचाता है। साथ ही ये हल्का और सुपच्य भी होता है। ‘दही पखाल, सज पखाल औरबासी पखाल’ ओडिशा का सबसे ज्यादा प्रसिद्ध खाना है। पखाल गरीब से लेकर अमीर तक की थली में मिलता है। पखाल तोराणी सेहत के नजिरए से बेहद लाभदायक होता है।