शैव से वैष्णव क्षेत्र की ओर बढ़ सकते हैं मोदी, पुरी से लड़ने की चर्चा

0
32

मोदी के भरोसे ही पूरा हो सकता है ओडिशा में अमित शाह का मिशन

भुवनेश्वर। क्या मोदी वाराणसी के साथ ही पुरी से भी चुनाव लड़ेंगे? उनकी ओडिशा से नुमाइंदगी वाराणसी को क्योटा बनाने का सपना लिए है तो वह पुरी या जिस क्षेत्र से भी लड़े उसे विकास के पंख लग सकते हैं। राज्य का राजनीतिक भला होगा सो अलग से। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगला लोकसभा चुनाव पुरी से लड़ सकते हैं। इसके लिए संगठन उन्हें तैयार कर रहा है। बीजेपी की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष बसंत पंडा ने केंद्रीय संसदीय बोर्ड को मोदी के पुरी से लड़ाने संबंधी प्रस्ताव भेजा है। पंडा ने कहा कि राज्य इकाई चाहती है कि मोदी ओडिशा के ही किसी क्षेत्र से अगला चुनाव लड़ें। ओडिशा में अमित शाह का मिशन 120+ मोदी के ओडिशा से चुनाव लड़ने पर आसानी से हासिल किया जा सकता है। ओडिशा में मोदी इम्पैक्ट न केवल ओडिशा बल्कि सीमावर्ती राज्यों में भी प्रभाव डाल सकता है। पंडा कहते हैं कि समय-समय पर उक्त आग्रह किया जा चुका है।

एक चुनावी सर्वे के मुताबिक ओडिशा में लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 13 सीट मिलने की संभावना के बाद बीजेपी की राज्य इकाई में हलचल है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि बीजेडी और कांग्रेस को क्रमशः 6 व 2 सीटें मिल सकती हैं। राज्य में कुल 21 लोकसभा सीटें हैं। सर्वे में विस चुनाव में भी सीटें बढ़ने की बात कही गयी है। बीते साल अप्रैल 2017 में भुवनेश्वर में हुई बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी राज्य इकाई ने सीधे प्रधानमंत्री से पुरी सीट से चुनाव लड़ने का आग्रह किया था। इस मोदी मुस्करा दिए थे।

जानकार बताते हैं कि मोदी के ओडिशा से लड़ने पर विचार भी किया जा रहा है। अभी वह शैव क्षेत्र वाराणसी से लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अब वैष्णव क्षेत्र यानी पुरी की ओर रुख कर सकते हैं। पुरी से लड़ने के पीछे एक वजह हो सकती है हिंदुत्व का एजेंडा। राज्य में लोकसभा और विधान सभा चुनाव एक साथ होने वाले हैं। सत्तादल बीजेडी ने ऐलानिया कह दिया है कि वह कभी भी चुनाव में जाने को तैयार है। बीजेडी महाप्रभु जगन्नाथ के नाम पर वोट मांग सकती है। मोदी दो सीटों से लड़ेंगे। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि मोदी जीतने पर एक सीट छोड़ेंगे जिसमें पुरी नहीं होगी। राजनीतिक क्षेत्रों में हलचल है कि मोदी पुरी से क्यों लड़ना चाहते हैं। जबकि पुरी से बीजेपी कभी भी नहीं जीती। यहां से बीजेडी सांसद पिनाकी मिश्र काफी लोकप्रिय हैं। मिश्रा 1996 में यहां से जीत चुके हैं। 2014 में तो उन्हें 50 प्रतिशत वोट मिला था। कांग्रेस दूसरे और बीजेपी 20 प्रतिशत वोट पाकर तीसरे नंबर पर थी। फिलहाल पुरी की चिलिका विधानसभा सीट पर बीजेपी का प्रत्याशी सिर्फ 541 वोटों से जीती थी। क्षेत्र के लोकप्रिय नेता लालटेंदु महापात्र उर्फ लूलू महापात्र का परिवार बीजेपी के साथ है। यह क्षेत्र उनके प्रभाव वाला कहा जाता है। लूलू महापात्र की मृत्यु हो चुकी है। बीजेडी के पास 147 विधानसभा सीटों में 118 सीटें हैं। बीजेपी इस क्षेत्र में वोट का प्रतिशत लगातार बढ़ा है। राज्य इकाई के एक बड़े नेता बताते हैं कि पुरी लोकसभा सीट और यहां की सातों विधानसभा सीटों पर राजनीतिक कैलकुलेशन केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जा चुका है।

2004 में कांग्रेस को रोकने के लिए बीजडी और बीजेपी के गठबंधन ने चुनाव लड़कर 93 विधानसभा सीटें जीती थी। बीजेडी तब 84 सीटों पर लड़ी थी और 61 जीती थी जबकि बीजेपी ने 63 में से 32 जीती थी। बीजेडी और बीजेपी दोनों दलों को मिले वोट का प्रतिशत 2004 में क्रमशः 27.5 व 17.11 प्रतिशत था। सन 2009 में दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था। इस चुनाव के बाद 2009 में 145 पर बीजेपी लड़ी थी और 6 सीट ही हासिल कर पायी थी। जबकि बीजेडी 147 पर लड़ी और 103 सीटे जीती थी। वोट प्रतिशत भी 27.5 प्रतिशत से बढ़कर 38.86 प्रतिशत हो गया था। 2014 में 147 में से 117 सीटें बीजेडी जीती। इसी साल फरवरी में उपचुनाव सीट जीतकर संख्या 118 कर ली। वोट प्रतिशत 43.35 हो गया। बीजेपी 18 प्रतिशत वोट पाकर दस सीट ही जीत पायी थी।

अबकी बीजेपी ने ओडिशा पर जोर कसा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां आठ सभाएं कर चुके हैं जबकि अमित शाह नौ बार आ चुके हैं। एक आंकलन यह भी है कि मोदी कालाहांडी, बलंगीर या कोरापुट जैसे क्षेत्र से भी लड़ सकते हैं। ये गरीब इलाके हैं। मोदी हमेशा गरीबों की बात करते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here