विश्व हाथी दिवसः हाथियों की संख्या बढ़ रही है ओडिशा में

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भुवनेश्वर (विशेष प्रतिनिधि)। हाथियों के लिए ओडिशा अनुकूल वातावरण का स्थान है। यहां के वन क्षेत्र में हाथियों की संख्या बढ़ रही है। बीते पांच साल में हाथियों की संख्या बढ़ कर 1976 हो गयी है। इनमें 344 नर, 1092 मादा, 38 हाथियों का पता नहीं चल पाया कि वे नह हैं या मादा और 502 युवा हाथी हैं। सन 2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 27312 हाथी हैं। आज विश्व हाथी दिवस है। यह 2011 से हर साल मनाया जाता है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वनों की कटान और हाथियों को भोजन न मिलने के कारण ये सब वन क्षेत्र के इर्दगिर्द ग्रामीण क्षेत्र में मंडराने लगते हैं।

ओडिशा में ग्रामीण इलाकों और हाथियों के बीच अक्सर मुकाबला होता ही रहता है। झारखंड से घुसकर ओडिशा आने वाले हाथियों ने बालासोर और मयूरभंज में दहशत फैला रखी है तो कटक का अटगढ़ भी हाथियों के कारण दहशतजदा रहता है। गत माह करीब 40 हाथियो के झुंड ने बालासोर के नीलगिरि ब्लाक के तिनकोसिया वन क्षेत्र मे प्रवेश करके सीमावर्ती गांवों को तबाह कर दिया। फसलों को भारी नुकसान हुआ है। हाथियों के भी मारे जाने की घटनाएं प्रकाश में आती रही हैं। मयूरभंज के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में 2010 में 14 हाथियों की मौत के रहस्य पर से परदा आज तक नहीं उठ सका।

पहले भी मयूरभंज के एक गांव में झारखंड सीमा को पार कर करीब 70 हाथियों का दल ओडिशा में घुस आया था। वन विभाग के अफसर और कर्मी हाथियों को गांवों की तरफ आने से रोक नहीं पा रहे है। वन से आबादी वाले इलाकों की तरफ हाथियों के झुंड का घुसना कैसे रोका जाए यह बड़ा सवाल है। हांका लगाने के साथ ही गांव वाले देर शाम झाड़ियों मे आग लगाकर हाथियों को भगाते हैं। कुलदिहा जंगल की ओर हाथियों का झुंड विचरण कहता रहता है। ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम और ट्रेकिंग टीम हाथियों के झुंड पर नजर रखे है। बताते हैं कि ये खानापानी की तलाश भटकते हुए गांवों की ओर आ जाते हैं। बताते हैं कि पिछले दस साल में सिर्फ झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में जंगली हाथी एक हज़ार लोगों को मार चुके हैं। इसी अवधि में सिर्फ झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में एक सौ सत्तर से ज़्यादा हाथी भी मारे जा चुके हैं। वन्य जीव प्रेमी बताते हैं कि जंगलों और जंगलों के आसपास के इलाके इंसानों और जानवरों की रणभूमि में तब्दील हो चुके हैं। दोनों अपने-अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। वन विभाग के प्रमुख अधिकारी का कहना है कि अतिक्रमण और जंगलों के सिकुड़ने की वजह से हालात और भी गंभीर होते जा रहे हैं।

चार साल में 276 हाथी 319 मनुष्य मारे गए-अप्रैल 204 से लेकर पांच मार्च 2018 तक के वन विभाग के आंकड़े लें तो ओडिशा म‍ॆं इस दौरान 276 हाथी मारे जा चुके हैं जबकि मनुष्यों के मारे जाने के आंकड़ें 319 हैं। यानी हाथी भारी पड़ते रहे। घायल मनुष्यों की संख्या 201 हैं। दोनों के बीच इस बीच टकराव 431 बार हुआ है। सबसे ज्यादा हाथी अप्रैल 2015 से मार्च 2016 के बीच 80 मारे गए थे। जबकि 79 मनुष्यों को हाथियों ने रौंदकर मार डाला था। कुल 37 मानव घायल हुए थे। टकराव की 100 घटनाएं हुई थी।