वित्त आयोग के टर्म्स ऑफ रिफरेंस पढ़े बिना ही मोदी को लिख रहे नवीनः धर्मेंद्र

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भुवनेश्वर। 15वें वित्त आयोग में टर्म्स आफ रिफरेंस पर दक्षिण के राज्यों के साथ विरोध के सुर में सुर मिलाने वाले ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लगता है कि टर्म्स ऑफ रिफरेंस पढ़ा ही नहीं है।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने पटनायक को सलाह दी कि विकास को राजनीति के चश्मे से न देखें। उनका आरोप है कि वह योजनाओं का धन अपनी सामंतवादी सोच के तहत विकास के नाम पर बीजद कार्यकर्ताओं को दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह उनकी समझ से बाहर कि पटनायक प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया ड्रीम का न जाने क्यों पटनायक विरोध कर रहे हैं। प्रधान ने कहा कि जो राज्य जनसंख्या पर नियंत्रण और विकास को प्राथमिकता देगा उसके लिए 15वें वित्त आयोग में प्रावधान है। राज्य के सीएम पीएम को नाहक पत्र भेजकर समय और उर्जा बर्बाद कर रहे हैं। उनका कहना है कि ओडिशा को अधिक आर्थिक अनुदान मिलेगा। जन्म दर राज्य में नियंत्रित है।

मालूम हो कि 13 अप्रैल नवीन पटनायक ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वित्त आयोग में टर्म्स ऑफ रिफरेंस पर आपत्ति जतायी थी। फंड ट्रांसफर सेंसस के अनुसार होगा, इस पर आपत्ति है, ओडिशा का फंड आवश्यकता ज्यादा है। गरीबो का राज्य है ओडिशा। नवीन ने कहा था कि 1971 के सेंसस के हिसाब से मिलना चाहिए न कि 2011 की जनगणना के हिसाब से। बीजू जनता दल के प्रवक्ता देवी मिश्रा ने कहा कि विरोध अकेले ओडिशा ही नहीं कर रहा है, अन्य राज्य भी कर रहे हैं, तो क्या उन्होंने भी नहीं पढ़ा।

सरकार की ओर से देवी मिश्रा ने कहा कि 14वें वित्त आयोग में ज्यादा ओडिशा ज्यादा धन मिला था, पर केंद्र ने ही अपना शेयर रोक लिया था। यही नहीं विशेष राज्य की मांग नकारी जा रही है। मिश्रा कहते हैं कि तय तो यह है कि 1971 की जनगणना के हिसाब से 2026 तक पुराने टर्म्स ऑफ रिफरेंस पर वित्त आयोग चलेगा। फिर आधार 2011 को क्यों लिया गया। वित्त आयोग पर सरकार ने अपना वर्चस्व कायम कर लिया है।

भारतीय वित्त आयोग की स्थापना 1959  में की गयी थी। इसकी स्थापना का उद्देश्य भारत के केन्द्रीय सरकार एवं राज सरकारों के बीच वित्तीय सम्बन्धों को पारिषित करना था। वित्त आयोग प्रत्येक पाँच वर्ष बाद नियुक्त किया जाता है। अभी तक 15 वित्त आयोग नियुक्त किए जा चुके हैं। 2017 में नवीनतम वित्त आयोग एन के सिंह (भारतीय योजना आयोग के भूतपूर्व सदस्य) की अध्यक्षता में स्थापित किया गया था।15वें वित्त आयोग को वह फॉर्म्युला तय करना होगा, जिसके आधार पर राज्यों और केंद्र के बीच टैक्स रेवेन्यू का बंटवारा होगा। कंसॉलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से राज्यों को दिए जाने वाले ग्रांट के रूल्स भी वह तय करेगा। इस वित्त आयोग को जीएसटी से आमदनी के बंटवारे का तरीका बताना होगा। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स इस साल 1 जुलाई से लागू हुआ है।
वित्त आयोग को अपनी रिपोर्ट 1 अप्रैल 2020 से पहले सौंपनी होगी। 14वां वित्त आयोग 2 जनवरी 2013 को बनाया गया था। इसके अध्यक्ष रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर वाई वी रेड्डी थे। इस आयोग ने 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020 तक के लिए सुझाव दिए थे। रेड्डी की अध्यक्षता वाले वित्त आयोग ने केंद्रीय टैक्स से होने वाली आमदनी में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत करने का सुझाव दिया था।  15वें वित्त आयोग का काम कुछ अलग होगा क्योंकि उसे जीएसटी के हिसाब से टैक्स रेवेन्यू के बंटवारे का फॉर्म्युला बताना होगा।
76 साल के एन के सिंह को हाल में फिस्कल कंसॉलिडेशन फ्रेमवर्क तय करने वाली समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। सरकार ने 15वें वित्त आयोग के लिए 10 करोड़ का बजट तय किया है। एक सरकारी बयान में बताया गया है कि 15वें वित्त आयोग का मैंडेट कुछ समय बाद तय किया जाएगा। आयोग केंद्र और राज्य सरकारों के वित्त, घाटे, ऋण स्तर की स्थिति की समीक्षा करेगा। यह मजबूत राजकोषीय प्रबंधन के लिए राजकोषीय स्थिति मजबूत करने की व्यवस्था पर सुझाएगा।  नया आयोग अन्य बातों के साथ साथ माल व सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के केंद्र व राज्यों की वित्तीय स्थिति पर असर का भी आकलन करेगा। उल्लेखनीय है कि वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच साल में होता है। आयोग केंद्र से राज्यों को मिलने वाले अनुदान के नियम भी तय करता है।

 

 

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