लांगुली, एमार के बाद अब बड़ा अखाड़ा मठ ढहाने की तैयारी, बीजेपी व कांग्रेस का विरोध

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मठों को जनता का संरक्षण मिला, वही जनता अब मौनः महंत

राज्य सरकार प्राचीन परंपरा व संस्कृति खत्म कर रही हैःबीजेपी

नवीन सरकार ध्वस्तीकरण के निर्णय पर पुनर्विचार करेः कांग्रेस

फैसले से राज्य सरकार को राय मशविरा करना चाहिए थाःबीजेपी

पुरी (विप्र)। जगन्नाथ धाम पुरी में मठों पर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे बुलडोजरों को रोकने के लिए गोवर्द्धनपीठ पुरी के शंकराचार्य समेत बीजेपी और कांग्रेस भी मुखर हो उठी है। श्रीमंदिर के 75 मीटर के दायरे वाले मठों व अन्य ढांचों को ढहाना ओडिशा में राजनीतिक बनता जा रहा है। अन्य वर्ग भी विरोध करने लगे हैं। एमार मठ के बाद अब साधुओं के बड़ा अखाड़ा मठ का नंबर है। 12वीं शताब्दि के श्रीजगन्नाथ मंदिर की सुरक्षा के दृषिटकोण से 75 मीटर के दायरे वाले निर्माण को अवैध बताकर ढहाया जा रहा है।

मठ के इतिहास के मुताबिक एमार मठ 900 साल पुराना है तो नागा साधुओं का बड़ा अखाड़ा मठ 1402 में स्थापित किया गया था। इतिहास बताता है कि बड़ा अखाड़ा मठ 1402 में नागा साधुओं द्वारा स्थापित किया गया था। इस मठ का उद्देश्य बाहरी आक्रांताओं से श्रीजगन्नाथ मंदिर को बचाना था। यह पुरी तीर्थस्थल आने वाले साधुओं के लिए प्रमुख पवित्र स्थल माना जाता है। बताते हैं कि 14 शताब्दी में श्रीरामानंद का पुरी आना हुआ। उन्होंने मंदिरों की रक्षा के लिए कुछ केंद्र स्थापित किए जिन्हें अखाड़ा कहा जाता है। यहां पर स्थापना के बाद से ही रीतिनीति और नाम संकीर्तन नियमित होता रहता है। जगन्नाथ संस्कृति और रीतिनीति का यह भी हिस्सा बन चुका है।

एमार मठ का एक हिस्सा छोड़कर बाकी ध्वस्त कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक मठ के महंत अभी भी ध्यान मुद्रा में बैठे हैं। मठ ढहाने के विरोध करने का उनका अपना यही तरीका है। हालांकि गणेश चतुर्थी की छुट्टी के कारण ध्वस्तीकरण बंद है पर राजनीति में यह मुद्दा गरम है। लोगों का कहना है कि श्रीमंदिर की मेघनाद दीवार से लगे लांगुली मठ और एमार मठ गिराने के बाद ओडिशा की धार्मिक राजधानी पुरी में मठ संस्कृति प्रभावित हुई है।

एमार मठ के बाद बड़ा अखाड़ा मठ गिराया जाएगा। बड़ा अखाड़ा मठ के महंत हरिनारायण दास का कहना है कि मठों के ढहाए जाने का दृश्य देखकर दुख होता है कि मठों को बढ़ावा वाली जनता खुद मौन हो कर तमाशा देख रही है और मठ तोड़े जा रहे हैं। मठों की प्राचीन संस्कृति और परंपरा के संरक्षण को खत्म किया जा रहा है और लोग चुप हैं। इस मठ के लोग शिफ्टिंग की तैयारी में जुटे हैं।

सत्ताधारी दल बीजू जनता दल को छोड़कर बाकी दल पुरी में चलाए जा रहे ध्वस्तीकरण अभियान को लेकर राज्य में नवीन पटनायक सरकार को घेरने में जुट गए हैं। कांग्रेस के विधायक सुरेश राउत कहते हैं कि हिंदू धर्म की प्राचीन परंपरा खंडित की जा रही है, यह निंदनीय है। मठों से हजारों लोगों की रोजी रोटी जुड़ी है जिसे समाप्त किया जा रहा है। सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे।

पुरी से बीजेपी विधायक जयंत षाड़ंगी ने मठ ध्वस्तीकरण कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने इसे सरकार का अनुचित कार्य बताया। विधायक जयंत का कहना है कि नवीन सरकार को मठों को गिराने से पहले लोगों से राय मशविरा करना चाहिए था। राज्य सरकार के विधि मंत्री प्रताप जेना ने कहा कि लोगों को श्रीमंदिर की सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के लिए की जा रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का स्वागत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि श्रीमंदिर पर किसी तरह की राजनीति करना उचित है।