नाबालिग आदिवासी से रेपःपीड़िता के शिशु की मौत, प्रिंसिपल व स्टाफ सस्पैंड, एनएचआरसी ने रिपोर्ट तलब की

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कंधमाल। दरिंगबाडी में रेप के आठ माह बाद शिशु को जन्म देने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करके रिपोर्ट तलब की है। यह घटना दरिंगबाड़ी के सेवाश्रम हाई स्कूल की है जो अनुसूचित एवं जनजाति विभाग द्वारा चलाया जाता है।बलात्कार के आठ माह बाद आठवीं क्लास की 14 साल की नाबालिग आदिवासी छात्रा के गर्भ से जन्मे शिशु की यहां एमकेसीजी मेडिकल कालेज ब्रह्मपुर में इलाज के दौरान मौत हो गयी।

प्रिसिंपल समेत स्टाफ निलंबित

राज्य सरकार द्वारा संचालित आदिवासी छात्राओं के लिए आवासीय विद्याल की प्रधानाचार्या को कंधमाल के कलक्टर ने निलंबित कर दिया। कलक्टर खुद मामले की जांच कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने कल ही राज्य सरकार को भेजी रिपोर्ट में प्रधानाचार्या राधारानी दलयी को निलंबित करने की अनुशंसा की थी। रेप के आरोपी सरवन प्रधान (23) को हिरासत में ले लिया गया। इस घटना के विरोध मे दरिंगबाड़ी में आज भी हंगामा हुआ।

प्रसव के बाद ही हॉस्टल से निकालने की कोशिश

आवासीय विद्यालय में प्रसव के बाद प्रधानाचार्या के कहने पर नाबालिग आदिवासी छात्रा को पिछले दरवाजे से बाहर करने का षड़यंत्र किया गया था ताकि हंगामा न मचने पाए। इसके अलावा दो मैट्रन, एक एएनएस, दो रसोइये, व वार्डन को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में डिसमिस कर दिया गया।

बेबस पीड़िता ने छिपाया दर्द

अनुसूचित एवं जनजाति विभाग के मंत्री रमेश माझी ने बताया कि कंधमाल के कलक्टर को जांच सौंपी गयी है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह ने बताया कि आदिवासी छात्रा का बलात्कार उसके गांव में हुआ था। वह भय के मारे कुछ भी न बता सकी। पीड़िता को कंधमाल के बालीगुडा अस्पताल से ब्रह्मपुर में एमकेसीजी मेडिकल अस्पताल में ले जाया गया था जहां पर शिशु की मौत हो गयी।

बुरा हाल हे आदिवासी आवासीय स्कूलों का

राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य सोशल वर्कर नम्रता चड्ढा ने कहा कि  आदिवासी आवासीय स्कूलों और छात्रावासों का बुरा हाल है। विभागीय अधिकारियों ने कभी भी इनकी सुध नहीं ली। हालत बद से बदतर हो गयी। कंधमाल और कोरापुट की घटनाओं से भी सबक नहीं लिया गया।  उनका कहना है कि दरिंगबाड़ी में आदिवासी छात्रा से आठ महीने पहले रेप व फिर छात्रावास में शिशु का जन्म होने की घटना को एनएचआरसी ने अपने आप संज्ञान में लिया है। मुख्य सचिव को नोटिस जारी करके घटना  की रिपोर्ट  मांगी गयी है। एनएचआरसी के अनुसार यह घटना 12 जनवरी की है। छात्रावास में शिशु को जन्म देने के बाद आठवीं क्लास की 14 साल की नाबालिग आदिवासी छात्रा को चोर दरवाजे से जंगल में छिपाने की कोशिश की गयी। स्थानीय लोगों की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया। 13 जनवरी को उसे बालीगुडा अस्पताल पहुंचाया गया। नम्रता का कहना है कि आदिवासी आवासीय विद्यालयों में सुविधाओं की भारी कमी है। विभाग के बड़े अधिकारियों से भी पूछताछ होनी चाहिए। उधर एनएचआरसी ने राज्य सरकार के मुख्यसचिव को नोटिस देते हुए घटना की रिपोर्ट मांगी है।