राष्ट्रीय विचार के लोगों की पश्चिमबंगाल में हत्याएं अति दुर्भाग्यपूर्णः आरएसएस

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सरकार ही सबकुछ नहीं करेगी, समाज भी खुद अपना काम करे

राम मंदिर का निर्माण राजनीतिक मुद्दा नहीं आस्था का सवाल है

भारतीय नस्ल की गायों का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा

पर्यावरण संरक्षण के लिए संघ ने देश को दिया थ्री पी फार्मूला  

भुवनेश्वर(विप्र)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी मंडल की बैठक में तमाम राष्ट्रीय मुद्दों और सामाजिक विचारों पर मंथन भी किया गया। संघ के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने कहा कि राम मंदिर कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह आस्था का सवाल है। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाने को आम सहमति का विषय बताया। उनके अनुसार बैठक में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय विचार के लोगों की लगातार हो रही हत्याओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया। वैद्य ने बढ़ती शाखाओं और संघ के कार्य का लगातार हो रहे विकास पर प्रसन्नता जाहिर की और कहा कि युवा छात्र लगातार संघ से जुड़ रहे हैं।

मीडिया से मुखातिब मनमोहन वैद्य ने बताया कि कठिन प्रयास और समाज में अनुकूलता के कारण संघ का विस्तार हो रहा है। राम मंदिर को आस्था का प्रश्न बताते हुए मनमोहन वैद्य ने कहा कि 370 धारा का प्राविधान तो संविधान में अस्थायी रूप में था। इसे आम सहमति से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि संघ का मानना है कि सरकार ही सबकुछ नहीं करेगी। समाज को स्वयं अपना काम करना होगा। इसी भावना को लेकर संघ समाज में परिवर्तन के लिए सक्रिय है। उन्होंने कहा कि जात-पांत को मिटाने और सामाजिक समरसता जागृत करने को संघ के स्वयंसेवक काम कर रहे हैं। भारतीय नस्लों की गायों का संवर्धन करने की आवश्यकता पर वैद्य ने बल देते हुए कहा कि स्वयं सेवक इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में एकल परिवार का चलन बढ़ने के कारण परिवार में मूल्यों का क्षरण हो रहा है।

मनमोहन वैद्य ने पर्यावरण की रक्षा के लिए थ्री पी का फारमूला दिया। पौधे लगाना, पानी का कम प्रयोग और प्लास्टिक का इस्तेमाल न करना। उनका कहना है कि यही थ्री पी पर्यावरण को सरंक्षित कर सकेंगे। उन्होंने आरएसएस की उपलब्धियों और शाखाओं में वृद्धि का भी ब्यौरा दिया। वेब साइट के जरिये ज्वाइन आरएसएस के नाम से योजना शुरू की गयी थी। इसके बाद तो बहुत लोग जुड़े। कार्यकारी मंडल की बैठक में सरसंघ चालक मोहन भागवत समेत समस्त प्रांतीय अधिकारी और 350 प्रतिनिधि शामिल हुए।