राजनीतिक सम्मान को धरना देंगे किन्नर, प्रत्याशी लड़ाना भी संभव

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भुवनेश्वर। ओडिशा के किन्नरो ने राजनीति में भी सम्मान के नयी मुहिम छेड़ दी है। चुनाव के दौरान वोट डालने के लिए वोटरों को जागरूक करने का अभियान भी चलाएंगे। राजनीति में भागीदारी के लिए दलों पर दबाव बनाने की भी कोशिश करेंगे। किन्नरों के प्रति दलों के उपेक्षित रवैये को लेकर किन्नरों ने धरना देने का निर्णय लिया है। तारीख अभी घोषित नहीं की है। दावा है कि राज्य के कोने-कोने से करीब पांच हजार किन्नर जुट सकते हैं। बात न बनी तो प्रत्याशी भी उतारे जा सकते हैं। यह बात आल ओडिशा किन्नर महासंघ की अध्यक्ष मीरा परीडा ने कही। उनका कहना है कि महिला आरक्षण का स्वागत है पर हमारी भी नेता लोग सुनें।

मीरा परीडा

राजधानी के संवादिक भवन में करीब एक दर्जन किन्नरों के साथ मीडिया से रूबरू मीरा परीडा का कहना है कि राजनीतिक दलों ने किन्नरों को कभी भी महत्व नहीं दिया। कुछ किन्नरों को जनता की सेवा के रिवार्ड के रूप में पार्षदी, मेयरी और विधायकी मिल चुकी है। वे सीधे चुनकर आए थे।  दल यदि महिलाओं को आरक्षण देकर बढ़ावा दे सकते हैं तो किन्नरों को सम्मान देने पर क्यों नहीं सोचते? संख्या के अनुसार अवसर दिये जाएं। सुप्रीमकोर्ट ने भी थर्ड जेंडर के रूप में पहचान दी है।

                                                     साधना मिश्रा

महासंघ की अध्यक्ष मीरा परीडा के साथ मेघना साहू, मेनका, माधुरी मां, साधना मिश्रा आदि लगभग एक दर्जन से ज्यादा किन्नर मौजूद रहे। इनका कहना है कि सुप्रीमकोर्ट ने थर्ड जेंडर की मान्यता दे दी है तो फिर उनकी उपेक्षा क्यों की जा रही है। देश की उच्चतम अदालत सम्मान दे रही है तो फिर सभ्य समाज क्यों नहीं? अदालती फैसले से आए बदलाव का सामुदायिक चेतना प्रभाव पड़ा है। पर मुख्यधारा से जुड़ना बाकी है।

मेघना साहू                                             

मालूम हो कि ओडिशा छोड़कर बाकी बड़े राज्यों में जैसे यूपी, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा में कुछ किन्नरों ने चुनावी राजनीति में अकेले दम पर परचम फहराया है। मेघना साहू का कहना है कि ओडिशा में अबतक किसी भी दल ने किन्नरों को सम्मान नहीं दिया। उनका कहना है कि राजनीति में भागीदारी हमें और भी सम्मानजनक स्थिति में पहुंचा सकती है। साधना मिश्रा का कहना है कि तृतीय लिंगी के रूप में सुप्रीमकोर्ट ने मान्यता दे दी है तो हमें सारी सुविधाएं और सामाजिक सम्मान मिलना चाहिए। मेनका का कहना है कि वे लोग भी जागरूक मतदाता हैं। राजनीति का समाज पर असर से किन्नर समाज भी जुड़ा है। मसलन महंगाई बड़ेगी, हम लोग भी प्रभावित होंगे।

                                                      मेनका 

उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनाव 18 किन्नरों ने पर्चा दाखिल करके चुनाव लड़ा था। गोरखपुर की महापौर आशा देवी तो चुनाव अभियान में जाया करती थी। राजनीति में प्रवेश से किन्नरों के भी हौसले बुलंद होंगे। सम्मान मिलेगा। शबनम मौसी देश की पहली विधायक बनकर किन्नरों को राजनीति में सम्मान पाने का मार्ग प्रशस्त किया। गोरखपुर की आशा देवी ने मेयर का प्रत्यक्ष चुनाव जीता था।