राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना नवीन निवास

0
223

भुवनेश्वर (चुनाव डेस्क)। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का निजी आवास नवीन निवास ओडिशा में राजनीतिक हलचल का मुख्य केंद्र बना है। दूसरे दलों से आने वाले बड़े नेताओं को बीजेडी में शामिल करने की औपचारिकता नवीन निवास में की जा रही है। राज्य की राजनीति इसी इमारत के इर्द-गिर्द मंडराने लगी है। विभिन्न दलों के प्रभावशाली नेताओं की ज्वाइनिंग नवीन निवास में  मुख्यमंत्री पटनायक की मौजूदगी में ही करायी जाती है। प्रत्याशियों की घोषणा जल्द की जाने वाली है। महिला आरक्षण की पुरजोर वकालत करने वाले तथा लोकसभा में 21 सीटों में सात महिलाओं को टिकट देने के उनके निर्णय के बाद महिलाओं में खासी सक्रियता देखी गयी। नवीन निवास से करीब आधा किमी. दूरी पर बीजेडी का दफ्तर है जहां पर खास हलचल नहीं दिखती।

नवीन निवास अफसरों की चहल-कदमी यही संदेश देती है कि बीजेडी की राजनीति में यह वर्ग भी मुख्यमंत्री को फीड बैक देता है। बाहर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की आवाजाही जारी है। नवीन बाबू के कक्ष में उनके भरोसे के लोगों को ही एंट्री है। बीते एक हफ्ते में शायद ही कोई ऐसा दिन होगा जब नवीन पटनायक से गैर बीजेडी दल के नेता या कार्यकर्ता ज्वाइन करने की मंशा से उनसे मिलने न आए हो। मंगलवार को कालाहांडी के लाजीगढ़ क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे प्रदीप दिसारी ने बीजेडी ज्वाइन की।

नवीन निवास की सुरक्षा कड़ी कर दी है। फोटोग्राफरों और रिपोर्टरों को जरूरत पड़ने पर बुलाया जाता है। ये सब बाहर ही खड़े रहते हैं। अंदर जाने पर इलायची जूस, पानी पत्ता कराया जाता है। इस समय बीजेडी में शामिल होने वालों का तांता सा लगा है। बीजेडी में लोकसभा चुनाव के टिकट में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की घोषणा के बाद तो नवीन निवास राजनीतिक हलचल का बड़ा केंद्र बन गया है। बीजेडी में शामिल होने आईं बीजेपी की एक महिला कार्यकर्ता कहती हैं कि विधानसभा की टिकटों में नवीन बाबू ने आरक्षण तो नहीं घोषित किया है पर पिछली दफा (2014 के चुनाव में) 17 महिलाओं को टिकट बीजेडी ने दिया था जिसमें से 12 जीतकर विधानसभा पहुंची थी यानी लगभग 70 फीसदी। अबकी तो यह संख्या 25 से 30 तक पहुंच सकती है।

सोमवार को बीजेपी महिला मोर्चा की पूर्व उपाध्यक्ष सुषमा बिसवाल ने सैकड़ों समर्थकों के साथ बीजेडी की सदस्यता ग्रहण की। कई तो ऐसे भी होते हैं जिन्हें अपनी ही पार्टी यानी बीजेडी के नेताओं से शिकायत है। वह नवीन बाबू से मुखर होकर कहते हैं। उन्हें पता है कि उनकी कम से कम सुनी तो जाएगी। नवीन पटनायक बड़े फैसले नवीन निवास से ही लेते हैं। टीवी चैनलों की ओवी वैन खड़ी रहती हैं। हां, एक चैनल को नवीन निवास में एंट्री नहीं मिलती है। उसके पत्रकारों से कहा जाता है कि आप लोग एजेंडा के तहत आते हो। बाहर ही रहकर कवर करो या फिर पार्टी दफ्तर जाओ। लोग जानते हैं चैनल का नाम क्या है।

कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि आधे किलोमीटर पर पार्टी का दफ्तर है। वहां क्यों लोग नहीं जाते हैं। एक बीजेडी नेता का कहना था कि नवीन निवास को पार्टी कार्यकर्ता अपना घर जैसा मानते हैं। बीजू पटनायक (बीजू बाबू) के जमाने से ही यह निवास चहलकदमी का केंद्र रहा है। सन 1990 से 95 तक बीजू बाबू सीएम थे तब यहां इतनी कड़ी सुरक्षा नहीं होती थी। वह सबसे मिलते थे।