राघव की जगह कोकजे के आते ही तोगड़िया ने विहिप से नाता तोड़ा

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राघव रेड्डी की हार से व्यथित हैं विहिप नेता

17 अप्रैल से अहमदाबाद में बेमियादी अनशन

नई दिल्ली 15 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप के चलते विश्व हिंदू परिषद की नयी इबारत आखिरकार गढ़ ही दी गयी। नयी विहिप से तोगड़िया की छुट्टी हो गयी। मोदी विरोधी कहे जाने वाले विहिप के धुरंधर कार्यकारी अध्यक्ष डा.प्रवीण तोगड़िया ने विहिप से नाता तोड़ लिया है। वह 32 साल से विहिप में सक्रिय थे। बीते विहिप में करीब 54 साल से सर्वानुमित से पदाधिकारी चुने जाते रहे हैं। उन्होंने साफ कह दिया कि वह अब विहिप में नहीं हैं, पर हिंदुत्व की मजबूती के लिए काम करते रहेंगे।

तोगड़िया को यह झटका उस समय लगा जब गुरुग्राम हुए चुनाव में उनके प्रत्याशी राघव रेड्डी चुनाव हार गए। उनका कहना है कि राम मंदिर, 370 खतम करने तथा समान नागरिक संहिता पर अमल को लेकर सरकार उनका दबाव महसूस कर रही थी। उनकी मांग है कि देश ने जब भाजपा को पूर्ण बहुमत तो सरकार अपना वादा क्यों नहीं पूरा करती?

विहिप की नई कार्यकारिणी घोषित की जा चुकी है। तोगड़िया के करीबी राघव रेड्डी विश्व हिंदू परिषद  के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव हिमाचल के पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे से हार गए हैं। वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज भी रह चुके हैं। तोगड़िया और राघव रेड्डी को नई टीम में कोई भी नया दायित्व नहीं मिला है। इसके साथ ही तोगड़िया ने संगठन छोड़ने की घोषणा भी कर दी है। कोकजे को 131 वोट मिले और उन्होंने राघव रेड्डी को हराया जिन्हें 60 वोट मिले। विहिप के कुल 192 पदाधिकारी गुरुग्राम में हुए इस चुनाव में वोट डालने के लिए पात्र थे। तोगड़िया 32 साल से विहिप में रहे हैं और दिसंबर 2011 से इसके अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे थे। तोगड़िया ने चुनाव में अनियमितता का आरोप भी लगाया।
राघव की हार पर टिप्पणी करते हुए प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि शनिवार को करोड़ों हिंदुओं की आवाज को दबाने का काम हुआ है। मैं हिंदुओं की मांगों को बुलंद करता रहा। मैं आगे भी करोड़ों हिंदुओं, किसानों, युवाओं, मजदूरों की आवाज उठाता रहूंगा। उन्होंने घोषणा की कि वह 17 अप्रैल से अहमदाबाद में अनिश्निचितकालीन उपवास पर बैठने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अनशन किसानों, महिलाओं, मजदूरों की मांगों के लिए होगा। उन्होंने राम मंदिर बनाने की भी प्रतिबद्धता जताई। इसके अलावा गोहत्या, कॉमन सिविल कोड, कश्मीर के हिंदुओं को वापस बसाने की भी बात कही। तोगड़िया ने आगे कहा कि वह किसानों को दोगुना मूल्य दिलाने की मांग करेंगे।


जानकारी के अनुसार चुनाव कराना तब जरूरी हो गया जब संगठन के सदस्यों के बीच नए अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर आम सहमति नहीं बन पाई। विहिप की ओर से जारी एक बयान के अनुसार कोकजे ने नई केंद्रीय कार्यकारी टीम के लिए नाम प्रस्तावित किए जिसे बोर्ड ने मंजूरी दी। आलोक कुमार को विहिप का कार्यकारी अध्यक्ष और अशोक राव चौगुले को कार्यकारी अध्यक्ष (एक्सटर्नल) बनाया गया है। मिलिंद परांदे नए महासचिव और विनायक राव देशपांडे संगठन महासचिव बने हैं। चंपत राय उपाध्यक्ष और वी. कोटेश्वर राव संयुक्त महासचिव होंगे।
बताया जाता है कि पहली बार चुनाव कराने की वजह भी प्रवीण तोगड़िया का वीएचपी पर प्रभाव खत्म करना ही था। दरअसल, केंद्र सरकार और खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई मौकों पर निंदा करने के चलते प्रवीण तोगड़िया से संघ और बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व नाराज चल रहा था।  विहिप के संविधान के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष ही कार्यकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महामंत्रियों की नियुक्ति करता है। वीएचपी के 54 वर्षों के इतिहास में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए।
जानें कोकजे को

कोकजे का जन्म 6 सितंबर 1939 को  मध्य प्रदेश में हुआ था। इंदौर से LLB करने के बाद 1964 में उन्होंने लॉ की प्रैक्टिस शुरू की।

जुलाई 1990 में कोकजे को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया

साल 2001 में वह राजस्थान हाई कोर्ट के भी जज रहे।

2003 से 2008 तक  हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे।

(एनबीटी से इनपुट के साथ)

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