रसगुल्ला की जंग में न ओडशा हारा न पश्चिम बंगाल, तुम्हारी भी जय हमारी भी जय जय

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भुवनेश्वर (विशेष प्रतिनिधि)। रसुग्ला का जीआई टैग हासिल करने की लड़ाई कागजी तौर पर सोमवार को ओडिशा ने जीत ली है। उसे ओडिशा रसगोला के नाम का जीआई टैग का सर्टिफिकेट आवंटित किया गया है। सवाल है कि क्या रसगुल्ला को लेकर दोनों राज्यों के बीच कड़वाहट समाप्त हो गयी है? जीआई टैग ने बीच का रास्ता निकालते हुए प्रदेशों के नाम से जीआई टैग दिया है। एक का है बगालर रसोगोल्ला तो दूसरे का ओडिशा रसगोला। सवाल यह है कि किसी भी पदार्थ पहले एक ही क्षेत्र में बनाया गया होगा। रसगुल्ला पहले ओडिशा में बना कि पश्चिम बंगाल में यह लड़ाई तो जारी है।

महाप्रभु ने माता लक्ष्मी को खिलाया था

दस्तावेजी सबूत है कि सदियों पहले से रसगोला रथयात्रा के दौरान माता लक्ष्मी जी को मनाने के लिए महाप्रभु जगन्नाथ उन्हें रसगोला खिलाकर उनका गुस्सा शांत करते हैं। यह प्रथा ओडिशा में अभी भी जारी है। समय पर कागजी सबूत जीआई टैग आफिस चेन्नई को न देने से फैसला पश्चिम बंगाल के हक में चला गया था। यह मिठाई अबकी ओडिशा रसगोला के नाम से रजिस्टर्ड हुई। इस जीआई टैग की वैधता 22 फरवरी 2028 तक रहेगी। इस खुशी में ओडिशा में जश्न का माहौल है। यहां पर उल्लेखनीय है कि नवंबर 17 को बंगालर रसोगोल्ला का जीआई टैग पश्चिम बंगाल को मिल गया था। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती भी दी गयी थी। ओडिशा सरकार के तत्कालीन वित्तमंत्री शशिभूषण बेहरा ने कहा था कि यह मिठाई ओडिशा की है और रहेगी। जीआई टैग के लिए जंग जारी है।

चलता रहेगा हाईकोर्ट में केस

बीती फरवरी 2018 को ओडिशा हाईकोर्ट में इसी प्रकरण को लेकर जनहित याचिका दायर की गयी थी। इसमें पश्चिम बगाल को आवंटित जीआई टैग पर सवाल उठाए गए थे। यही नहीं रसगुल्ला की जंग विधानसभा में छिड़ी। विपक्ष ने नवीन सरकार को घेरते हुए कहा था कि जीआई टैग लूज करने के पीछे सरकार की लापरवाही है। पैरवी सही नहीं की गयी। तब सरकार की ओर से तत्कालीन एमएसएमई मंत्री प्रफुल्ल सामल ने कहा था कि अबकी पुख्ता दावेदारी की गयी है। पश्चिम बंगाल ठहर नहीं पाएगा। सभी कागजात दाखिल कर दिए गए हैं। चेन्नई आफिस के संपर्क में सरकार है, रसगुल्ला ओडिशा का है और ओडिशा का ही रहेगा। सारे कागज 12 अगस्त 2018 को कागजात दाखिल किए जा चुके  हैं। जीआई टैग के 14 बिंदुओं ओडिशा सरकार ने जानकारी दाखिल की है जो दावे को पुख्ता करते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि याचिका वापस नही ली जाएगी।

हाईकोर्ट में भी सुनवायी जारी

जीआई टैग मिल चुका है पर हाईकोर्ट में सुनवायी जारी है। जीआई (ज्योग्राफिकल इंडीकेशन) टैग को लेकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच यह लड़ाई ओडिशा हाईकोर्ट तक जा पहुंची। ओडिशा हाईकोर्ट ने 9 मई 2018 को पश्चिम बंगाल को रसगुल्ला का जीआई टैग बंगालर रसगुल्ला के नाम से देने के फैसले को चुनौती देने संबंधी एक पीआईएल की सुनवायी के दौरान दोनों राज्यों को नोटिस जारी करके जरूरी सूचना तलब की है। हाईकोर्ट ने ओडिशा सरकार के चीफ सेक्रेटरी और पश्चिम बंगाल स्टेट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी नोटिस जारी किया है। नोटिस श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और चैन्नई इंटलेक्चुअल प्रापर्टी आफिस (आईपीओ) को भी जारी किया गया है। यह पीआईएल पांच फरवरी को ओडिशा हाईकोर्ट में पुन्य उत्कल फाउंडेशन के सचिव सुशांत साहू व ओडिशा प्रभा के संपादक संतोष कुमार साहू ने दायर की थी।