रसगुल्ला किसका, जंगजारी-पश्चिम बंगाल में 14 को रसगुल्ला दिवस

0
16

भुवनेश्वरर। पश्चिम बंगाल सरकार ने 14 नवंबर को रसगुल्ला दिवस मनाने का एलान किया है। मार्केटिंग से लिहाज यह तारीख चुनी है। इस दिन बाल दिवस होता है। पश्चिम बंगाल सरकार का मानना है कि जीआई टैग बंगालर रसगुल्ला के नाम से मिला था। एक साल हो रहा है। ऐसे में रसगुल्ला दिवस धूमधाम से राज्य भर में मनाया जाएगा।

होंगी संगोष्ठियां

कोलकाता के ईको पार्क के पास मिष्ठी हब में रसगुल्ला इस दिन प्रमुख रूप से हर दुकान में सजाया जाएगा। लोगों रसगुल्ला पार्टी भी करेंगे। इस दिन संगोष्ठियों में रसगुल्ला के इतिहास पर परिचर्चा की जाएगी। मालूम हो कि ओडिशा रसगुल्ला दिवस 2015 से धूमधाम से मनाता है। यहां पर रसगुल्ला को जगन्नाथ संस्कृति से जोड़ा गया है। ऐसे प्रमाण हैं जो साबित करते हैं कि रसगुल्ला ओडिशा की ही देन है।

700 साल पहले ओडिशा में थी यह मिठाई

पश्चिम बंगाल के पक्ष में गया रसगुल्ला का जीआई टैग वापस लाने को ओडिशा ने भी दावा किया है। इससे जुड़े साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। बताते हैं कि रथयात्रा के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ ने रूठी हुई देवी लक्ष्मी को मनाने के लिए पहली बार रसगुल्ला ही खिलाकर उनकी नाराजगी दूर की थी। इसका उल्लेख भी जगन्नाथ संस्कृति में है। दांडी रामायण में भी इसका उल्लेख है जो प्रमाण देता है कि रसगुल्ला ओडिशा का है। इस मिठाई के जन्म के पीछे कई मान्यताएं है। उड़िया लोगों का मानना रहा है कि इस मिठाई का जन्म पूरी में हुआ था। 700 साल पुरानी यह मिठाई, वहां की प्रथा से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ ने अपनी पत्नी लक्ष्मी को रथ यात्रा में साथ न चलने को राजी करने के लिए इस मिठाई को खिलाया था। 11वीं सदी में अपने सफेद रंग की वजह से इसे खीरमोहन के नाम से जाना जाता था और इसी कारण छेना से बनी इस मिठाई से महालक्ष्मी को भोग लगाना अनिवार्य माना जाता है। खासकर रथ यात्रा के आखरी दिन को जिसे निलाद्री विजय भी कहते हैं। हांलाकि इसे बनाने की विधि मंदिर ने गुप्त रखी थी, फिर भी यह मंदिर के बाहर कैसे पहुंची ये जानना कठिन है। कुछ लोगों का मानना है कि मंदिर के ही किसी पंडित ने जब देखा कि गांव में दूध की अत्याधिक बर्बादी हो रही है तब उसने लोगों को छेना निकालना और फिर रसगुल्ला बनाना सिखाया।

 

हाईकोर्ट में भी सुनवायी जारी

जीआई (ज्योग्राफिकल इंडीकेशन) टैग को लेकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच यह लड़ाई ओडिशा हाईकोर्ट तक जा पहुंची। ओडिशा हाईकोर्ट ने 9 मई 2018 को पश्चिम बंगाल को रसगुल्ला का जीआई टैग बंगालर रसगुल्ला के नाम से देने के फैसले को चुनौती देने संबंधी एक पीआईएल की सुनवायी के दौरान दोनों राज्यों को नोटिस जारी करके जरूरी सूचना तलब की है। हाईकोर्ट ने ओडिशा सरकार के चीफ सेक्रेटरी और पश्चिम बंगाल स्टेट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी नोटिस जारी किया है। नोटिस श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और चैन्नई इंटलेक्चुअल प्रापर्टी आफिस (आईपीओ) को भी जारी किया गया है। यह पीआईएल पांच फरवरी को ओडिशा हाईकोर्ट में पुन्य उत्कल फाउंडेशन के सचिव सुशांत साहू व ओडिशा प्रभा के संपादक संतोष कुमार साहू ने दायर की थी।

राष्ट्रीय मिठाई के रूप में पेश

वर्ष 2010 में एक मैगजीन के लिए करवाए गए सर्वे में रसगुल्ला को राष्ट्रीय मिठाई के रूप में पेश किया गया था। ओडिशा सरकार ने रसगुल्ला की भौगोलिक पहचान (जीआइ) के लिए सबसे पहले कदम उठाया। पश्चिम बंगाल ने इसका विरोध शुरू कर दिया। जीआइ वह आधिकारिक तरीका है जो किसी वस्तु के उद्गम स्थल के बारे में बताता है। ओडिशा का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय रसगुल्ला को राज्य की भौगोलिक पहचान से जोडने में लगा हुआ था। दस्तावेज इकट्ठा किए गए थे, जिससे साबित हो कि पहला रसगुल्ला भुवनेश्वर और कटक के बीच अस्तित्व में आया। वहीं, पश्चिम बंगाल इन सभी दावों का तोड़ ढूंढ निकाला और आखिरकार  रसगुल्ले पर पश्चिमबंगाल का कब्जा हो गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here