मोदी-नवीन की नजदीकियों ने दिए चुनाव बाद समर्थन के संकेत

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भुवनेश्वर। तूफान से उजड़े ओडिशा को संवारने में केंद्र व राज्य में सामंजस्य काफी कुछ बैठाया जा चुका है। हल्कीफुल्की चुनावी तल्खियों के बाद भी बीजेडी और बीजेपी के बीच माहौल थोड़ा दोस्ताना सा दिखने लगा है। इसे भविष्य में सत्ता समर्थन के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक क्षेत्रों में कहा जाने लगा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक दूसरे की तारीफ करके एक बार फिर पोलिटिकल दोस्ती की संभावनाओं के नये संकेत दिए हैं। फॉनी को गये 11 दिन हो गए हैं लोग बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 मई को ओडिशा आकर नवीन के साथ हवाई सर्वेक्षण किया और आपदा प्रबंधन को लेकर नवीन पटनायक की तारीफ में कसीदे पढ़े। यही चुनावी जंग के दौरान भी नवीन पर पर्सनल अटैक से बचते रहे। ज्यादातर रैलियों में निशाने पर कांग्रेस को ही रखा। लोकसभा में ओडिशा की 21 सीटें हैं। 2014 में बीजेडी के पास 20 और बीजेपी के पास एक सीट थी। कहा जा रहा है कि अबकी बीजेपी स्कोर बढ़ा सकती है।

दूसरी तरफ केंद्र सरकार के सहयोग को लेकर पटनायक ने भी मोदी के सहयोग की प्रशंसा की और धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मोदी को एक पत्र भी भेजा। यह खतोकिताबत मोदी को फिर सत्ता में आने से रोकने की दिशा में रीजनल पार्टियों की कोशिशों को धीरे से लगा जोर का झटका के रूप में देखा जा रहा है। मोदी को रोकने के नाम पर फेडरल फ्रंट गठन को लेकर जुटे तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव चुनाव घोषणा से पहले नवीन पटनायक से भुवनेश्वर में मिलने आए थे पर उनकी दाल नहीं गली। राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि पटनायक, राव और आंध्र में वाईएसआर कांग्रेस चीफ जगनरेड्डी के सांसद जरूरत पड़ने पर मोदी से गठजोड़ कर सकते हैं। यह चर्चा राष्ट्रीय पर भी है।

कुल मिलाकर कहा जाने लगा है कि चुनावी नतीजे आने के बाद सरकार गठन के दौरान बीजू जनता दल से तालमेल की राजनीतिक इबारत गढ़ी जाने लगी है। केद्र ने भी ओडिशा के पुनर्निर्माण के लिए खजाना खोल दिया है। बीजू जनता दल के गठन के बाद दोनों ही दल साथ-साथ थे। नवीन पटनायक अटल सरकार में केंद्रीय मंत्री थे। तब वह जनता दल से आसका लोस क्षेत्र से चुने गए थे। फिर उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता के नाम पर बीजू जनता दल बनाया। बीजेपी के साथ गठजोड़ करके ओडिशा में सरकार बनायी। पांच साल बाद गठबंधन टूट गया। नवीन की पार्टी ने अकेले दम पर राज्य में सरकार बना ली।

नवीन के धुर विरोधी कहे जाने वाले केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तीखे तेवर भी केंद्र के इशारे पर शांत हैं। वह बराबर सहयोग कर रहे हैं। दोनों तरफ से बयानबाजी बंद है। फॉनी चक्रवात से उजड़े लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना में पांच लाख पक्का घर देने की नवीन की मांग पर केंद्र का सकारात्मक रुख राजनीतिक हल्कों में चर्चा में है। मोदी को संबोधित पत्र में नवीन ने यहां तक लिखा कि धन स्वीकृति की प्रत्याशा में वह पीड़ितों की मदद के लिए एक जून को टेंडर का आर्डर देने जा रहे हैं। फॉनी के बाद मोदी की ओडिशा विजिट और पीड़ा जानने में पीएम की रुचि का उल्लेख भी नवीन ने किया।

हालांकि बीजेपी विधायक दल के नेता केवी सिंहदेव नवीन की इस मांग पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि फॉनी के कारण बेघर हुए पीड़ितों की तक पटनायक सरकार ने की नहीं और मांगने लगे पक्का मकान। देव के इस बयान के बाद प्रदेश अध्यक्ष बसंत पंडा से उनकी बातचीत भी हुई। उधर बीजेडी के प्रवक्ता सस्मित पात्रा कहते हैं कि उनकी पार्टी बीजेपी और कांग्रेस से समान दूरी रखने पर कायम है। नवीन पटनायक का जरूरत पड़ने पर मोदी को सपोर्ट को लेकर इसलिए अटकलों का बाजार और भी गरम है क्योंकि बीते पांच साल में मोदी सरकार को नवीन के सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में समर्थन किया है। यही नहीं, विमुद्रीकरण (डीमॉनटाइजेशन), उत्पाद एवं सेवा कर (जीएसटी), दि सिटिजेनशिप अमेंडमेंट बिल पर बीजेडी के सांसदों का लोस और रास दोनों मे ही केंद्र को समर्थन रहा है। और तो और राज्यसभा उपसभापति चुनाव में भी नवीन के सांसद मोदी के साथ खड़े दिखे। इस कार्यकाल में नवीन के बीस सांसद लोकसभामें तथा नौ सांसद राज्यसभा में हैं।