मोदी के पुरी से लोकसभा लड़ने की संभावना बढ़ी

0
69

हिंदी बेल्ट से नुकमान की भरपायी कोरोमंडले से

तो ओडिशा से होकर जाएगा दिल्ली का रास्ता

कोरोमंडल राज्यों के फतह का ताना-बाना तैयार

भुवनेश्वर (चुनाव डेस्क)। हिंदी बेल्ट से संभावित नुकसान की भरपायी के लिए बीजेपी ने कोरोमंडल फतह का प्लान लगभग तैयार कर लिया है। इसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजय रथ ओडिशा के पुरी से शुरू होगा। ओडिशा के पुरी संसदीय क्षेत्र से लड़ाया जा सकता है। महाप्रभु जगन्नाथ के भक्त होने के कारण प्रधानमंत्री वैष्णव क्षेत्र से भी चुनाव लड़ सकते है। तीन राज्य हारने व यूपी में सपा-बसपा गठबंधन से बीजेपी के पसीने छूटे हैं। बीजेपी ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल सहित तटीय राज्यों से भरपायी करने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।

सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो सीटों से लड़ने की खबर है जिनमें एक पुरी संसदीय सीट हो सकती है। इस पार्टी में मंथन जारी है। उनका राजनीतिक सफर सोमनाथ से काशी विश्वनाथ या शैव क्षेत्र और अब जगन्नाथ यानी वैष्ण क्षेत्र हो सकता है। संगठन के उच्चपदस्थ सूत्र कहते हैं कि अंतिम फैसला खुद मोदी लेंगे।

हालांकि लगातार फोकस के कारण दावा किया जाता है कि बीजेपी कम से कम दोनों राज्यों में सीटें बढ़ाने में कामयाब हो सकती है बशर्ते मोदी खुद ओडिशा के किसी क्षेत्र से चुनाव लड़ें। यूं तो उनके पुरी (जगन्नाथ) संसदीय क्षेत्र से अटकलें लगायी जा रही हैं पर इन दिनों अटकलों को काफी बल मिला। सूत्र बताते हैं कि रणनीतिकारों ने मोदी को बता भी दिया है कि 2019 में दिल्ली पहुंचने का रास्ता अबकी ओडिशा से जाएगा। यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि मोदी या फिर अमित शाह यहां से लड़ सकते हैं। यदि मोदी लड़ते हैं कि तो उन्हें बाद में एक सीट छोड़नी पड़ सकती है।

फिलहाल बीजेपी का गुणाभाग ओडिशा में कम से कम 16 सीटें हासिल करने को लेकर है। सरकार बनने से अब तक मोदी ने दस सभाएं ओडिशा में की हैं। जिला परिषद चुनाव में 36 सीटों से तीन सौ से ऊपर पहुंचने के कारण बीजेपी उत्साह से लबरेज है। इस सफलता से यहां पर कांग्रेस को तीसरे नंबर पर आंका जाने लगा है। पार्टी की दो दिवसीय नेशनल एक्जीक्यूटिव भी भुवनेश्वर में 15 अप्रैल 2017 को हुई थी। तभी पार्टी ने कोरोमंडल (तटीय राज्यों) का गेट भुवनेश्वर घोषित कर दिया गया था।

वैसे तो मोदी ने बीते साल सरकार के चार साल होने पर 26 मई 2018 को कटक में रैली करके जनता को हिसाब देते हुए चुनावी बिगुल फूंक दिया था। चार साल पूरे होने पर ओडिशा में रैली करके चार साल का हिसाब देने के राजनीतिक निहितार्थ चर्चा शुरू हो गयी थी। ओडिशा में लोग कहने लगे हैं कि मोदी का ओडिशा की किसी भी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ना संभव हो सकता है। बीजेपी की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष बसंत पंडा का कहना है कि अप्रैल 2017 को नेशनल एक्जीक्युटिव की मीटिंग में ही प्रधानमंत्री से अनुरोध किया था। इस आशय का प्रस्ताव भी दिया है। फैसला पार्टी का होगा।

मोदी कोरोमंडल (पूर्वी और तटीय) राज्यों में मिशन 2019 की शुरुआत तो बीते साल ही कर दी थी। बताया जाता है कि कोरोमंडल राज्यों में लोकसभा की 160 सीटें हैं जहां पर बीजेपी काफी कमजोर दिखती है। पार्टी के लोगों का कहना है कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल से काफी उम्मीदें हैं। ओडिशा में 21 में एक तथा पश्चिम बंगाल में 42 में दो सीटें बीजेपी के पास हैं। पार्टी के लोग कहते हैं कि बीजेपी का मिशन कोरोमंडल का रास्ता ओडिशा से होकर जाता है। यही नहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ओडिशा में मिशन 120+ शुरू कर दिया है। उनका दावा है कि राज्य की 147 में से 120 से ज्यादा सीटें बीजेपी की आ सकती हैं। तभी ओडिशा में डबल इंजन की जरूरत बीजेपी वाले कहते हैं। मोदी की सभाओं में भीड़ जुटना बेहतर संकेत माने जा रहे हैं। हालांकि एक समय 2004 में कांग्रेस को रोकने के लिए बीजेपी और बीजेडी ने गठबंधन किया था और 93 सीटें जीती थी। नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी ने 93 सीटों पर लड़ा और 61 जीतीं थी।

मोदी को ओडिशा की किसी सीट ले लड़ाकर बीजेपी न केवल लोकसभा चुनाव में बेहतर करना चाहती है बल्कि विधानसभा चुनाव में भी फतह के मंसूबे पाले है।