मुख्यधारा से जुड़ने को किन्नरों की अनूठी पहल, सावित्री व्रत पूजन समारोह

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भुवनेश्वर 15 मई। देश की धार्मिक परंपरा के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है। वट सावित्री अमावस्या व्रत करने के पीछे ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वटवृक्ष की परिक्रमा करने पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश सुहागिनों को सदा सौभाग्यवती रहने का वरदान देते हैं। पर जब सावित्री व्रत पर बात किन्नर समुदाय की हो तो स्टोरी रोचक हो जाती है। ओडिशा के स्मार्ट सिटी के किन्नर भी मुख्यधारा में जुड़ते दिखने लगे हैं। सावित्री व्रत (वट सावित्री) के अवसर पर पलासपल्ली इलाके मे किन्नरों ने विधि विधान से इस पावन पर्व पर पूजा अर्चना की। इस अवसर पर दो किन्नरों ने अपने पुरुष मित्रों के साथ शेष जीवन बिताने के लिए विवाह का भी संकल्प लिया। एक दूसरे को माल्यार्पण करके पूजा की। सबेरे से ही पलासपल्ली में लोग किन्नरों को वट सावित्री का धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए जुटने लगे।

सखा संप्रदाय की प्रमुख किन्नर अखाड़ा पूर्वी भारत की महामंडलेश्वर मीरा परीड़ा के इस आयोजन में तकरीबन 35 किन्नरों ने व्रत करके सावित्री पूजा की। इसके लिए एक पुरोहित को विशेष तौर पर बुलाया गया था। इस व्रत में पकवान आदि सामग्री भरपूर तरीके से रख गयी थी। इस पुनीत अवसर शिवानी और गुरुवारी किन्नर ने क्रमशः जीतू और जगा के साथ जीवन की डोर बांधने का संकल्प लिया। मीरा परीड़ा कहती हैं कि दोनों जोड़ों ने एक दूसरे को माला पहनाकर दांपत्यसूत्र बंधन में बंधने का फैसला किया। इनका विवाह समारोह सखा संगठन की ओर से आयोजित किया जाएगा। उनका कहना है कि सावित्री व्रत की कथा का भाव यही है कि स्त्री को सुरक्षा देने वाले पुरुष की लंबी आयु की कामना की जाती है। ऐसे में किन्नरों की सुरक्षा उनके गुरु करते हैं। ऐसे में गुरु की लंबी आयु के लिए ये लोग व्रत करते हैं।

ओडिशा में यह परंपरा करीब दस साल पुरानी है। इसे शुरू करने का श्रेय मीरा को जाता है। इससे पूर्व करीब दो साल पहले मेघना साहू किन्नर ने विधिवत विवाह किया था। मेघना ओला गाड़ी की ड्राइवर है। इस अवसर साधना मिश्रा, आइशा, बंसिखा आदि किन्नरों की उपस्थिति रही। मीरा परीड़ा कहती हैं कि किन्नर समुदाय को देश में ‘तृतीय लिंग’ के रूप में संवैधानिक मान्यता मिले हुए भले ही दो साल से ज्यादा समय बीत गया हो लेकिन अभी भी समाज में किन्नरों की दशा में कोई खास सुधार नहीं आया है। ये तीज त्यौहार में शादी विवाह इन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने और सभ्य समाज में इनकी स्वीकार्यता एक इंसान के रूप में लाने को ये प्रयास किए जा रहे हैं। किन्नर समुदाय आर्थिक एवं सामाजिक स्तर पर पिछड़ा हुआ है। इन्हें अभी भी हीन और तिरस्कृत दृष्टि से देखा जाता है। मीरा कहती हैं कि जरूरत है लोगों के नजरिए को बदलने की। यह बदलाव आते ही स्थिति सुधरने लगेगी। साधना मिश्रा कहती हैं कि ऐसे त्यौहारों में हम लोगों की भागीदारी से मुख्यधारा में जुड़ने का उत्साह पैदा होता है।

 

किन्नर आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं। इसलिए इन्हें समाज में हर स्तर पर आरक्षण देना चाहिए। मसलन, स्कूलों, कॉलेजों में किन्नरों की शिक्षा-दीक्षा से लेकर नौकरियों तक में आरक्षण की जरूरत है। सार्वजनिक स्थलों व कार्यालयों में हमारे लिए अलग से शौचालय बनाने की पहल ओडिशा सरकार ने कर दी है। यह एक अच्छा कदम है। मीरा परीड़ा कहती हैं कि जिस तरह से महिला आयोग महिलाओं से जुड़े मामलों व मुद्दों पर नजर रखता है और उसके लिए पैरवी करता है। ठीक उसी तरह से किन्नरों के अधिकारों व सम्मान के लिए भी एक संस्था या आयोग का गठन किया जाए। उन्होंने राजनीति में किन्नरों की भागीदारी की भी बात कही कि जब तक राजनीति में किन्नरों को स्थान नहीं मिलेगा, उनके हित में नीतियां बनाने में ढील बरती जाएगी। किन्नरों को पासपोर्ट भी मिलने लगा है।

 

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