भुवनेश्वर में हो गया था तोगड़िया व राघव को हटाने का फैसला

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तोगड़िया के लिए कांटों भरी थी भुवनेश्वर से गुरुग्राम की यात्रा

मोदी को विपक्ष की लामबंदी के साथ ही अपनो से भी खतरा

भुवनेश्वर। 24 से 27 दिसंबर 2017 से चार दिवसीय भुवनेश्वर में हुई विश्व हिंदू परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अंतर्राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया और उनकी टीम की विदाई के निर्णय पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक सरसघ चालक मोहन भागवत की मुहर लग चुकी थी। इन्हीं तारीखों में भुवनेश्वर से 120 किलोमीटर दूर भागवत अनुगुल जिले के एक सरस्वती शिशु मंदिर में तीन दिवसीय प्रवास पर थे। महामंत्री चंपत राय उनके संपर्क में थे।

एक पदाधिकारी का कहना है कि विहिप बैठक में ही मतभेद उभरने लगे थे। भुवनेश्वर में चुनाव कराने की योजना पर पानी फिर गया। इस बैठक में तोगड़िया के नेतृत्व पर सवाल भी उठे पर भनक नहीं लगने दी गयी। तय हो गया था कि गुरुग्राम में फैसला हो जाएगा। रणनीति बनायी जा चुकी थी कि अबकी विहिप के संविधान के अनुसार चुनाव कराके पदाधिकारी तय किए जाएंगे। सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी।

भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि आरएसएस के नेतृत्व ने विश्व हिंदू परिषद को निर्देश दे दिया है की ज़रूरत पड़ने पर संगठन के संविधान के अनुसार संगठन के चुनाव भी कराये। वीएचपी के कार्यकारी बोर्ड की बैठक में संघ के बड़े अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। दरअसल संघ नहीं चाहता हैं कि प्रवीण तोगड़िया विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष और राघव रेड्डी वीएचपी के अध्यक्ष बने रहे। 14 अप्रैल को कार्यकारिणी बोर्ड की बैठक में संघ की पसंद वी. कोकजे नए वीएचपी अध्यक्ष बन सकते हैं।

वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया और वीएचपी के अध्यक्ष राघव रेड्डी का कार्यकाल पिछले साल दिसम्बर में ही ख़त्म हो गया था। वीएचपी के नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए बीते 29 दिसंबर को भुवनेश्वर संगठन के कार्यकारी बोर्ड की बैठक हुई थी। आरएसएस राघव रेड्डी की जगह कोकजे को अध्यक्ष बनाना चाहता था, लेकिन तोगड़िया और उनके समर्थकों ने हंगामा करके चुनाव को नहीं होने दिया था। इसी के चलते नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका। पिछले महीने नागपुर में संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रवीण तोगड़िया और राघव रेड्डी को संघ नेतृत्व ने साफ़ कर दिया था की दोनों को अपने पद छोड़ने पड़ेंगे।

तोगड़िया और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बैर का बयार जगजाहिर है। संघ के सूत्रों के अनुसार संघ के बड़े अधिकारियों के पास ये जानकारी है कि प्रवीण तोगड़िया ने गुजरात में बीजेपी के खिलाफ कई काम किए थे। संघ के नेतृत्व के पास ये भी जानकारी है कि गुजरात के पाटीदार नेता और चुनाव में कोंग्रेस का समर्थन करने वाले हार्दिक पटेल प्रवीण तोगड़िया के साथ लम्बे समय से सम्पर्क में थे।संघ का तोगड़िया को हटाने के पीछे एक कारण ये भी है कि मोदी सरकार बनने के बाद से जिस तरह से प्रवीण तोगड़िया मोदी और बीजेपी के खिलाफ खुल कर हमले करते हैं, इससे सरकार और बीजेपी दोनों पर विपक्ष को भी हमला करने का मौका मिल जाता है।

प्रवीण तोगड़िया ने पिछले दिनों अपने एनकाउंटर का आरोप इशारों-इशारों में पीएम मोदी और उनकी सरकार पर बड़े आरोप लगाए थे। संघ नहीं चाहता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सरकार और बीजेपी के साथ उनके अन्य संगठनों के बीच में किसी भी तरह मतभेद आम जनता के सामने आये। इसलिए संघ नहीं चाहता है कि प्रवीण तोगड़िया विहिप में कार्यकारी अध्यक्ष पद बने रहे।

संघ जानता है की पूरा विपक्ष 2019 के आम चुनाव में मोदी सरकार और बीजेपी के ख़िलाफ़ लामबंद होने जा रहा है। ऐसे में अपने संगठनों ने भी अगर सरकार और बीजेपी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया तो सरकार की ताक़त भी कम होगी और मुश्किलें भी बढ़ जायेगी, जिसका ख़ामियाज़ा चुनाव में उठाना पड़ेगा। इस कवायद से ये बात साफ है संघ 2019 लोकसभा चुनाव पीएम मोदी के रास्ते में आने वाली सभी अंदरूनी रुकावटों को पहले दूर कर देना चाहता हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष से कम और अपनो से ज़्यादा खतरा हैं।

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