फॉनी को लेकर केंद्र पर आक्रामक हुआ बीजद, केंद्र को जवाब देना पड़ा

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भुवनेश्वर (विप्र)। इसी साल तीन मई को चक्रवाती तूफा फॉनी से मची तबाही प्रभावित जिलों में तबाही के घाव अभी भी हरे हैं। बीजेडी संसदीय दल के नेता पुरी के सांसद पिनाकी मिश्रा मंगलवार को लोकसभा में फॉनी से तबाह ओडिशा का मामाल लोकसभा में उठाते हुए राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद का मुद्दे पर सरकार से प्रश्न पूछा।मिश्रा के तारांकित प्रश्न 202 के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से गृह राज्यमंत्री नित्यानंदराय ने कहा कि यूं तो आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य की होती है पर केंद्र भी लॉजिस्टिक और अतिरिक्त वित्तीय सहायता आंकलन के उपरांत देती है। उन्होंने दावा किया केंद्र फॉनी के दौरान मदद की। ओडिशा के प्रभावित लोगों की मदद को केंद्र ने 29 अप्रैल 2019 को राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) में 340.875 करोड़ अपने हिस्से की राशि एडवांस जारी की। इसके अलावा फॉनी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के दौरे पर थे। केंद्र ने सात मई को राज्य को एनडीआरएफ/एसडीआरएफ से ऑन एकाउंट केआधार पर 1,000 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय सहायता जारी की थी। राज्य सरकार से ज्ञापन प्राप्त होने से पहले ही केंद्र एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम का गठन किया मौके पर आंकलन को भेजा जिसकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र ने वर्ष 2019 में 3338.22 करोड़ रुपये की राशि अनुमोदित की थी। इस प्रकार अब तक कुल लगभग 4,679.468 करोड़ की व्यवस्था की गयी। फॉनी से 10 हजार गांव और 52 शहरी क्षेत्रों में तबाही का असर साफ दिखा था।

चक्रवाती तूफान फॉनी से ओडिशा में हुई तबाही से कुल 64 मौते अधिकारिक तौर पर बतायी जाती हैं। सैकड़ों लोगों के धाय़ल हो गए थे। तबाही के छह माह बीत गए हैं पर राहत एवं पुनर्वासन कछुआ चाल से चल रहा है। यूं तो फॉनी का असर तटीय जिलों समेत 14 जिलों पर रहा, लेकिन सबसे ज्यादा तबाही का मंजर पुरी, खोरदा (भुवनेश्वर) और कटक में दिखा। लंबे समय तक यह क्षेत्र कटऑफ रहा। पानी, बिजली, संचार व्यवस्था अब सुधर पायीहै। राहत, पुनर्वास एवं उजड़े गांवों के पुनर्निर्माण की दिशा में हो रहे धीमे कार्यों से लोगों की परेशानियां बढ़ी हैं।

नीती आयोग की स्थायी समिति के सदस्य पूर्व सूचना आयुक्त जगदानंद रिलीफ के लोगों तक पहुंचने और क्षति का आंकलन के लिए सिविल सोसाइटी की मदद से जमीनी हकीकत पता करके शासन को रिपोर्ट देते रहे हैं। इस काम 40 गैर सरकारी संगठन उनके दिशा निर्देश करते थे। वह कहते हैं कि सड़कों पर पड़े हाई, लो पॉवर की बिजली की लाइन के खंभे, विशाल वृक्ष समेत रिलीफ के अन्य कार्यों में काफी तेजी लाकर बिजली, पानी, संचार व्यवस्था सुदृढ़ हो सकती थी यदि राज्य सरकार सेना की सहायता ले लेती।

उनका कहना है कि उन्हें अच्छी तरह याद है जब 1999 में सुपर साइक्लोन की तबाही से दस हजार लोगों की मौत और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ था। ओडिशा में सेवा बहाली में तब सेना की मदद ली गयी थी। फॉनी की तीव्रता सुपर साइक्लोन से कम नहीं थी। फिर राज्य सरकार ने सेना की मदद क्यों नहीं ली, यह समझ के परे है।